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सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत पर संजय राउत की टिप्पणी से सियासी घमासान, भाजपा ने किया तीखा पलटवार

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सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत पर संजय राउत की टिप्पणी से सियासी घमासान, भाजपा ने किया तीखा पलटवार

सारांश

नीट पेपर लीक के विरोध-प्रदर्शनों के बीच संजय राउत ने एक्स पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को आंदोलनों की 'नई ऊर्जा' का श्रेय दे दिया — और इस एक पोस्ट ने न्यायपालिका, विपक्ष और सत्तापक्ष को एक नई राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में खींच दिया।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 20 जुलाई को एक्स पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को देशव्यापी जनआंदोलनों की नई ऊर्जा का श्रेय दिया।
राउत ने सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल भर्ती कराने और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की।
राउत ने नीट विवाद में जवाबदेही के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँगा।
भाजपा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 'कॉकरोच' विरोध-प्रदर्शन को PM मोदी और CM फडणवीस को बदनाम करने की राजनीतिक साज़िश बताया।
पुलिस पाबंदियों के बावजूद जंतर-मंतर पर हज़ारों प्रदर्शनकारी 'संसद मार्च' के लिए जुटे।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 20 जुलाई को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिये भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का सार्वजनिक रूप से धन्यवाद किया, जिससे नीट पेपर लीक मामले पर पहले से गर्म राजनीतिक माहौल और भड़क उठा। राउत के इस बयान ने नई दिल्ली में जारी 'संसद मार्च' विरोध-प्रदर्शनों के बीच न्यायपालिका की भूमिका पर एक नई बहस खड़ी कर दी है।

राउत ने क्या कहा

राउत ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा कि देशभर में चल रहे जनआंदोलनों को नई ऊर्जा देने का श्रेय जस्टिस सूर्यकांत को जाता है। उनके अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने देश के सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों में नई जान फूंक दी है, और इसी कारण इतने बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब पुलिस की पाबंदियों के बावजूद हज़ारों प्रदर्शनकारी राजधानी में जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास जुटे हुए थे।

सोनम वांगचुक और युवा आंदोलन पर हमला

इससे पहले राउत ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के संदर्भ में केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 'युवाओं से डर रही है' और बल प्रयोग के ज़रिये लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों को कुचल रही है। राउत ने कहा कि सरकार ने शुरू में सोनम वांगचुक और अभिजीत दिपके जैसी आवाज़ों को मामूली समझकर नज़रअंदाज़ कर दिया, लेकिन ये आवाज़ें डटी रहीं और देशभर से समर्थन जुटाती रहीं।

राउत ने तंज़ कसते हुए कहा कि सरकार को लगा था कि वह इन कार्यकर्ताओं को 'कॉकरोच की तरह कुचल' सकती है, लेकिन ये 'कॉकरोच' मज़बूती से डटे रहे। उन्होंने माँग की कि एक सच्ची लोकतांत्रिक सरकार प्रदर्शनकारियों से संवाद करती, न कि सोनम वांगचुक को पुलिस दबाव में जबरन अस्पताल में भर्ती कराती। साथ ही उन्होंने कहा कि नीट विवाद की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।

भाजपा का पलटवार

भाजपा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विपक्ष की माँगों और जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शनों को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि तथाकथित 'कॉकरोच' विरोध-प्रदर्शन असल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बदनाम करने के लिए रचा गया एक राजनीतिक नाटक है। बावनकुले ने कहा कि कुछ युवा निराशा के कारण इसमें शामिल हो रहे हैं, लेकिन इसके पीछे की मंशा राजनीतिक है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उन्होंने या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने परीक्षा का पेपर लीक किया था। बावनकुले ने कहा कि सुधार के लिए रचनात्मक सुझावों का स्वागत है, लेकिन मंत्री के इस्तीफे की माँग पूरी तरह राजनीतिक मकसद से प्रेरित है।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब नीट पेपर लीक मामला पहले से ही सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक का केंद्र बना हुआ है। गौरतलब है कि न्यायपालिका को सीधे राजनीतिक आंदोलनों से जोड़ने वाले बयान आमतौर पर विवाद का कारण बनते हैं, और राउत का यह पोस्ट भी उसी श्रेणी में आ गया। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएँ आने से यह स्पष्ट है कि नीट विवाद अब केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं रहा — यह एक व्यापक राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है।

आगे क्या

विपक्ष की धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग जारी है, जबकि सरकार ने अब तक इसे खारिज किया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहने की संभावना है। न्यायपालिका की भूमिका पर राउत की टिप्पणी को लेकर राजनीतिक दबाव आने वाले दिनों में भी बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संवैधानिक मर्यादाओं के लिहाज़ से असहज करने वाली है। विपक्ष नीट विवाद को शिक्षा की विफलता से बड़े राजनीतिक संघर्ष में तब्दील करने पर आमादा है, लेकिन न्यायपालिका को इस खेल में खींचना उसकी स्वायत्तता पर सवाल खड़े करता है। भाजपा का 'राजनीतिक नाटक' वाला जवाब भी उतना ही चुनावी है — असली मुद्दा, यानी नीट परीक्षा की पारदर्शिता और लाखों छात्रों का भविष्य, इस नोकझोंक में दब जाने का खतरा है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत के बारे में क्या कहा?
राउत ने एक्स पर पोस्ट करके कहा कि देशभर के जनआंदोलनों को नई ऊर्जा देने का श्रेय सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत को जाता है और उन्होंने सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों में नई जान फूंकी है। इस पोस्ट ने न्यायपालिका की भूमिका को लेकर व्यापक राजनीतिक बहस छेड़ दी।
नीट पेपर लीक विरोध-प्रदर्शन में क्या हो रहा है?
नीट पेपर लीक मामले को लेकर हज़ारों प्रदर्शनकारी नई दिल्ली में 'संसद मार्च' के लिए जुटे, जहाँ पुलिस ने पाबंदियाँ लगाई थीं। विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहा है।
भाजपा ने राउत के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
भाजपा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विरोध-प्रदर्शनों को PM मोदी और CM फडणवीस को बदनाम करने का राजनीतिक नाटक बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग पूरी तरह राजनीतिक मकसद से प्रेरित है।
सोनम वांगचुक का इस विवाद से क्या संबंध है?
राउत ने सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर उन्हें पुलिस दबाव में जबरन अस्पताल भर्ती कराने का आरोप लगाया। उन्होंने वांगचुक को उन आवाज़ों का प्रतीक बताया जिन्हें सरकार ने शुरू में नज़रअंदाज़ किया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग क्यों हो रही है?
विपक्ष का तर्क है कि नीट पेपर लीक की जवाबदेही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर बनती है, इसलिए उन्हें पद छोड़ना चाहिए। भाजपा ने इस माँग को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है।
राष्ट्र प्रेस
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