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शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए था, कैबिनेट फेरबदल से नहीं सुलझेंगी समस्याएं: संजय राउत

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शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए था, कैबिनेट फेरबदल से नहीं सुलझेंगी समस्याएं: संजय राउत

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार पर दोहरा हमला बोला — शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग के साथ-साथ सोनम वांगचुक के 26 दिन के अनशन की समाप्ति के तरीके पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि प्रशासनिक बदलाव नहीं, असली जवाबदेही चाहिए।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 24 जुलाई को मुंबई में कहा कि कैबिनेट फेरबदल से पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए था।
राउत ने पेपर लीक और युवा असंतोष पर केंद्र सरकार की उदासीनता की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री को युवाओं के गुस्से की वजह नहीं पता, तो राहुल गांधी से बात करें।
सोनम वांगचुक के 26 दिन बाद अनशन समाप्त होने के तरीके पर राउत ने आपत्ति जताई — कहा, जंतर-मंतर से उठाकर ले जाया गया।
राउत ने आंदोलन में लाठियाँ खाने वाले छात्रों और युवाओं की प्रतिष्ठा का ध्यान रखने की अपील की।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने 24 जुलाई को मुंबई में केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की अटकलों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महज मंत्रियों की अदला-बदली से देश की बुनियादी समस्याओं का हल नहीं निकलेगा और शिक्षा मंत्री को सबसे पहले अपनी जवाबदेही स्वीकार करते हुए इस्तीफा देना चाहिए था।

शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर केंद्र को घेरा

राउत ने कहा कि कैबिनेट में बदलाव की ज़रूरत तो थी, लेकिन उससे पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक मामलों और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर केंद्र सरकार ने जो उदासीनता दिखाई, उसकी जवाबदेही तय किए बिना महज प्रशासनिक फेरबदल करना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि यदि प्रधानमंत्री को यह नहीं पता कि देशभर में युवाओं के बीच इतना असंतोष क्यों है, तो उन्हें कांग्रेस नेता राहुल गांधी से बात करनी चाहिए। राउत के अनुसार सरकार को उन मूल कारणों पर ध्यान देना होगा जिनकी वजह से छात्र और युवा सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।

सोनम वांगचुक के अनशन समाप्ति पर सवाल

राउत ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की मुलाकात तथा वांगचुक द्वारा 26 दिन बाद भूख हड़ताल समाप्त किए जाने पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अनशन का खत्म होना खुशी की बात है, लेकिन जिस तरह से यह घटनाक्रम हुआ उससे आंदोलन में शामिल युवाओं की भावनाओं को ठेस पहुँची।

राउत ने कहा, 'दोपहर 12 बजे अनशन छोड़ने का कोई तय समय नहीं था। आपको जंतर-मंतर से उठाकर ले जाया गया था। अगर जिस मंच से आपको हटाया गया था, उसी मंच पर जाकर आपका अनशन समाप्त होता, तो सबकी प्रतिष्ठा बनी रहती।'

आंदोलन में घायल युवाओं के सम्मान की माँग

शिवसेना (यूबीटी) नेता ने विशेष रूप से उन छात्रों और युवाओं का ज़िक्र किया जिन्होंने आंदोलन के दौरान लाठियाँ खाईं और चोटें सहीं। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों ने संघर्ष किया, खून बहाया और हड्डियाँ तुड़वाईं, उनकी प्रतिष्ठा का भी उतना ही ध्यान रखा जाना चाहिए था।

राउत ने भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि यदि आंदोलन में लाठियाँ खाने वाली किसी छात्रा के हाथ से जूस पीकर अनशन समाप्त किया जाता, तो यह कहीं अधिक प्रभावशाली संदेश होता।

आगे क्या

राउत के बयान ऐसे समय में आए हैं जब केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज़ हैं और विपक्ष लगातार शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही पर दबाव बना रहा है। गौरतलब है कि पेपर लीक विवाद और युवा असंतोष आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बने रह सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जवाबदेही का कोई ठोस तंत्र सामने नहीं आया। सोनम वांगचुक प्रकरण यह भी दर्शाता है कि सरकार आंदोलनों को 'मैनेज' करने में रुचि रखती है, न कि उनकी माँगों को वास्तव में संबोधित करने में। यदि कैबिनेट फेरबदल के बाद भी शिक्षा और युवा रोज़गार पर नीतिगत स्पष्टता नहीं आती, तो यह बदलाव सिर्फ चेहरे बदलने तक सीमित रहेगा।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग क्यों की?
राउत का कहना है कि पेपर लीक मामलों और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के लिए शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय होनी चाहिए थी। उनके अनुसार, महज कैबिनेट फेरबदल से इन समस्याओं का समाधान नहीं होगा।
राउत ने सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने पर क्या कहा?
राउत ने कहा कि वांगचुक का 26 दिन बाद अनशन समाप्त होना खुशी की बात है, लेकिन जिस तरह से उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर ले जाया गया और अनशन खत्म हुआ, उससे आंदोलन में शामिल युवाओं की भावनाओं को ठेस पहुँची। वे चाहते थे कि अनशन उसी मंच पर समाप्त होता।
राउत ने प्रधानमंत्री को राहुल गांधी से बात करने की सलाह क्यों दी?
राउत ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि प्रधानमंत्री को देशभर में युवाओं के असंतोष की वजह नहीं पता, तो उन्हें विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात करनी चाहिए। यह केंद्र सरकार की जमीनी हकीकत से दूरी पर उनका तंज था।
आंदोलन में घायल छात्रों के बारे में राउत ने क्या कहा?
राउत ने कहा कि जिन छात्रों और युवाओं ने आंदोलन के दौरान लाठियाँ खाईं, खून बहाया और चोटें सहीं, उनके सम्मान का भी ध्यान रखा जाना चाहिए था। उन्होंने सुझाया कि किसी ऐसी छात्रा के हाथ से जूस पीकर अनशन समाप्त करना अधिक प्रभावशाली होता।
कैबिनेट फेरबदल पर शिवसेना (यूबीटी) का क्या रुख है?
शिवसेना (यूबीटी) के अनुसार कैबिनेट फेरबदल ज़रूरी तो था, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। पार्टी का मानना है कि सरकार को प्रशासनिक बदलावों की बजाय उन मूल कारणों को दूर करना चाहिए जिनकी वजह से छात्र और युवा आंदोलन कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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