धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर संजय राउत बोले — देशव्यापी युवा आंदोलन की जीत
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को दिल्ली, लखनऊ, पटना और कोलकाता समेत देशभर में उठे युवा आंदोलन की निर्णायक जीत करार दिया। 25 जुलाई को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में राउत ने यह भी संभावना जताई कि धर्मेंद्र की जगह देवेंद्र को शिक्षा मंत्रालय सौंपा जा सकता है।
युवाओं के संघर्ष का प्रतिफल
राउत ने कहा कि दिल्ली, महाराष्ट्र, लखनऊ और देश के अनेक शहरों में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर शिक्षा सुधार की माँग को बुलंद किया। उनके अनुसार, इस आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी युवाओं पर लाठियाँ चलाई गईं और छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, फिर भी सरकार उन्हें झुका नहीं सकी। राउत ने कहा, 'आखिरकार युवाओं ने अपनी शक्ति से इस सरकार को परिचय करा ही दिया।'
लोकतंत्र पर बड़ा बयान
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि 12 साल से इस देश का लोकतंत्र आईसीयू में था और सरकार लगातार जनता के हितों पर कुठाराघात करती रही। उनके अनुसार, युवाओं के इस संघर्ष ने लोकतंत्र को फिर से खड़ा करने का काम किया है।
विजय रैली पर राउत का रुख
राउत ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी की प्रस्तावित रैली का उद्देश्य विजय उत्सव नहीं, बल्कि सड़कों पर संघर्षरत छात्रों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करना है। उन्होंने कहा कि उनका अनुमान है कि उसी शाम तक छात्रों का विरोध प्रदर्शन समाप्त हो जाएगा, लेकिन इसके बावजूद रैली निकाली जाएगी ताकि सरकार को यह संदेश दिया जा सके कि 'इस देश में लोकतंत्र जिंदा है।'
आगे क्या
राउत के बयान के बाद शिक्षा मंत्रालय में संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार नए मंत्री की नियुक्ति कब और किस रूप में करती है, तथा छात्र आंदोलन की शेष माँगों पर क्या रुख अपनाती है।