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पश्चिम बंगाल चुनाव: संजय राउत बोले — 'ममता की नहीं, लोकतंत्र की हुई हार'

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पश्चिम बंगाल चुनाव: संजय राउत बोले — 'ममता की नहीं, लोकतंत्र की हुई हार'

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों को 'लोकतंत्र की हार' बताया। ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के फैसले को आंदोलन का हिस्सा करार दिया। इंडिया ब्लॉक की एकजुटता मजबूत करने का आह्वान — विपक्ष की रणनीति अब अगले मोर्चे की तैयारी में।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 6 मई 2026 को कहा — पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हार हुई, ममता बनर्जी की नहीं।
ममता बनर्जी ने बूथ गड़बड़ी, मतदाता सूची से नाम हटाने और विधानसभा क्षेत्रों में अनियमितताओं का आरोप लगाया।
ममता का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने का फैसला उनके जनांदोलन की रणनीति का हिस्सा बताया गया।
इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने ममता से संपर्क किया; राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे विपक्षी समन्वय पर चर्चा में।
TMC विधायक असित मजूमदार ने लक्ष्मी भंडार , युवा साथी , स्वास्थ्य साथी योजनाओं का हवाला देते हुए धार्मिक विभाजन की राजनीति की निंदा की।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने 6 मई 2026 को मुंबई में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुलकर समर्थन किया और कहा कि राज्य में हुए चुनावी नतीजे ममता बनर्जी की व्यक्तिगत हार नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस पर खुशी मना रहे हैं, वे गलत कर रहे हैं।

चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप

राउत ने बताया कि ममता बनर्जी ने स्वयं चुनाव प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। ममता के आरोपों के अनुसार, कई बूथों पर गड़बड़ी हुई, मतदाता सूचियों से नाम हटाए गए और कुछ विधानसभा क्षेत्रों में अनियमितताएँ देखी गईं। राउत ने स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने का निर्णय उनके व्यापक जनांदोलन का हिस्सा है।

ममता की 'सड़क से सत्ता तक' की राजनीति

राउत ने कहा कि ममता बनर्जी हमेशा अन्याय के विरुद्ध पूरी ताकत से खड़ी होती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री रहते हुए भी ममता ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के कथित दुरुपयोग के खिलाफ सड़कों पर उतरकर आवाज उठाई है। राउत के अनुसार, यह उनका पुराना राजनीतिक अंदाज है — सड़क से लेकर सत्ता तक आंदोलन की राजनीति।

इंडिया ब्लॉक की एकजुटता पर जोर

राउत ने दावा किया कि इंडिया ब्लॉक के कई नेताओं ने ममता बनर्जी से संपर्क किया है और विपक्षी एकजुटता को और मजबूत करने पर चर्चा जारी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे जैसे नेता लगातार विपक्षी समन्वय पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। राउत ने साफ शब्दों में कहा कि यह समय संघर्ष को तेज करने का है और विपक्ष इसके लिए पूरी तरह तैयार है।

टीएमसी विधायक ने भी उठाई आवाज

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के विधायक असित मजूमदार ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी सरकार ने लक्ष्मी भंडार, युवा साथी और स्वास्थ्य साथी जैसी जनकल्याण योजनाओं के ज़रिये लाखों लोगों का जीवन बेहतर किया है। इसके बावजूद कुछ मतदाताओं ने उनके खिलाफ मतदान किया। मजूमदार ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल धर्म के आधार पर समाज को विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं, जो देश के संवैधानिक ढाँचे के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान सभी धर्मों को बराबरी का अधिकार देता है।

आगे क्या होगा

राउत के बयान से स्पष्ट है कि विपक्षी खेमा पश्चिम बंगाल के नतीजों को चुनावी अनियमितता के नज़रिये से प्रस्तुत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। ममता बनर्जी के अगले कदम — चाहे वह न्यायालय का रुख हो या जनांदोलन — इंडिया ब्लॉक की एकजुटता और दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके लिए ठोस साक्ष्य और कानूनी चुनौती ज़रूरी है। ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना राजनीतिक दृष्टि से समझ में आता है, पर यह तब तक विश्वसनीय नहीं होगा जब तक वे अनियमितताओं के दावों को न्यायालय में या चुनाव आयोग के समक्ष प्रमाणित नहीं करतीं। इंडिया ब्लॉक की एकजुटता की बातें नई नहीं हैं — असली परीक्षा यह है कि क्या यह एकजुटता ज़मीनी राजनीति में दिखेगी या केवल प्रेस वार्ताओं तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने पश्चिम बंगाल चुनाव पर क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हार हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस पर खुशी मना रहे हैं, वे गलत कर रहे हैं।
ममता बनर्जी ने चुनाव प्रक्रिया पर क्या आरोप लगाए?
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि कई बूथों पर गड़बड़ी हुई, मतदाता सूचियों से नाम हटाए गए और कुछ विधानसभा क्षेत्रों में अनियमितताएँ हुईं। इन्हीं आरोपों के आधार पर उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने का फैसला किया है।
ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा क्यों नहीं दिया?
संजय राउत के अनुसार, ममता बनर्जी का इस्तीफा न देने का फैसला उनके जनांदोलन की रणनीति का हिस्सा है। वे सड़क से लेकर सत्ता तक आंदोलन की राजनीति करती रही हैं और हार मानने वालों में से नहीं हैं।
इंडिया ब्लॉक की पश्चिम बंगाल नतीजों पर क्या प्रतिक्रिया है?
राउत के अनुसार, इंडिया ब्लॉक के कई नेताओं ने ममता बनर्जी से संपर्क किया है। राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे जैसे नेता विपक्षी एकजुटता को मजबूत करने पर चर्चा कर रहे हैं।
TMC विधायक असित मजूमदार ने क्या कहा?
TMC विधायक असित मजूमदार ने कहा कि ममता सरकार की लक्ष्मी भंडार, युवा साथी और स्वास्थ्य साथी जैसी योजनाओं से लाखों लोगों को लाभ मिला है। उन्होंने धर्म के आधार पर समाज को विभाजित करने की कोशिशों को संविधान और देश के लिए खतरनाक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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