नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर विपक्ष का संसद में हमला, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सांसदों ने 20 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में मॉनसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था की खामियों, दलबदल विरोधी कानून, अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और छात्र आंदोलन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा। विपक्षी नेताओं ने एकस्वर में माँग की कि संसद में इन बुनियादी जन-सरोकार के विषयों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि मॉनसून सत्र सार्थक ढंग से चले, लेकिन इसके लिए जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर चर्चा अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में सामने आई गंभीर खामियों के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। मनीष तिवारी ने संसद में स्थगन प्रस्ताव देकर नए दलबदल विरोधी कानून की माँग भी की। उनके अनुसार मौजूदा कानून अपने उद्देश्य को पूरा करने में विफल रहा है और नए कानून में ऐसे प्रावधान होने चाहिए जो केवल राजनीतिक अवसरवाद पर आधारित दलबदल पर रोक लगाएँ, जबकि वैचारिक मतभेद और लोकतांत्रिक असहमति की गुंजाइश बनी रहे।
मनीष तिवारी ने यह भी रेखांकित किया कि जून 2024 में चुनी गई संसद की राजनीतिक तस्वीर जुलाई 2026 तक काफी बदल चुकी है, इसलिए इस विषय पर गंभीर विचार आवश्यक है।
नीट और पेपर लीक पर विपक्ष का आक्रामक रुख
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने नीट और सीबीएसई परीक्षाओं में पेपर लीक के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से देशभर के लाखों छात्रों और उनके परिवारों में गहरी चिंता का माहौल है। वेणुगोपाल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक रोकने और परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर चर्चा से बच रही है और लोकसभा अध्यक्ष विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दे रहे।
कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने भी कहा कि नीट और पेपर लीक का मुद्दा उनकी पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। विपक्षी सांसद प्लेकार्ड के माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।
राम मंदिर चढ़ावा और सोनम वांगचुक का मुद्दा
कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मुद्दे को उठाते हुए सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया गया, उनके परिवार को उनसे मिलने नहीं दिया गया और उन्हें अब तक रिहा नहीं किया गया।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी के आरोपों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दान के पैसे में कथित गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और उन्होंने इस संबंध में संसद में नोटिस दिया है।
छात्र आंदोलन और युवाओं की स्थिति पर चिंता
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने छात्रों के आंदोलन और युवाओं की स्थिति को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इन मुद्दों पर ध्यान दिया जाता तो ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न नहीं होतीं और आत्महत्या जैसी घटनाएँ अत्यंत चिंताजनक हैं।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों को पुलिस थाने में रखा गया जबकि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। अखिलेश यादव ने माँग की कि नीट से प्रभावित छात्रों को न्याय मिले और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने आरोप लगाया कि सरकार विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष के साथ सहमति बनाने में पूरी तरह विफल रही है और संसद में संवाद तथा बहस से बच रही है। यह ऐसे समय में आया है जब मॉनसून सत्र के दौरान उत्पादक कार्यवाही सुनिश्चित करना संसदीय परंपरा की दृष्टि से अनिवार्य माना जाता है। विपक्ष के इस एकजुट दबाव के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मुद्दों पर चर्चा की अनुमति देती है या नहीं।