एंटी-पेपर लीक बिल पर संजय राउत का तीखा हमला: 'सजा बढ़ी, लेकिन बिल पुराना ही है'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 28 जुलाई को 'एंटी-पेपर लीक' बिल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विधेयक मूल रूप से पुराने कानून की ही नकल है — केवल दंड के आँकड़े बदले गए हैं, ढाँचा वही पुराना है। उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि पेपर लीक रैकेट को भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े लोग संचालित करते हैं।
बिल में नया क्या है — राउत का सवाल
राउत ने कहा, 'एक नया बिल लाया गया है, और अगर सरकार को लगता है कि इससे पेपर लीक रुकेंगे, तो यह अच्छी बात है। लेकिन बिल में असल में नया क्या है? यह काफी हद तक पुराने वाले जैसा ही है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले जहाँ दोषी को एक साल की सज़ा और ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान था, अब इसे बढ़ाकर क्रमशः दस साल और ₹10 करोड़ कर दिया गया है। आलोचकों का कहना है कि केवल दंड की मात्रा बढ़ाने से पेपर लीक की जड़ें नहीं कटतीं।
BJP पर सीधा आरोप
राउत ने आगे कहा, 'देशभर में चल रहे पेपर लीक रैकेट को BJP से जुड़े लोग नियंत्रित करते हैं। कई संस्थाओं पर उनका कब्ज़ा है। महाराष्ट्र में नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए सभी लोग BJP के कार्यकर्ता हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद को लेकर पूरे देश में छात्र आंदोलन तेज़ हो रहा है और सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ रहा है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन और जाँच पर निशाना
राउत ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन के दौरान सहायता प्रदान करने वालों की जाँच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'अब आप यह भी जाँच कर रहे हैं कि जंतर-मंतर पर खाना कौन परोस रहा था, पानी कौन बाँट रहा था, जूस कौन दे रहा था। किसी भी विरोध-प्रदर्शन के दौरान जो लोग मदद करना चाहते हैं, वे आगे आते हैं — कोई पानी देता है, कोई दवाइयाँ।' उन्होंने इसे सरकार की दमनकारी प्रवृत्ति बताया।
धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर आपत्ति
राउत ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम लेते हुए कहा, 'जिस व्यक्ति को नीट पेपर लीक मामले के कारण इस्तीफा देना पड़ा हो, उसका जिस तरह से स्वागत किया जा रहा है, वह बंद होना चाहिए।' गौरतलब है कि प्रधान ने नीट विवाद के बाद शिक्षा मंत्री पद छोड़ा था और उनके स्वागत समारोह को लेकर विपक्ष पहले से ही सरकार को घेर रहा है।
आगे क्या
एंटी-पेपर लीक बिल पर संसद में बहस जारी है। विपक्षी दलों की माँग है कि बिल में स्वतंत्र जाँच एजेंसी और पारदर्शी सत्यापन तंत्र का प्रावधान हो। छात्र संगठनों ने भी स्पष्ट किया है कि वे केवल दंड बढ़ाने से संतुष्ट नहीं हैं — उन्हें संरचनागत सुधार चाहिए।