28 जुलाई 2026
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एंटी-पेपर लीक बिल पर संजय राउत का तीखा हमला: 'सजा बढ़ी, लेकिन बिल पुराना ही है'

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एंटी-पेपर लीक बिल पर संजय राउत का तीखा हमला: 'सजा बढ़ी, लेकिन बिल पुराना ही है'

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने एंटी-पेपर लीक बिल को 'पुराने बिल की नकल' बताया — सजा और जुर्माना बढ़ा, ढाँचा नहीं बदला। साथ ही BJP पर नीट लीक रैकेट से जुड़े होने का सीधा आरोप लगाया और धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर भी निशाना साधा।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 28 जुलाई को एंटी-पेपर लीक बिल को 'पुराने बिल जैसा' बताया।
नए बिल में सज़ा एक साल से बढ़ाकर दस साल और जुर्माना ₹1 करोड़ से ₹10 करोड़ किया गया।
राउत ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र नीट पेपर लीक में गिरफ्तार सभी लोग BJP के कार्यकर्ता हैं।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान सहायता देने वालों की सरकारी जाँच पर राउत ने आपत्ति जताई।
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत को 'बंद होना चाहिए' — राउत।

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने 28 जुलाई को 'एंटी-पेपर लीक' बिल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह विधेयक मूल रूप से पुराने कानून की ही नकल है — केवल दंड के आँकड़े बदले गए हैं, ढाँचा वही पुराना है। उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि पेपर लीक रैकेट को भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े लोग संचालित करते हैं।

बिल में नया क्या है — राउत का सवाल

राउत ने कहा, 'एक नया बिल लाया गया है, और अगर सरकार को लगता है कि इससे पेपर लीक रुकेंगे, तो यह अच्छी बात है। लेकिन बिल में असल में नया क्या है? यह काफी हद तक पुराने वाले जैसा ही है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले जहाँ दोषी को एक साल की सज़ा और ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान था, अब इसे बढ़ाकर क्रमशः दस साल और ₹10 करोड़ कर दिया गया है। आलोचकों का कहना है कि केवल दंड की मात्रा बढ़ाने से पेपर लीक की जड़ें नहीं कटतीं।

BJP पर सीधा आरोप

राउत ने आगे कहा, 'देशभर में चल रहे पेपर लीक रैकेट को BJP से जुड़े लोग नियंत्रित करते हैं। कई संस्थाओं पर उनका कब्ज़ा है। महाराष्ट्र में नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए सभी लोग BJP के कार्यकर्ता हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद को लेकर पूरे देश में छात्र आंदोलन तेज़ हो रहा है और सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ रहा है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन और जाँच पर निशाना

राउत ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन के दौरान सहायता प्रदान करने वालों की जाँच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'अब आप यह भी जाँच कर रहे हैं कि जंतर-मंतर पर खाना कौन परोस रहा था, पानी कौन बाँट रहा था, जूस कौन दे रहा था। किसी भी विरोध-प्रदर्शन के दौरान जो लोग मदद करना चाहते हैं, वे आगे आते हैं — कोई पानी देता है, कोई दवाइयाँ।' उन्होंने इसे सरकार की दमनकारी प्रवृत्ति बताया।

धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत पर आपत्ति

राउत ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम लेते हुए कहा, 'जिस व्यक्ति को नीट पेपर लीक मामले के कारण इस्तीफा देना पड़ा हो, उसका जिस तरह से स्वागत किया जा रहा है, वह बंद होना चाहिए।' गौरतलब है कि प्रधान ने नीट विवाद के बाद शिक्षा मंत्री पद छोड़ा था और उनके स्वागत समारोह को लेकर विपक्ष पहले से ही सरकार को घेर रहा है।

आगे क्या

एंटी-पेपर लीक बिल पर संसद में बहस जारी है। विपक्षी दलों की माँग है कि बिल में स्वतंत्र जाँच एजेंसी और पारदर्शी सत्यापन तंत्र का प्रावधान हो। छात्र संगठनों ने भी स्पष्ट किया है कि वे केवल दंड बढ़ाने से संतुष्ट नहीं हैं — उन्हें संरचनागत सुधार चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें निगरानी तंत्र की विफलता, निजी कोचिंग माफिया और परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही का अभाव शामिल है। BJP पर लगाए गए राउत के आरोप राजनीतिक हैं और अभी तक न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए, लेकिन नीट विवाद ने यह ज़रूर उजागर किया है कि परीक्षा सुधार की बात सिर्फ कानून बनाने तक सीमित नहीं रह सकती — उसे ज़मीनी क्रियान्वयन और स्वतंत्र ऑडिट से जोड़ना होगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एंटी-पेपर लीक बिल में नया क्या है?
नए बिल में दोषियों के लिए सज़ा एक साल से बढ़ाकर दस साल और जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है। हालाँकि, संजय राउत सहित विपक्षी नेताओं का कहना है कि बिल का मूल ढाँचा पुराने कानून जैसा ही है।
संजय राउत ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
राउत ने कहा कि देशभर में पेपर लीक रैकेट को BJP से जुड़े लोग नियंत्रित करते हैं और महाराष्ट्र में नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार सभी लोग BJP कार्यकर्ता हैं। ये आरोप राजनीतिक हैं और अभी तक न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।
धर्मेंद्र प्रधान को लेकर राउत ने क्या कहा?
राउत ने कहा कि नीट पेपर लीक विवाद के कारण जिन्हें इस्तीफा देना पड़ा, उनका जिस तरह से स्वागत किया जा रहा है, वह बंद होना चाहिए। उनका इशारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की ओर था।
जंतर-मंतर प्रदर्शन की जाँच पर राउत ने क्या कहा?
राउत ने सरकार की उस जाँच पर आपत्ति जताई जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर छात्रों को खाना, पानी और दवाइयाँ कौन दे रहा था। उन्होंने इसे प्रदर्शनकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश बताया।
एंटी-पेपर लीक बिल का छात्रों पर क्या असर होगा?
बिल का उद्देश्य परीक्षा में धोखाधड़ी और पेपर लीक पर कड़ी रोक लगाना है, जिससे लाखों छात्रों को निष्पक्ष परीक्षा का अवसर मिले। लेकिन विशेषज्ञों और विपक्ष का कहना है कि बिना संरचनागत सुधार और स्वतंत्र निगरानी के, केवल सज़ा बढ़ाना पर्याप्त नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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