31 जुलाई 2026
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पेपर लीक पर 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माना: शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने बताया क्यों है यह ऐतिहासिक कदम

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पेपर लीक पर 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माना: शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने बताया क्यों है यह ऐतिहासिक कदम

सारांश

पेपर लीक के खिलाफ संसद से पारित नए विधेयक में 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान है। शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए नंदन नीलेकणि समिति और फास्ट ट्रैक कोर्ट व्यवस्था की भी जानकारी दी।

मुख्य बातें

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक संसद से पारित; पेपर लीक पर 5 से 10 वर्ष की जेल का प्रावधान।
व्यक्तिगत दोषियों पर ₹50 लाख और संगठित गिरोहों/संस्थाओं पर ₹10 करोड़ तक जुर्माना।
मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी।
इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार हेतु उच्च स्तरीय समिति गठित।
शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने 30 जुलाई को मुंबई में सरकार के कदमों का समर्थन किया।
हेगड़े ने फारूक अब्दुल्ला की पीओके टिप्पणी और ममता बनर्जी के चुनाव आयोग पत्र पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।

शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने 30 जुलाई को मुंबई में संसद द्वारा पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक को परीक्षा प्रणाली में धांधली के विरुद्ध अब तक का सबसे कठोर कानूनी हस्तक्षेप बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इसके साथ ही उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और पश्चिम बंगाल से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी बेबाक राय रखी।

विधेयक में क्या है: सज़ा और जुर्माने का पूरा ढाँचा

हेगड़े ने बताया कि नए कानून के तहत परीक्षा में अनुचित साधन अपनाने या पेपर लीक में दोषी पाए जाने पर 5 से 10 वर्ष तक की कैद का प्रावधान है। मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी ताकि न्याय में देरी न हो। व्यक्तिगत दोषियों पर ₹50 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

यदि किसी संगठित गिरोह, संस्था या संगठन की पेपर लीक में संलिप्तता सिद्ध होती है, तो उन पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। हेगड़े के अनुसार, यह पहली बार है जब किसी सरकार ने इस समस्या के विरुद्ध इतनी कठोर कानूनी व्यवस्था बनाई है।

नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति

परीक्षा प्रणाली में दीर्घकालिक सुधार के लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। यह समिति परीक्षा प्रक्रिया, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रणाली, तकनीकी सुधार और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक बदलावों पर सरकार को सुझाव देगी। हेगड़े ने कहा कि केंद्र सरकार इन सिफारिशों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

गौरतलब है कि पेपर लीक की समस्या वर्षों से छात्रों की मेहनत और भविष्य को प्रभावित करती रही है। यह समिति उस संरचनात्मक खामी को दूर करने का प्रयास है जो सिर्फ दंड से नहीं, बल्कि प्रक्रिया में सुधार से ही संभव है।

छात्र आंदोलन और एफआईआर पर सरकार का रुख

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फाउंडर अभिजीत दीपके के छात्र आंदोलन और छात्रों पर दर्ज मामलों को लेकर हेगड़े ने कहा कि सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी छात्र के खिलाफ बिना उचित जाँच के कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभिजीत दीपके और छात्रों की ओर से उठाई गई अधिकांश माँगों पर सरकार पहले ही सकारात्मक कदम उठा चुकी है।

पीओके और फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणी पर पलटवार

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर फारूक अब्दुल्ला की टिप्पणियों पर हेगड़े ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि अब्दुल्ला को वास्तव में पीओके की चिंता होती, तो जब उनकी पार्टी केंद्र और जम्मू-कश्मीर की सत्ता में थी, तब इस दिशा में पहल की जाती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दों पर पूरी तरह सक्षम है। उनके अनुसार, जम्मू-कश्मीर और पीओके भारत का अभिन्न अंग है और भारत हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना पक्ष मजबूती से रखता है।

ममता बनर्जी के चुनाव आयोग को पत्र पर हेगड़े का जवाब

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग (ECI) को लिखे गए पत्र पर हेगड़े ने कहा कि यदि आयोग वही मानदंड अपनाता है जो उसने शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के मामलों में अपनाए थे — जहाँ विधायकों और सांसदों के बहुमत के आधार पर निर्णय दिया गया था — तो इस मामले में भी बहुमत के आधार पर फैसला होगा। उन्होंने दावा किया कि ऐसे किसी निर्णय से ममता बनर्जी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल की राजनीति में गुटबंदी के सवाल तेज हो रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह कानून लागू भी उतनी ही कठोरता से होगा जितनी कठोरता से बना है। भारत में परीक्षा घोटालों की एक लंबी श्रृंखला रही है — NEET, SSC, रेलवे भर्ती — जिनमें दोषियों को सज़ा मिलने में वर्षों लग गए। नंदन नीलेकणि जैसे तकनीकी विशेषज्ञ की अध्यक्षता में समिति का गठन सकारात्मक संकेत है, लेकिन समिति की सिफारिशें कब और कैसे लागू होंगी, इसका कोई समयबद्ध ढाँचा अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। बिना पारदर्शी क्रियान्वयन तंत्र के, यह कानून भी उन वादों की सूची में जुड़ने का जोखिम उठाता है जो कागज़ पर मज़बूत दिखते हैं पर ज़मीन पर कमज़ोर साबित होते हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) (संशोधन) विधेयक में क्या प्रावधान हैं?
इस विधेयक के तहत पेपर लीक या परीक्षा में धांधली के दोषियों को 5 से 10 वर्ष की जेल और ₹50 लाख तक का जुर्माना भुगतना होगा। यदि किसी संगठित गिरोह या संस्था की संलिप्तता पाई जाती है, तो उन पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी।
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाली समिति क्या काम करेगी?
इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति परीक्षा प्रक्रिया, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रणाली और तकनीकी सुधारों पर सरकार को सुझाव देगी। केंद्र सरकार ने इन सिफारिशों को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई है।
छात्रों पर दर्ज एफआईआर के बारे में सरकार का क्या रुख है?
शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े के अनुसार, सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र के खिलाफ बिना उचित जाँच के कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। छात्र आंदोलन की अधिकांश माँगों पर सरकार पहले ही सकारात्मक कदम उठा चुकी है।
फारूक अब्दुल्ला की पीओके टिप्पणी पर हेगड़े ने क्या कहा?
हेगड़े ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला को अपना राजनीतिक इतिहास याद रखना चाहिए — जब उनकी पार्टी सत्ता में थी, तब पीओके पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दों पर पूरी तरह सक्षम है।
ममता बनर्जी के चुनाव आयोग को पत्र पर हेगड़े की क्या प्रतिक्रिया थी?
हेगड़े ने कहा कि यदि चुनाव आयोग वही मानदंड अपनाता है जो उसने शिवसेना और NCP के मामलों में — विधायकों-सांसदों के बहुमत के आधार पर — अपनाए थे, तो इस मामले में भी बहुमत के आधार पर फैसला होगा। उनके अनुसार, ऐसे किसी निर्णय से ममता बनर्जी को राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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