पेपर लीक रोकने के लिए लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 आज संसद में, 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार 27 जुलाई 2026 को संसद में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करने जा रही है, जिसका उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी के खिलाफ मौजूदा कानूनी ढाँचे को और कठोर बनाना है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इस विधेयक को सदन के पटल पर रखेंगे। सूत्रों के अनुसार, इस पर बहस 8 से 10 घंटे तक चल सकती है।
विधेयक में क्या है
प्रस्तावित संशोधन के तहत परीक्षा संबंधी अपराधों में दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की कैद और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त दोषियों की संपत्ति जब्त करने और मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने की व्यवस्था भी इसमें शामिल है। यह विधेयक 2024 के लोक परीक्षा कानून में संशोधन का प्रस्ताव है, जिसकी अधिसूचना सरकार पहले ही जारी कर चुकी है।
मंत्रिमंडल की मंजूरी और पृष्ठभूमि
यह कदम केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा शुक्रवार को विधेयक और संबंधित प्रावधानों को मंजूरी दिए जाने के बाद उठाया गया है। गौरतलब है कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वादे के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ कड़े प्रावधानों वाला व्यापक कानून संसद में लाने की बात कही थी। रविवार को जारी एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'भारत सरकार छात्रों के भविष्य के लिए लगातार कई कदम उठा रही है। जिन्होंने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, वे जेल में हैं। हमने पहले ही फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित कर दी हैं। अब हम संसद में ऐसा नया कानून लाने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जिसमें बेहद सख्त कानूनी प्रावधान होंगे।'
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में टास्क फोर्स
रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में परीक्षा सुधारों के लिए एक टास्क फोर्स के गठन की भी घोषणा की। आधार परियोजना के प्रमुख सूत्रधार माने जाने वाले नीलेकणि को यह जिम्मेदारी ऐसे समय में सौंपी गई है, जब पेपर लीक के विरोध में चल रहा छात्रों का आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद थमा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
संसद में चर्चा की रणनीति
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) इस विधेयक पर बहस की अगुवाई के लिए कई युवा सांसदों को आगे कर सकता है। सरकार इस मुद्दे पर व्यापक आम सहमति बनाने की तैयारी में है, जो सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब परीक्षा प्रणाली में सुधार की माँग छात्र समुदाय और विपक्ष दोनों की ओर से उठ रही है।
आगे क्या होगा
विधेयक पारित होने के बाद फास्ट-ट्रैक अदालतें पेपर लीक मामलों की सुनवाई करेंगी और तीन महीने के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा। नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स की सिफारिशें परीक्षा प्रणाली के दीर्घकालिक सुधारों की दिशा तय करेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कानून की सख्ती के साथ-साथ तकनीकी निगरानी तंत्र भी इस समस्या के समाधान के लिए उतना ही जरूरी है।