पेपर लीक रोकथाम विधेयक 2026 संसद से पारित, रिजिजू बोले — विरोध राजनीति से प्रेरित
सारांश
मुख्य बातें
संसद के दोनों सदनों ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक- 2026 पारित कर दिया है, जिसके बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को मीडिया से बात करते हुए कहा कि पेपर लीक का मुद्दा पूरे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन दलों ने विधेयक का विरोध किया, उनकी मंशा राजनीतिक थी, न कि शैक्षणिक हित में।
मुख्य घटनाक्रम
लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी इस विधेयक को मंजूरी दे दी। अब विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद विधिवत कानून बन जाएगा। रिजिजू ने कहा, 'शिक्षा से संबंधित विधेयक पारित हो चुका है। अभी और भी महत्वपूर्ण बिल आने वाले हैं। जिन लोगों ने इसका विरोध किया है, वो उन्होंने राजनीतिक कारणों से किया है।'
विधेयक में क्या बदला
नए संशोधन विधेयक में परीक्षा में धोखाधड़ी और पेपर लीक के दोषियों पर आर्थिक दंड को बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है। इसके साथ ही कठोर जेल की सजा और फास्ट-ट्रैक सुनवाई का प्रावधान भी जोड़ा गया है, ताकि मामलों का त्वरित निपटारा हो सके।
प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया
रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री ने एंटी पेपर लीक विधेयक पारित होने पर सभी सांसदों को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि इस कानून को जल्द से जल्द लागू किया जाएगा ताकि छात्रों के भविष्य की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
विपक्ष से अपील
संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्षी दलों से अनुरोध किया कि वे अपने मुद्दे उठाएँ, लेकिन विधेयकों को पारित कराने, प्रश्नकाल और संसद के अन्य आवश्यक कार्यों में बाधा न डालें। रिजिजू ने कहा, 'यही सभी के लिए अच्छा है।' उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार की कार्यसूची में मुख्यतः निजी सदस्य विधेयक सूचीबद्ध हैं।
आगे की राह
राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून लागू हो जाएगा। आलोचकों का कहना है कि कानून की सफलता उसके क्रियान्वयन की गति और राज्य सरकारों के सहयोग पर निर्भर करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।