31 जुलाई 2026
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पेपर लीक रोकथाम विधेयक 2026 संसद से पारित, रिजिजू बोले — विरोध राजनीति से प्रेरित

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पेपर लीक रोकथाम विधेयक 2026 संसद से पारित, रिजिजू बोले — विरोध राजनीति से प्रेरित

सारांश

पेपर लीक पर लंबे समय से उठ रही माँगों के बाद संसद ने लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 पारित कर दिया — ₹10 करोड़ जुर्माना और फास्ट-ट्रैक सुनवाई के साथ। रिजिजू ने विरोध को राजनीति से प्रेरित बताया। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा।

मुख्य बातें

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक- 2026 संसद के दोनों सदनों से 31 जुलाई 2026 को पारित हो गया।
पेपर लीक के दोषियों पर आर्थिक दंड बढ़ाकर ₹10 करोड़ किया गया; फास्ट-ट्रैक सुनवाई का प्रावधान भी जोड़ा गया।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विरोध को राजनीतिक कारणों से प्रेरित बताया।
प्रधानमंत्री ने विधेयक पारित होने पर सभी सांसदों को धन्यवाद दिया।
अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक विधिवत कानून बनेगा।

संसद के दोनों सदनों ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक- 2026 पारित कर दिया है, जिसके बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को मीडिया से बात करते हुए कहा कि पेपर लीक का मुद्दा पूरे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन दलों ने विधेयक का विरोध किया, उनकी मंशा राजनीतिक थी, न कि शैक्षणिक हित में।

मुख्य घटनाक्रम

लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी इस विधेयक को मंजूरी दे दी। अब विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद विधिवत कानून बन जाएगा। रिजिजू ने कहा, 'शिक्षा से संबंधित विधेयक पारित हो चुका है। अभी और भी महत्वपूर्ण बिल आने वाले हैं। जिन लोगों ने इसका विरोध किया है, वो उन्होंने राजनीतिक कारणों से किया है।'

विधेयक में क्या बदला

नए संशोधन विधेयक में परीक्षा में धोखाधड़ी और पेपर लीक के दोषियों पर आर्थिक दंड को बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है। इसके साथ ही कठोर जेल की सजा और फास्ट-ट्रैक सुनवाई का प्रावधान भी जोड़ा गया है, ताकि मामलों का त्वरित निपटारा हो सके।

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया

रिजिजू ने बताया कि प्रधानमंत्री ने एंटी पेपर लीक विधेयक पारित होने पर सभी सांसदों को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि इस कानून को जल्द से जल्द लागू किया जाएगा ताकि छात्रों के भविष्य की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

विपक्ष से अपील

संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्षी दलों से अनुरोध किया कि वे अपने मुद्दे उठाएँ, लेकिन विधेयकों को पारित कराने, प्रश्नकाल और संसद के अन्य आवश्यक कार्यों में बाधा न डालें। रिजिजू ने कहा, 'यही सभी के लिए अच्छा है।' उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार की कार्यसूची में मुख्यतः निजी सदस्य विधेयक सूचीबद्ध हैं।

आगे की राह

राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून लागू हो जाएगा। आलोचकों का कहना है कि कानून की सफलता उसके क्रियान्वयन की गति और राज्य सरकारों के सहयोग पर निर्भर करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके क्रियान्वयन की होगी — क्योंकि पेपर लीक की जड़ें अक्सर राज्य स्तर की परीक्षा एजेंसियों और भर्ती तंत्र में होती हैं, जहाँ केंद्रीय कानून की पहुँच सीमित रहती है। रिजिजू का विपक्ष पर 'राजनीतिक विरोध' का आरोप बहस को भटकाने का जोखिम उठाता है — सवाल यह नहीं कि विधेयक का विरोध क्यों हुआ, बल्कि यह है कि पिछले कानूनों के बावजूद लीक क्यों नहीं रुके। जब तक राज्य सरकारें और परीक्षा एजेंसियाँ जवाबदेह नहीं बनतीं, ₹10 करोड़ का जुर्माना भी महज़ कागज़ पर रह सकता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए संसद के दोनों सदनों से 31 जुलाई 2026 को पारित किया गया है। इसमें दोषियों पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना, कड़ी जेल की सजा और फास्ट-ट्रैक सुनवाई का प्रावधान है।
इस विधेयक में क्या नए प्रावधान जोड़े गए हैं?
संशोधित विधेयक में आर्थिक दंड को बढ़ाकर ₹10 करोड़ किया गया है। साथ ही जेल की सजा और मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कार्यवाही का प्रावधान किया गया है।
किरेन रिजिजू ने विरोध पर क्या कहा?
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जिन दलों ने विधेयक का विरोध किया, उन्होंने राजनीतिक कारणों से ऐसा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेपर लीक को लेकर सभी लोग वास्तव में गंभीर हैं।
यह विधेयक कानून कब बनेगा?
संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही यह विधिवत कानून बन जाएगा और लागू हो जाएगा।
इस कानून से छात्रों को क्या फायदा होगा?
इस कानून का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना और पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम लगाना है। कठोर दंड और फास्ट-ट्रैक सुनवाई से दोषियों को त्वरित सजा मिलेगी, जिससे छात्रों के भविष्य की रक्षा हो सकेगी।
राष्ट्र प्रेस
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