पेपर लीक विरोधी बिल 2026: रिजिजू की विपक्ष से संसद में चर्चा की अपील, कांग्रेस पर हंगामे का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 27 जुलाई 2026 को पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 पर संसद में खुली बहस की माँग करते हुए विपक्षी दलों — विशेषकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) — से हंगामा बंद कर चर्चा में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश भर के विद्यार्थियों की चिंताओं को देखते हुए यह विधेयक अत्यावश्यक है और इस पर बहस से इनकार करना गलत संदेश देगा।
विधेयक में क्या है
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में यह संशोधन विधेयक औपचारिक रूप से पेश किया। विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित साधनों को रोकना है। रिजिजू के अनुसार, इसमें पेपर लीक में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को कड़ी और समयबद्ध सजा देने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का रुख
रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री की ओर से परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं — एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है और अब यह विधेयक पेश किया गया है। उन्होंने कहा, 'मैं कांग्रेस पार्टी से देश और विद्यार्थियों की भावनाओं को समझने की अपील करता हूँ। हम इन मुद्दों पर संसद में नहीं तो और कहाँ बहस कर सकते हैं? हंगामे के बजाय, हमें विद्यार्थियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए पूरी और खुली बहस करनी चाहिए।'
विपक्ष की प्रतिक्रिया
रिजिजू के अनुसार, कांग्रेस पार्टी और कुछ अन्य विपक्षी सदस्यों ने सदन में नारेबाजी और हंगामा किया, जिससे विधेयक पर चर्चा बाधित हुई। विपक्ष का पक्ष तत्काल उपलब्ध नहीं था; हालाँकि, यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल कई मुद्दों पर सरकार को घेर रहे हैं।
आम जनता और विद्यार्थियों पर असर
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में NEET, UGC-NET सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए हैं, जिससे लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ। यह विधेयक उन्हीं चिंताओं के जवाब में लाया गया बताया जा रहा है।
आगे क्या होगा
विधेयक अब लोकसभा में विचाराधीन है। यदि सदन में चर्चा की अनुमति मिलती है, तो इसे पारित कर राज्यसभा भेजा जाएगा। सरकार का कहना है कि इस कानून के लागू होने से भविष्य में पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा।