लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 पारित, जितेंद्र सिंह ने विपक्ष को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 — जिसे एंटी-पेपर लीक विधेयक के नाम से जाना जाता है — ध्वनिमत से पारित कर दिया। विधेयक पर विस्तृत चर्चा के बाद नई दिल्ली स्थित संसद भवन में सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। यह विधेयक देश की प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए लाए गए मूल कानून में संशोधन करता है।
विधेयक पर चर्चा का घटनाक्रम
सदन में विधेयक पर चर्चा के दौरान माहौल तीखा रहा। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष, विशेषकर लोकसभा में विपक्ष के नेता के रवैये पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है।
जितेंद्र सिंह ने सदन में कहा, "सबसे पहले विपक्ष का आचरण बेहद निराशाजनक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता को दर्शाने वाले इतने गंभीर और महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझाव देने के बजाय विपक्ष राजनीति कर रहा है। विपक्ष के नेता ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, वह न केवल असंसदीय थी, बल्कि इतनी अनुचित थी कि मैं उसे दोहराना भी नहीं चाहूंगा। यदि कोई खुद को शिक्षित और संसदीय परंपराओं से परिचित मानता है, तो उसे पता होना चाहिए कि सदन के भीतर ऐसी भाषा का प्रयोग नहीं किया जा सकता।"
युवाओं को 'मूर्ख' कहने पर तीखी प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष के नेता द्वारा देश के युवाओं को 'मूर्ख' कहे जाने को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, "इस देश के युवाओं को, जो देश का भविष्य हैं, 'मूर्ख' कहना इससे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण और क्या हो सकता है। मुझे आश्चर्य होता है कि क्या उन्हें संसदीय कार्यवाही के बुनियादी नियमों और मर्यादाओं की भी जानकारी है।"
गौरतलब है कि पेपर लीक के मुद्दे ने हाल के वर्षों में लाखों परीक्षार्थियों को प्रभावित किया है और यह विषय युवाओं के बीच अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में इस विधेयक पर हुई बहस का राजनीतिक रंग और गहरा हो गया।
21 जुलाई की घटना पर तंज
जितेंद्र सिंह ने 21 जुलाई की एक घटना का उल्लेख करते हुए विपक्ष के नेता पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "21 जुलाई को विपक्ष के नेता शायद किसी विशेष सोच के कारण प्रधानमंत्री के आवास 7 एलकेएम के बाहर जाकर बैठ गए। ऐसा लगा मानो उनकी गहरी इच्छा थी कि देश उन्हें चुने और 7 एलकेएम में बैठाए। जब यह इच्छा पूरी नहीं हुई तो वे निराश और हताश होकर वहां के गेट पर जाकर बैठ गए। जब उन्हें विनम्रता से समझाया गया कि ऐसा व्यवहार उनके पद और कद के अनुरूप नहीं है, तो उन्होंने कहा कि उन्हें बस वहां से हटा दिया जाए।"
आंसू गैस बनाम गोली — मंत्री का स्पष्टीकरण
सदन में एक अन्य विवादास्पद मुद्दे पर जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि संबंधित घटना में गोली नहीं चलाई गई थी, केवल आंसू गैस का उपयोग किया गया था। उन्होंने कहा, "बार-बार स्पष्ट किया गया है कि कोई गोली नहीं चली। जब गोली चली ही नहीं, तो गोली चलाने के आदेश का सवाल ही नहीं उठता। इस तरह का आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं, बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है।"
आगे क्या होगा
विधेयक के ध्वनिमत से पारित होने के बाद अब यह राज्यसभा में जाएगा। यह विधेयक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर ही इसकी सफलता निर्भर करेगी।