28 जुलाई 2026
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एंटी-पेपर लीक बिल पर अखिलेश यादव का प्रहार: 'एक प्रधान हटाकर PM ने खुद को बड़े संकट से बचाया'

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एंटी-पेपर लीक बिल पर अखिलेश यादव का प्रहार: 'एक प्रधान हटाकर PM ने खुद को बड़े संकट से बचाया'

सारांश

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर बहस सिर्फ कानूनी नहीं, राजनीतिक भी बन गई। अखिलेश यादव ने BJP के 10 साल में 20 पेपर लीक का दावा करते हुए पूछा — 'एक प्रधान हटाकर क्या PM ने खुद को बड़े संकट से नहीं बचाया?' विपक्ष का असली निशाना संशोधन नहीं, पूरी व्यवस्था की जवाबदेही है।

मुख्य बातें

अखिलेश यादव ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने दावा किया कि BJP के 10 वर्षों के शासन में 20 परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए।
तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की विदाई पर तंज कसते हुए कहा — 'एक प्रधान हटाकर PM ने खुद को बड़े संकट से बचाया।' अखिलेश ने केवल कानूनी संशोधन को अपर्याप्त बताते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की माँग की।
छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की तुलना उन्होंने आपातकाल के दौर से की।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अखिलेश यादव ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल पुराने कानून में संशोधन लाकर समस्या से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है, जबकि आवश्यकता पूरी परीक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की है। अखिलेश ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 10 वर्षों के शासनकाल में 20 परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो चुके हैं।

मुख्य घटनाक्रम

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक विधेयक पर बहस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि करोड़ों युवाओं की पहली माँग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी और अंततः मोदी सरकार को यह माँग स्वीकार करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले एक समिति बनाई और उसके बाद मंत्री पद पर बदलाव किया गया।

तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने कहा, 'जब पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान संसद पहुँचे तो सदन के बाहर उनका स्वागत किया गया। हमें उनके स्वागत से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन असली सवाल यह है कि इससे प्रधानमंत्री को कितनी बड़ी राहत मिली। एक 'प्रधान' को हटाकर क्या प्रधानमंत्री ने खुद को कहीं बड़े संकट से नहीं बचा लिया?'

विधेयक पर सवाल

अखिलेश यादव ने विधेयक की प्रभावशीलता पर सीधे सवाल उठाते हुए कहा, 'जो लोग राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी नहीं रोक सके, वे पेपर लीक कैसे रोकेंगे?' उन्होंने तर्क दिया कि यदि मौजूदा कानूनी ढाँचा इतना सक्षम था, तो BJP के 10 वर्षों के शासन में 20 पेपर लीक कैसे हो गए। उनके अनुसार, केवल संशोधन लाकर किसी को गुमराह नहीं किया जा सकता; परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार ज़रूरी हैं।

छात्र आंदोलन और सरकार पर दबाव

सपा सांसद ने कहा कि यह देश का पहला ऐसा छात्र आंदोलन था जिसे छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावकों का भी व्यापक समर्थन मिला, जिसके कारण यह आंदोलन इतना बड़ा बन सका और सरकार पर दबाव बना। उन्होंने कहा कि आंदोलन की सफलता के बाद जो नारे लगे, वे सरकार के विरुद्ध थे। अखिलेश ने यह भी याद दिलाया कि यह वही सरकार है जो दावा करती थी कि वह किसी के सामने नहीं झुकती, लेकिन अंततः छात्रों की माँगें माननी पड़ीं।

छात्रों पर कार्रवाई का आरोप

अखिलेश यादव ने छात्र प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हुई कार्रवाई को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर जिस तरह की कार्रवाई की गई, वह आपातकाल के दौर की याद दिलाती है — हालाँकि सरकार ने इन आरोपों पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आगे क्या

विधेयक पर संसद में चर्चा जारी है और विपक्ष के तीखे तेवर देखते हुए इसके पारित होने से पहले और बहस की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा सुधार की माँग अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दा बन चुकी है और सरकार को ठोस क्रियान्वयन तंत्र प्रस्तुत करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि विपक्ष केवल सरकार को घेरने तक सीमित है या परीक्षा सुधार का कोई ठोस वैकल्पिक खाका भी सामने रखेगा। धर्मेंद्र प्रधान की विदाई पर तंज उचित है, पर यह नहीं भूलना चाहिए कि पेपर लीक की जड़ें केवल मंत्री बदलने से नहीं उखड़तीं — परीक्षा एजेंसियों की संरचनागत कमज़ोरियाँ और निगरानी तंत्र की खामियाँ कहीं गहरी हैं। संशोधन विधेयक को 'पुराने कानून का नया मुलम्मा' कहना आसान है, लेकिन जब तक विपक्ष क्रियान्वयन के विकल्प नहीं सुझाता, यह बहस संसद की दीवारों तक ही सिमटी रहेगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा लाया गया संशोधन विधेयक है जो सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए मौजूदा कानूनी ढाँचे को मज़बूत करने का प्रयास करता है। विपक्ष का कहना है कि केवल संशोधन से काम नहीं चलेगा और पूरी परीक्षा व्यवस्था में बदलाव ज़रूरी है।
अखिलेश यादव ने BJP पर 20 पेपर लीक का दावा क्यों किया?
अखिलेश यादव ने लोकसभा में दावा किया कि BJP के 10 वर्षों के शासनकाल में 20 परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हो चुके हैं। उनका तर्क था कि यदि मौजूदा कानून प्रभावी होता, तो इतने बड़े पैमाने पर लीक संभव नहीं होते।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अखिलेश यादव ने क्या कहा?
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि करोड़ों युवाओं की पहली माँग धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी और सरकार को अंततः यह माँग माननी पड़ी। उन्होंने कहा कि 'एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री ने खुद को कहीं बड़े संकट से बचा लिया।'
छात्र आंदोलन को लेकर अखिलेश यादव ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि यह देश का पहला ऐसा छात्र आंदोलन था जिसे छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावकों का भी व्यापक समर्थन मिला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों पर की गई कार्रवाई आपातकाल के दौर की याद दिलाती है।
विपक्ष की माँग केवल कानून बदलने से आगे क्यों जाती है?
अखिलेश यादव के अनुसार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार आवश्यक हैं, न कि केवल पुराने कानून में संशोधन। उनका कहना है कि बिना संरचनागत बदलाव के कोई भी संशोधन प्रभावी नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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