29 जुलाई 2026
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एंटी-पेपर लीक बिल: पप्पू यादव ने संसद में NTA चेयरमैन को न हटाने पर सरकार को घेरा

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एंटी-पेपर लीक बिल: पप्पू यादव ने संसद में NTA चेयरमैन को न हटाने पर सरकार को घेरा

सारांश

संसद के मानसून सत्र में एंटी-पेपर लीक बिल पर बहस तीखी हो गई, जब पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने NTA चेयरमैन को न हटाने, RTI-ऑडिट की अनुपस्थिति और संजीव मुखिया को बरी किए जाने पर सीधे सवाल दागे। विपक्ष जवाबदेही माँग रहा है, सरकार पारदर्शिता का दावा कर रही है।

मुख्य बातें

निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 29 जुलाई को लोकसभा में NTA चेयरमैन को अब तक न हटाने पर सरकार से जवाब माँगा।
यादव ने आरोप लगाया कि RTI और ऑडिट को परीक्षा व्यवस्था से दूर कर दिया गया है।
हर साल 6 से 8 करोड़ फॉर्म भरे जाते हैं — इतनी बड़ी राशि NTA को मिलने के बावजूद जवाबदेही का सवाल अनुत्तरित है।
संजीव मुखिया को बरी किए जाने और SIT गठन न होने पर भी विपक्ष ने आपत्ति जताई।
हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
सुपौल सांसद दिलेश्वर कामत ने विधेयक को छात्रों के भविष्य के लिए जरूरी बताया।

लोकसभा में 29 जुलाई को एंटी-पेपर लीक विधेयक पर चर्चा के दौरान पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की जवाबदेही पर तीखे सवाल उठाए और पूछा कि NTA के चेयरमैन को अब तक पद से क्यों नहीं हटाया गया। संसद के मानसून सत्र में मंगलवार से शुरू हुई यह बहस बुधवार को भी जारी रही, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

पप्पू यादव के मुख्य सवाल

सांसद पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि RTI और ऑडिट को परीक्षा प्रणाली से जुड़ी व्यवस्था से दूर कर दिया गया है, जिससे जवाबदेही का कोई तंत्र नहीं बचा। उन्होंने सवाल किया कि पेपर लीक के इस पूरे मामले में जिम्मेदारी आखिर किस पर तय होगी।

यादव ने दावा किया कि 2018 में NTA में जिन अधिकारी को लाया गया, वे इससे पहले मध्य प्रदेश के शिक्षा विभाग में वरिष्ठ पद पर कार्यरत थे। उन्होंने कहा कि हर साल 6 से 8 करोड़ आवेदन फॉर्म भरे जाते हैं और इतनी बड़ी राशि NTA को दी जाती है, फिर भी पारदर्शिता का अभाव है।

संजीव मुखिया और SIT पर सवाल

पप्पू यादव ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में संजीव मुखिया को बरी कर दिया गया है। उन्होंने पूछा कि जाँच के लिए SIT का गठन कौन करेगा और राज्यों के अधिकार इस प्रक्रिया में क्यों सीमित किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि सरकार ने NTA की भूमिका पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है और पेपर लीक को महज एक सामान्य घटना की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।

सदन में हंगामा और कार्यवाही स्थगन

बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दोपहर में कार्यवाही पुनः शुरू होने पर बिहार के सुपौल से जनता दल के सांसद दिलेश्वर कामत ने चर्चा की अगुआई की और कहा कि यह विधेयक देश के छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

सरकार का पक्ष

सरकार का कहना है कि एंटी-पेपर लीक विधेयक परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसे NDA सरकार के प्रति जनता के भरोसे को मजबूत करने वाला बताया।

आगे क्या होगा

विपक्ष लगातार NTA की जवाबदेही, जाँच प्रक्रिया और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार से स्पष्ट जवाब माँग रहा है। यह विधेयक संसद में पारित होने के बाद परीक्षा प्रणाली में कानूनी बदलावों का आधार बनेगा — हालाँकि आलोचकों का कहना है कि बिना NTA में संस्थागत सुधार के केवल कानून पर्याप्त नहीं होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पप्पू यादव के सवाल उस असली खामी की ओर इशारा करते हैं जिसे कानून अकेले नहीं भर सकता — NTA की संस्थागत जवाबदेही। RTI और ऑडिट से परे रखी गई किसी भी संस्था में पारदर्शिता का दावा खोखला रहता है। संजीव मुखिया प्रकरण और SIT गठन की अनुपस्थिति यह संकेत देती है कि जाँच प्रक्रिया अभी भी अधूरी है। कानून बन जाने के बाद भी अगर NTA की संरचना नहीं बदली, तो यह विधेयक अगले पेपर लीक को नहीं रोक पाएगा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एंटी-पेपर लीक बिल क्या है और यह क्यों लाया गया?
एंटी-पेपर लीक बिल एक प्रस्तावित कानून है जिसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक को रोकना और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना है। यह विधेयक NEET और अन्य परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों की पृष्ठभूमि में लोकसभा में पेश किया गया है।
पप्पू यादव ने NTA पर क्या आरोप लगाए?
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि NTA से RTI और ऑडिट की व्यवस्था हटा दी गई है, चेयरमैन को अब तक नहीं हटाया गया, और हर साल 6 से 8 करोड़ फॉर्म से जमा होने वाली राशि की कोई जवाबदेही नहीं है। उन्होंने संजीव मुखिया को बरी किए जाने पर भी सवाल उठाए।
NTA के चेयरमैन को हटाने की माँग क्यों हो रही है?
विपक्षी सांसदों का तर्क है कि पेपर लीक की घटनाओं में NTA की प्रशासनिक विफलता स्पष्ट है, इसलिए संस्था के शीर्ष नेतृत्व को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। पप्पू यादव ने यह भी दावा किया कि 2018 में NTA में लाए गए अधिकारी पहले मध्य प्रदेश शिक्षा विभाग में वरिष्ठ पद पर थे।
लोकसभा में बुधवार को क्या हुआ?
बुधवार को सदन शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद बिहार के सुपौल सांसद दिलेश्वर कामत ने चर्चा की शुरुआत करते हुए विधेयक को छात्रों के भविष्य के लिए जरूरी बताया।
विपक्ष की मुख्य माँगें क्या हैं?
विपक्ष NTA चेयरमैन को हटाने, SIT गठन, RTI और ऑडिट की बहाली, और राज्यों के अधिकारों की रक्षा की माँग कर रहा है। आलोचकों का कहना है कि केवल कानून बनाने से पेपर लीक नहीं रुकेगा — NTA में संस्थागत सुधार जरूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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