पेपर लीक रोधी बिल पर राज्यसभा में तीखी बहस, प्रफुल्ल पटेल ने प्रदर्शनकारियों की भाषा पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा में 30 जुलाई को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल' पर चर्चा के दौरान नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के सांसद प्रफुल्ल पटेल ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठाए। उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे को देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा बताते हुए इस पर बिना राजनीतिक रंग दिए चर्चा की अपील की।
प्रफुल्ल पटेल का रुख
प्रफुल्ल पटेल ने विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने सभी को चिंतित किया है। उन्होंने युवाओं को सही मार्गदर्शन देने की ज़रूरत पर बल दिया और प्रदर्शनों के दौरान अपनाई गई भाषा पर आपत्ति जताई।
पटेल ने यह भी कहा कि इस संशोधन बिल को केंद्र सरकार की कमज़ोरी की निशानी नहीं, बल्कि देश को आगे ले जाने की दृढ़ इच्छाशक्ति के प्रमाण के रूप में देखा जाना चाहिए।
विपक्ष की तीखी आलोचना
विपक्षी दलों के सांसदों ने बहस के दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कड़ी आलोचना की और परीक्षा प्रणाली में आमूल बदलाव की माँग की। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज कुमार झा ने NTA को पूरी तरह भंग करने की माँग रखते हुए कहा कि समस्या की जड़ को ही समाप्त किया जाना चाहिए।
झा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से इस मामले में पहल करने का आग्रह किया। उन्होंने शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी के साथ हुई उस चर्चा का भी हवाला दिया जिसमें यह सवाल उठा था कि ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) के उम्मीदवारों को 53-54 वर्ष की उम्र में भी दोबारा परीक्षा देनी पड़ती है, जबकि कुलपति बिना किसी ऐसी परीक्षा के विश्वविद्यालयों का नेतृत्व करते रहते हैं।
AAP सांसद का छात्र बलिदान पर बयान
आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने अपना वक्तव्य उन 1.23 लाख छात्रों को श्रद्धांजलि देकर शुरू किया जिन्होंने कथित तौर पर पिछले 10 वर्षों में अपनी जान गँवाई। उन्होंने फास्ट-ट्रैक अदालतों में मामलों के भारी बैकलॉग और स्कूलों व शिक्षा प्रणाली में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया।
सिंह ने दिल्ली और बिहार में छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित अत्यधिक बल प्रयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर AK-47 राइफल से गोलीबारी की — हालाँकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
बिल की पृष्ठभूमि
यह बिल ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर छात्र समुदाय में गहरा आक्रोश है। NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं ने NTA की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि यह संशोधन बिल मौजूदा कानूनी ढाँचे को और मज़बूत बनाने की कोशिश है, जिसमें दोषियों के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान किए जाने की उम्मीद है।
आगे की राह
राज्यसभा में इस बिल पर बहस जारी रहने की संभावना है। विपक्ष की माँगों और सत्तापक्ष के रुख के बीच की खाई को पाटना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि बिल के अंतिम स्वरूप में विपक्षी सुझावों को कितनी जगह मिलती है और NTA के भविष्य पर सरकार क्या निर्णय लेती है।