30 जुलाई 2026
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पेपर लीक रोधी बिल पर राज्यसभा में तीखी बहस, प्रफुल्ल पटेल ने प्रदर्शनकारियों की भाषा पर उठाए सवाल

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पेपर लीक रोधी बिल पर राज्यसभा में तीखी बहस, प्रफुल्ल पटेल ने प्रदर्शनकारियों की भाषा पर उठाए सवाल

सारांश

राज्यसभा में पेपर लीक रोधी बिल पर बहस सिर्फ कानूनी संशोधन तक सीमित नहीं रही — NCP ने प्रदर्शनकारियों की भाषा पर सवाल उठाए, RJD ने NTA को ही भंग करने की माँग की, और AAP ने 1.23 लाख छात्र मौतों का हवाला देते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

NCP सांसद प्रफुल्ल पटेल ने 30 जुलाई को राज्यसभा में छात्र प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल भाषा पर सवाल उठाए और बिना राजनीति के बहस की अपील की।
RJD सांसद मनोज कुमार झा ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को पूरी तरह भंग करने की माँग की।
AAP सांसद संजय सिंह ने पिछले 10 वर्षों में 1.23 लाख छात्रों की मौत का हवाला दिया और बिहार में पुलिस पर AK-47 से गोलीबारी का आरोप लगाया।
GATE परीक्षार्थियों को 53-54 वर्ष की उम्र में भी परीक्षा देने की बाध्यता का मुद्दा झा ने उठाया।
विपक्ष ने फास्ट-ट्रैक अदालतों में बैकलॉग और शिक्षा प्रणाली में बुनियादी सुविधाओं की कमी को भी बहस में शामिल किया।

राज्यसभा में 30 जुलाई को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल' पर चर्चा के दौरान नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के सांसद प्रफुल्ल पटेल ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर सवाल उठाए। उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे को देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा बताते हुए इस पर बिना राजनीतिक रंग दिए चर्चा की अपील की।

प्रफुल्ल पटेल का रुख

प्रफुल्ल पटेल ने विरोध के लोकतांत्रिक अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने सभी को चिंतित किया है। उन्होंने युवाओं को सही मार्गदर्शन देने की ज़रूरत पर बल दिया और प्रदर्शनों के दौरान अपनाई गई भाषा पर आपत्ति जताई।

पटेल ने यह भी कहा कि इस संशोधन बिल को केंद्र सरकार की कमज़ोरी की निशानी नहीं, बल्कि देश को आगे ले जाने की दृढ़ इच्छाशक्ति के प्रमाण के रूप में देखा जाना चाहिए।

विपक्ष की तीखी आलोचना

विपक्षी दलों के सांसदों ने बहस के दौरान नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कड़ी आलोचना की और परीक्षा प्रणाली में आमूल बदलाव की माँग की। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज कुमार झा ने NTA को पूरी तरह भंग करने की माँग रखते हुए कहा कि समस्या की जड़ को ही समाप्त किया जाना चाहिए।

झा ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से इस मामले में पहल करने का आग्रह किया। उन्होंने शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी के साथ हुई उस चर्चा का भी हवाला दिया जिसमें यह सवाल उठा था कि ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) के उम्मीदवारों को 53-54 वर्ष की उम्र में भी दोबारा परीक्षा देनी पड़ती है, जबकि कुलपति बिना किसी ऐसी परीक्षा के विश्वविद्यालयों का नेतृत्व करते रहते हैं।

AAP सांसद का छात्र बलिदान पर बयान

आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने अपना वक्तव्य उन 1.23 लाख छात्रों को श्रद्धांजलि देकर शुरू किया जिन्होंने कथित तौर पर पिछले 10 वर्षों में अपनी जान गँवाई। उन्होंने फास्ट-ट्रैक अदालतों में मामलों के भारी बैकलॉग और स्कूलों व शिक्षा प्रणाली में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया।

सिंह ने दिल्ली और बिहार में छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित अत्यधिक बल प्रयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर AK-47 राइफल से गोलीबारी की — हालाँकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

बिल की पृष्ठभूमि

यह बिल ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक की घटनाओं को लेकर छात्र समुदाय में गहरा आक्रोश है। NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं ने NTA की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि यह संशोधन बिल मौजूदा कानूनी ढाँचे को और मज़बूत बनाने की कोशिश है, जिसमें दोषियों के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान किए जाने की उम्मीद है।

आगे की राह

राज्यसभा में इस बिल पर बहस जारी रहने की संभावना है। विपक्ष की माँगों और सत्तापक्ष के रुख के बीच की खाई को पाटना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि बिल के अंतिम स्वरूप में विपक्षी सुझावों को कितनी जगह मिलती है और NTA के भविष्य पर सरकार क्या निर्णय लेती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक गहरे राजनीतिक विभाजन का अखाड़ा बन चुका है। प्रफुल्ल पटेल का प्रदर्शनकारियों की भाषा पर ध्यान केंद्रित करना उस असल सवाल से ध्यान भटकाने का जोखिम उठाता है जो लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। NTA को भंग करने की माँग तात्कालिक राहत दे सकती है, लेकिन जब तक परीक्षा-तंत्र में संरचनात्मक सुधार और स्वतंत्र निगरानी नहीं आती, नया संस्थान भी उन्हीं खामियों का शिकार हो सकता है। संसद की असली परीक्षा यह है कि वह इस बिल को महज़ कानूनी औपचारिकता बनने से रोके और इसमें जवाबदेही के ठोस तंत्र सुनिश्चित करे।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत एक संशोधन विधेयक है जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल को रोकना है। इसमें दोषियों के लिए कड़े罰 प्रावधान किए जाने की उम्मीद है।
प्रफुल्ल पटेल ने राज्यसभा में क्या कहा?
NCP सांसद प्रफुल्ल पटेल ने पेपर लीक के मुद्दे पर बिना राजनीति के चर्चा की अपील की और प्रदर्शनों के दौरान इस्तेमाल की गई भाषा पर आपत्ति जताई। उन्होंने इस बिल को सरकार की मज़बूती का प्रतीक बताया।
मनोज कुमार झा ने NTA के बारे में क्या माँग की?
RJD सांसद मनोज कुमार झा ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को पूरी तरह भंग करने की माँग की और कहा कि समस्या को जड़ से खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से इस दिशा में पहल करने का आग्रह भी किया।
संजय सिंह ने 1.23 लाख छात्रों का ज़िक्र क्यों किया?
AAP सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 1.23 लाख छात्रों ने अपनी जान दी है। उन्होंने इसे शिक्षा प्रणाली की विफलता और परीक्षा के दबाव से जोड़ते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
इस बिल से छात्रों पर क्या असर पड़ेगा?
यदि यह बिल पारित होता है तो पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा, जिससे परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। हालाँकि विपक्ष का मानना है कि जब तक NTA जैसी संस्थाओं में संरचनात्मक सुधार नहीं होते, केवल कानून पर्याप्त नहीं होगा।
राष्ट्र प्रेस
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