13 जुलाई 2026
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पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट में PIL: समयबद्ध जांच और संपत्ति जब्ती की मांग

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पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट में PIL: समयबद्ध जांच और संपत्ति जब्ती की मांग

सारांश

पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं और छात्रों की आत्महत्याओं के बीच अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर की है। माँग है — समयबद्ध जाँच, दोषियों की संपत्ति जब्ती, और NEET जैसे मामलों में असली मास्टरमाइंड तक पहुँच। 2024 का कानून लागू होने के बावजूद लीक थमे नहीं।

मुख्य बातें

अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने 13 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में पेपर लीक पर जनहित याचिका दायर की।
याचिका में समयबद्ध जाँच , 'स्टैंडर्ड जाँच प्रक्रिया' और दोषियों की संपत्ति जब्ती की माँग की गई है।
3 मई 2026 के कथित NEET पेपर लीक का विशेष उल्लेख, जिसने लाखों छात्रों को प्रभावित किया।
याचिका के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का लगातार उल्लंघन हो रहा है।
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू होने के बावजूद लीक की घटनाएँ जारी हैं।
याचिका में विधि आयोग से तीन महीने में अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं पर रिपोर्ट देने का निर्देश माँगा गया है।

सर्वोच्च न्यायालय में 13 जुलाई 2026 को पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और भारत के विधि आयोग को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से लाखों छात्रों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

याचिका में क्या मांगा गया है

याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे पेपर लीक मामलों की समयबद्ध जांच और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए एक 'स्टैंडर्ड प्रश्नावली' और 'विशेष जांच प्रक्रिया (SIP)' तैयार करें। इसके अलावा, याचिका में भ्रष्टाचार विरोधी, मनी लॉन्ड्रिंग, बेनामी संपत्ति और काले धन कानूनों के प्रावधानों को लागू करने की भी माँग की गई है।

याचिका में यह भी माँग की गई है कि पेपर लीक के दोषियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल व अचल संपत्तियों का मूल्यांकन और जब्ती की जाए। साथ ही, ऐसे मामलों में दी जाने वाली सज़ाएँ एक साथ नहीं, बल्कि लगातार (consecutive) चलनी चाहिए ताकि कड़ा निवारक तैयार हो सके।

छात्रों पर असर और संवैधानिक उल्लंघन

याचिका में दावा किया गया है कि पेपर लीक की घटनाओं के कारण छात्रों को वित्तीय कठिनाई, शैक्षिक एवं रोज़गार अवसरों की हानि, गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्याएँ और बढ़ती आत्महत्याओं का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में कहा गया है, 'पेपर लीक का देशव्यापी असर हुआ है, जिससे छात्रों और उनके परिवारों पर बुरा असर पड़ा है और कई छात्रों ने आत्महत्या कर ली है।'

याचिका के अनुसार, अधिकारियों की लगातार विफलता के परिणामस्वरूप संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।

NEET पेपर लीक और मौजूदा कानून की सीमाएँ

याचिका में 3 मई 2026 के कथित NEET पेपर लीक का विशेष उल्लेख किया गया है, जिसने लाखों छात्रों को प्रभावित किया और परीक्षा संबंधी अपराधों से निपटने में प्रणालीगत कमियों को उजागर किया। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 जून 2024 से लागू है — फिर भी, याचिका के अनुसार, लीक की घटनाओं में वृद्धि जारी है।

गौरतलब है कि याचिका में मौजूदा कानूनी ढाँचे की कई खामियाँ गिनाई गई हैं: समयबद्ध जाँच और परीक्षण का अभाव, मानक जाँच प्रक्रिया की कमी, अपराध की आय और बेनामी संपत्ति का पता न लगना, और मास्टरमाइंड की पहचान के लिए धोखे का पता लगाने वाले परीक्षणों (DDT) का उपयोग न होना।

विधि आयोग से रिपोर्ट की माँग

याचिका में वैकल्पिक रूप से भारत के विधि आयोग को निर्देश देने की माँग की गई है कि वह पेपर लीक जाँच से संबंधित अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं की समीक्षा करे और तीन महीने के भीतर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करे। याचिका में कहा गया है कि 'कार्रवाई का कारण अभी भी कायम है, क्योंकि पेपर लीक के परिणामों का समाधान नहीं हुआ है।' अब यह देखना होगा कि सर्वोच्च न्यायालय इस याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर तंत्र नहीं बदला। NEET से लेकर राज्य स्तरीय भर्ती परीक्षाओं तक, पेपर लीक का चक्र टूटा नहीं है क्योंकि मास्टरमाइंड तक जाँच शायद ही कभी पहुँचती है। संपत्ति जब्ती और लगातार सज़ा की माँग तार्किक है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या न्यायपालिका कार्यपालिका को इस स्तर की जवाबदेही के लिए बाध्य कर सकती है — जबकि राज्य सरकारें अब तक इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव से बचती रही हैं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट में पेपर लीक पर दायर PIL में क्या माँगा गया है?
अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर इस PIL में केंद्र और राज्य सरकारों को समयबद्ध जाँच, मानक जाँच प्रक्रिया (SIP) और दोषियों की संपत्ति जब्ती के निर्देश देने की माँग की गई है। साथ ही, भ्रष्टाचार निवारण, मनी लॉन्ड्रिंग और बेनामी संपत्ति कानूनों को लागू करने की भी माँग है।
यह PIL किसने और कब दायर की?
यह जनहित याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने 13 जुलाई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में दायर की। याचिका में केंद्र सरकार, सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और भारत के विधि आयोग को प्रतिवादी बनाया गया है।
NEET पेपर लीक का इस याचिका से क्या संबंध है?
याचिका में 3 मई 2026 के कथित NEET पेपर लीक का विशेष उल्लेख किया गया है, जिसने लाखों छात्रों को प्रभावित किया। याचिका के अनुसार यह घटना परीक्षा अपराधों से निपटने में प्रणालीगत कमियों को उजागर करती है और कार्रवाई का कारण अभी भी कायम है।
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के बावजूद पेपर लीक क्यों जारी है?
याचिका के अनुसार जून 2024 से यह कानून लागू होने के बावजूद लीक की घटनाएँ बढ़ रही हैं क्योंकि वास्तविक मास्टरमाइंड जाँच एजेंसियों की पकड़ से बाहर हैं। कानून में समयबद्ध जाँच, मानक प्रक्रिया और संपत्ति जब्ती जैसे प्रभावी निवारक तंत्र का अभाव है।
विधि आयोग की इस मामले में क्या भूमिका माँगी गई है?
PIL में विधि आयोग को निर्देश देने की माँग की गई है कि वह पेपर लीक जाँच से संबंधित अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं की समीक्षा करे और तीन महीने के भीतर एक रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय को प्रस्तुत करे।
राष्ट्र प्रेस
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