संसद में शिक्षा विधेयक पर NDA सांसदों का विपक्ष पर हमला, मालीवाल ने पंजाब पेपर लीक पर AAP को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
मानसून सत्र के दौरान नई दिल्ली में 28 जुलाई 2026 को संसद के भीतर शिक्षा और परीक्षा सुधार से जुड़े विधेयक पर राजनीतिक तनाव चरम पर पहुँच गया। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने और छात्रहित के मुद्दों पर सार्थक बहस से बचने का आरोप लगाया। साथ ही, राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पंजाब में कथित पेपर लीक मामलों को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा प्रहार किया।
विधेयक पर चर्चा क्यों अटकी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद अरुण गोविल ने कहा कि विपक्ष ने पहले चर्चा के लिए सहमति जताई थी, लेकिन बाद में बार-बार अपने रुख से पीछे हट गया। उनके अनुसार, यह विधेयक छात्रों और युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़ा है और इस पर गंभीर संसदीय बहस होनी चाहिए। गोविल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने युवाओं के हित में कई ठोस कदम उठाए हैं और युवाओं को राजनीतिक बयानबाज़ी से दूर रहकर सरकार के सकारात्मक दृष्टिकोण पर भरोसा रखना चाहिए।
BJP सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने भी विपक्ष पर संसद का बहुमूल्य समय नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि किसी के पास कोई मुद्दा है तो उसे सदन में बहस के माध्यम से रखा जाना चाहिए, न कि हंगामे के ज़रिए। BJP सांसद शांतनु ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्रहित में लिए जा रहे निर्णयों का समर्थन स्वाभाविक रूप से होना चाहिए।
मालीवाल का AAP पर निशाना — पंजाब पेपर लीक विवाद
राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि पंजाब में पिछले पाँच वर्षों के दौरान कथित तौर पर छह बार पेपर लीक हुए और बड़े पैमाने पर नकल कराई गई। उन्होंने कहा कि इन मामलों में अब तक किसी की जवाबदेही तय नहीं की गई है। मालीवाल ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान इन घटनाओं से इनकार कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता इससे भिन्न है।
मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब के पेपर लीक मामलों पर उन्होंने पूर्ण चुप्पी साध रखी है। उनके अनुसार, शिक्षा में जवाबदेही का अभियान चलाने वाले वही लोग पंजाब के मामलों पर मौन हैं। मालीवाल ने दावा किया कि केजरीवाल ने अपने सहयोगियों के माध्यम से एक संगठन खड़ा कर शिक्षा के मुद्दे पर माहौल बनाने की कोशिश की, लेकिन पंजाब में उनकी अपनी सरकार की कथित विफलताओं पर वे मुखर नहीं हैं।
विपक्ष की भूमिका पर सवाल
यह ऐसे समय में आया है जब देश में NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर छात्रों में व्यापक असंतोष है। गौरतलब है कि पेपर लीक का मुद्दा केवल किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहा — कई राज्यों में अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं। NDA सांसदों का तर्क है कि इस पर केंद्रीय स्तर पर कानून बनाना ज़रूरी है, जबकि विपक्ष की आपत्तियाँ अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो पाई हैं।
आगे क्या होगा
संसद के मानसून सत्र में शिक्षा और परीक्षा सुधार विधेयक पर बहस होना अभी बाकी है। NDA सांसदों ने संकेत दिया है कि वे विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विपक्ष यदि सदन में अपनी आपत्तियाँ दर्ज नहीं कराता, तो सरकार के पास बहुमत के बल पर विधेयक पारित करने का विकल्प खुला रहेगा।