27 जुलाई 2026
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पेपर लीक विरोधी बिल लोकसभा में पेश, स्पीकर ओम बिरला बोले — 'सुधार का प्रथम कदम'

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पेपर लीक विरोधी बिल लोकसभा में पेश, स्पीकर ओम बिरला बोले — 'सुधार का प्रथम कदम'

सारांश

नीट पेपर लीक के बाद देशव्यापी आक्रोश का विधायी जवाब — केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई को लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक-2026 पेश किया। स्पीकर ओम बिरला ने इसे 'सुधार का प्रथम कदम' कहा, लेकिन विपक्ष के हंगामे से कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026 पेश किया।
विधेयक नीट पेपर लीक के विरुद्ध हफ्तों चले देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बाद लाया गया है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधेयक को 'सुधार का प्रथम कदम' बताया और संशोधन प्रस्तुत करने की समय-सीमा दोपहर 1 बजे तय की।
सत्तापक्ष ने मेज थपथपाकर समर्थन दिया; विपक्ष ने हंगामा किया।
बार-बार अनुरोध के बाद भी व्यवधान जारी रहने पर सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित की गई।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026 पेश किया — यह कदम नीट पेपर लीक के विरुद्ध देशभर में कई सप्ताह तक चले विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। सत्तापक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर विधेयक का स्वागत किया, जबकि विपक्ष सदन में हंगामा करता रहा।

विधेयक का परिचय और सदन का माहौल

शून्यकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच जितेंद्र सिंह ने विधेयक सदन के पटल पर रखा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संशोधन प्रस्तुत करने की अंतिम सीमा दोपहर एक बजे तय की। यह विधेयक मौजूदा लोक परीक्षा कानून में संशोधन के रूप में लाया गया है, जिसका उद्देश्य परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर अंकुश लगाना है।

स्पीकर की अपील और सरकार का रुख

अध्यक्ष ओम बिरला ने विधेयक को 'महत्वपूर्ण' बताते हुए कहा, 'यह महत्वपूर्ण विधेयक है। इससे सदन और देश की मंशाओं पर व्यापक चर्चा होगी। सभी दल के लोग इस विषय पर बहुत दिनों से मांग कर रहे थे। ये सुधार का प्रथम कदम है।' उन्होंने आगे कहा कि विधेयक पर सभी पक्षों को अपने विचार रखने का पर्याप्त समय दिया जाएगा।

बिरला ने विपक्षी सदस्यों से सीधे अनुरोध किया: 'आप बहुत दिन से इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहे थे। विधेयक के अलावा आप जो भी सुझाव देंगे, निश्चित रूप से उन सुझावों पर सरकार अमल लाने का प्रयास करेगी। नारेबाजी और तख्तियां दिखाने की जगह चर्चा करें।'

विपक्ष का हंगामा और कार्यवाही स्थगन

अध्यक्ष ओम बिरला के बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी जारी रखी। परिणामस्वरूप लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। यह व्यवधान उस समय आया जब सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही पेपर लीक पर कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।

पृष्ठभूमि: नीट विवाद और जन आक्रोश

गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक प्रकरण ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों में व्यापक आक्रोश उत्पन्न किया था। कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे। यह ऐसे समय में आया है जब प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। विधेयक को इसी पृष्ठभूमि में एक विधायी उत्तर के रूप में देखा जा रहा है।

आगे क्या होगा

विधेयक पर विस्तृत चर्चा और संशोधन प्रक्रिया आगामी सत्र में होने की उम्मीद है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि सदन की सहमति के अनुसार चर्चा का समय निर्धारित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि विधेयक के प्रावधानों की कड़ाई और क्रियान्वयन तंत्र पर विस्तृत बहस अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी इसके प्रावधानों की कठोरता और क्रियान्वयन तंत्र में होगी। नीट जैसे बड़े लीक मामलों में जाँच एजेंसियों की सुस्ती और दोषियों पर कार्रवाई की धीमी रफ्तार बताती है कि कानून बनाना पर्याप्त नहीं — उसे लागू करने की इच्छाशक्ति भी चाहिए। विपक्ष का हंगामा विरोधाभासी है: जो दल महीनों से इस विधेयक की मांग कर रहे थे, वे उसी पर चर्चा से बचते नज़र आए। यह सत्र उस राजनीतिक परीक्षा का भी मंच है जिसमें छात्रों के भविष्य से बड़ा दांव किसी का नहीं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026 क्या है?
यह विधेयक सार्वजनिक प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों पर अंकुश लगाने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन करता है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में पेश किया।
यह विधेयक क्यों लाया गया?
नीट-यूजी पेपर लीक प्रकरण के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों का व्यापक आक्रोश सामने आया था। कई सप्ताह तक चले विरोध प्रदर्शनों और सभी राजनीतिक दलों की मांग के बाद सरकार ने विधायी कदम उठाया।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विधेयक पर क्या कहा?
स्पीकर ओम बिरला ने विधेयक को 'सुधार का प्रथम कदम' बताया और कहा कि सभी दलों को चर्चा में भाग लेने का पर्याप्त समय दिया जाएगा। उन्होंने विपक्ष से नारेबाजी छोड़कर सार्थक बहस में शामिल होने का अनुरोध किया।
विपक्ष ने इस विधेयक पर क्या रुख अपनाया?
विपक्षी सदस्यों ने शून्यकाल से ही हंगामा जारी रखा और स्पीकर के बार-बार अनुरोध के बावजूद नारेबाजी नहीं रोकी। इसके चलते लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
इस विधेयक पर आगे क्या प्रक्रिया होगी?
संशोधन प्रस्तुत करने की समय-सीमा दोपहर 1 बजे निर्धारित की गई थी। इसके बाद सदन में विस्तृत चर्चा और मतदान की प्रक्रिया होगी। स्पीकर ने आश्वासन दिया है कि सदन की सहमति के अनुसार चर्चा का समय तय किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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