पेपर लीक विरोधी बिल लोकसभा में पेश, स्पीकर ओम बिरला बोले — 'सुधार का प्रथम कदम'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक-2026 पेश किया — यह कदम नीट पेपर लीक के विरुद्ध देशभर में कई सप्ताह तक चले विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। सत्तापक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर विधेयक का स्वागत किया, जबकि विपक्ष सदन में हंगामा करता रहा।
विधेयक का परिचय और सदन का माहौल
शून्यकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच जितेंद्र सिंह ने विधेयक सदन के पटल पर रखा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संशोधन प्रस्तुत करने की अंतिम सीमा दोपहर एक बजे तय की। यह विधेयक मौजूदा लोक परीक्षा कानून में संशोधन के रूप में लाया गया है, जिसका उद्देश्य परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर अंकुश लगाना है।
स्पीकर की अपील और सरकार का रुख
अध्यक्ष ओम बिरला ने विधेयक को 'महत्वपूर्ण' बताते हुए कहा, 'यह महत्वपूर्ण विधेयक है। इससे सदन और देश की मंशाओं पर व्यापक चर्चा होगी। सभी दल के लोग इस विषय पर बहुत दिनों से मांग कर रहे थे। ये सुधार का प्रथम कदम है।' उन्होंने आगे कहा कि विधेयक पर सभी पक्षों को अपने विचार रखने का पर्याप्त समय दिया जाएगा।
बिरला ने विपक्षी सदस्यों से सीधे अनुरोध किया: 'आप बहुत दिन से इस विषय पर चर्चा की मांग कर रहे थे। विधेयक के अलावा आप जो भी सुझाव देंगे, निश्चित रूप से उन सुझावों पर सरकार अमल लाने का प्रयास करेगी। नारेबाजी और तख्तियां दिखाने की जगह चर्चा करें।'
विपक्ष का हंगामा और कार्यवाही स्थगन
अध्यक्ष ओम बिरला के बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी जारी रखी। परिणामस्वरूप लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। यह व्यवधान उस समय आया जब सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही पेपर लीक पर कार्रवाई की मांग करते रहे हैं।
पृष्ठभूमि: नीट विवाद और जन आक्रोश
गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक प्रकरण ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों में व्यापक आक्रोश उत्पन्न किया था। कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठे। यह ऐसे समय में आया है जब प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। विधेयक को इसी पृष्ठभूमि में एक विधायी उत्तर के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा
विधेयक पर विस्तृत चर्चा और संशोधन प्रक्रिया आगामी सत्र में होने की उम्मीद है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि सदन की सहमति के अनुसार चर्चा का समय निर्धारित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि विधेयक के प्रावधानों की कड़ाई और क्रियान्वयन तंत्र पर विस्तृत बहस अपेक्षित है।