27 जुलाई 2026
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लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026: विपक्ष के हंगामे से लोकसभा तीसरी बार स्थगित, स्पीकर बोले — बहस 6 घंटे बढ़ा सकते हैं

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लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026: विपक्ष के हंगामे से लोकसभा तीसरी बार स्थगित, स्पीकर बोले — बहस 6 घंटे बढ़ा सकते हैं

सारांश

पेपर लीक रोकने के लिए लाया गया विधेयक खुद संसद में अटक गया — विपक्ष के हंगामे ने बहस को तीन बार रोका। स्पीकर बिरला ने 6 घंटे तक समय बढ़ाने की पेशकश की, पर सवाल यह है कि जब छात्र न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं, तो सदन की राजनीति कब तक रास्ता रोकेगी।

मुख्य बातें

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को 27 जुलाई को लोकसभा में पेश किया गया, लेकिन विपक्षी हंगामे के कारण बहस नहीं हो सकी।
सदन को दिन में तीन बार स्थगित किया गया; अंतिम स्थगन शाम 5 बजे तक के लिए था।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधेयक पर चर्चा के लिए 6 घंटे या उससे अधिक समय देने का प्रस्ताव रखा।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से सहयोगियों को बहस में भाग लेने के लिए राजी करने का आग्रह किया।
स्पीकर ने सभी दलों को शाम 5 बजे तक आम सहमति बनाने का समय दिया ताकि उसी दिन बहस शुरू हो सके।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 27 जुलाई 2026 को सदन में विपक्षी सांसदों से आग्रह किया कि वे नारेबाजी छोड़कर बहस में भाग लें, और स्पष्ट किया कि 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के लिए समय 6 घंटे या उससे अधिक तक बढ़ाया जा सकता है। लगातार हंगामे के कारण यह दिन का तीसरा स्थगन था और सदन को शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक सदन में पेश किए जाने के तुरंत बाद विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी और प्लेकार्ड प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे सदन में कोई ठोस चर्चा नहीं हो सकी। यह दिन का पहला, दूसरा और फिर तीसरा स्थगन बना।

स्पीकर बिरला ने सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, 'नारेबाजी और प्लेकार्ड दिखाने से इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी। मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि सदन में अपने विचार और राय रखने के लिए समय को छह घंटे या उससे भी अधिक बढ़ाएँ, ताकि हर कोई आपकी राय सुन सके और देश के छात्र, जो इस मुद्दे पर नज़र रखे हुए हैं, उन्हें प्रभावी कार्रवाई का भरोसा मिल सके।'

सरकार की प्रतिक्रिया

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पीकर द्वारा समय विस्तार की पेशकश का स्वागत किया और सवाल उठाया कि जब कई विपक्षी सांसदों ने स्वयं संशोधन नोटिस दिए हैं, तो वे चर्चा क्यों रोक रहे हैं।

रिजिजू ने कहा, 'एक तरफ तो इतने सारे संशोधन नोटिस हैं, आपने काफी समय देने की इच्छा भी जताई है — तो फिर वे चर्चा रोकने के लिए नारे क्यों लगा रहे हैं? मुझे यह समझ नहीं आ रहा।' उन्होंने कांग्रेस से विशेष रूप से आग्रह किया कि वह अपने सहयोगियों को बहस में भाग लेने के लिए राजी करे।

रिजिजू ने यह भी तर्क दिया कि देशभर के छात्र संसद की कार्यवाही पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और चर्चा में देरी से परीक्षा सुधार के प्रति संसद की प्रतिबद्धता को लेकर 'बहुत गलत संदेश' जाएगा।

स्पीकर की सर्वदलीय अपील

सदन स्थगित करने से पहले स्पीकर बिरला ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से आपस में चर्चा कर आम सहमति बनाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, 'मैं सभी प्रमुख दलों के सदस्यों से आग्रह करता हूँ कि वे आपस में और चर्चा करें और आम सहमति बनाएँ। इसलिए, मैं आपको आज तीन घंटे और दे रहा हूँ। सरकार और सभी को शाम 5 बजे तक आम सहमति बनानी होगी ताकि शाम 5 बजे इस बिल पर चर्चा हो सके।'

आम जनता पर असर

यह विधेयक पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया गया है — एक ऐसा मुद्दा जो हाल के वर्षों में देशभर में लाखों परीक्षार्थियों को प्रभावित कर चुका है। गौरतलब है कि यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब बड़े पैमाने पर परीक्षा अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन और न्यायिक जाँच की माँगें उठती रही हैं।

विपक्ष की नारेबाजी से बहस टलने पर छात्र संगठनों और अभिभावकों में निराशा देखी जा रही है, जो इस कानून को जल्द पारित होते देखना चाहते हैं।

क्या होगा आगे

सभी दलों को शाम 5 बजे तक आम सहमति बनानी थी ताकि उसी दिन विधेयक पर बहस शुरू हो सके। यदि सहमति बनती है तो स्पीकर ने 6 घंटे या उससे अधिक समय देने का आश्वासन दिया है, जो संसदीय परंपरा में एक उल्लेखनीय प्रस्ताव है। विधेयक का भविष्य अब सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच होने वाली अनौपचारिक वार्ता पर निर्भर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही बहस रोक रहे हैं। पेपर लीक का मुद्दा लाखों छात्रों की ज़िंदगी से जुड़ा है और इस पर संसदीय चर्चा की माँग लंबे समय से उठ रही थी। स्पीकर का 6 घंटे का प्रस्ताव असाधारण है, पर यह तभी सार्थक होगा जब सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों सदन की ज़िम्मेदारी को दलीय रणनीति से ऊपर रखें। मुख्यधारा की कवरेज हंगामे पर केंद्रित है, जबकि असली सवाल यह है कि विधेयक में क्या प्रावधान हैं और वे पिछले कानून से किस तरह अलग हैं — यह चर्चा अभी भी नदारद है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के उपयोग पर कड़ी रोक लगाने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन करने हेतु लाया गया है। इसे 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में पेश किया गया, हालाँकि विपक्षी हंगामे के कारण उसी दिन बहस नहीं हो सकी।
लोकसभा में 27 जुलाई को सदन बार-बार क्यों स्थगित हुआ?
विपक्षी सांसदों ने पेपर लीक विरोधी विधेयक पेश होते ही नारेबाजी और प्लेकार्ड प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे सदन में कोई ठोस चर्चा संभव नहीं हो सकी। इस कारण दिन में तीन बार सदन को स्थगित करना पड़ा।
स्पीकर ओम बिरला ने बहस के बारे में क्या कहा?
स्पीकर बिरला ने विपक्षी सांसदों से नारेबाजी छोड़कर सदन में अपने विचार रखने का आग्रह किया और स्पष्ट किया कि विधेयक पर चर्चा के लिए समय 6 घंटे या उससे भी अधिक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने सभी दलों को शाम 5 बजे तक आम सहमति बनाने का समय भी दिया।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से क्या कहा?
रिजिजू ने सवाल उठाया कि जब विपक्षी सांसदों ने खुद संशोधन नोटिस दिए हैं तो वे बहस क्यों रोक रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस से विशेष रूप से अपील की कि वह अपने सहयोगियों को बहस में भाग लेने के लिए राजी करे और कहा कि चर्चा में देरी से छात्रों को 'बहुत गलत संदेश' जाएगा।
इस विधेयक का देश के छात्रों पर क्या असर होगा?
यह विधेयक पेपर लीक और परीक्षा में धाँधली पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से है, जो हाल के वर्षों में लाखों परीक्षार्थियों को नुकसान पहुँचा चुकी है। स्पीकर और संसदीय कार्य मंत्री दोनों ने कहा कि देशभर के छात्र इस कार्यवाही पर नज़र रखे हुए हैं और जल्द बहस व पारित होने की उम्मीद कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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