एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026: जितेंद्र सिंह बोले — अब 5 महीने में मिलेगी सज़ा, स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेगा
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में 28 जुलाई 2026 को पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इसका मकसद पेपर लीक, संगठित परीक्षा घोटालों और अन्य अनुचित गतिविधियों पर पहले से कहीं अधिक कड़ाई से अंकुश लगाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार लाखों छात्रों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने देगी।
विधेयक की पृष्ठभूमि
जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह विधेयक पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में संशोधन के लिए लाया गया है। 2024 का मूल कानून परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और शुचिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था, जिसे जून 2024 में लागू किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद सरकार यह संशोधन लेकर आई है ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूर्णतः रोक लगाई जा सके।
गौरतलब है कि 1992 में एक समिति ने केंद्रीय परीक्षा समिति बनाने की सिफारिश की थी और 2010 में एक अन्य समिति ने भी यही सुझाव दोहराया, लेकिन तत्कालीन सरकारों ने इन्हें लागू नहीं किया। मंत्री के अनुसार, वर्तमान सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) का गठन किया और पहली बार इस विषय पर व्यापक कानून बनाया।
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट — मुख्य प्रावधान
जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस संशोधन का सबसे अहम प्रावधान स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना है। इसके तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों की जाँच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद ट्रायल कोर्ट में तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया जाएगा — यानी घटना से लेकर सज़ा तक अधिकतम पाँच महीने का समय निर्धारित किया गया है।
इसके अतिरिक्त, यदि कोई पक्ष फैसले के विरुद्ध अपील करना चाहे तो उसे 30 दिनों के भीतर अपील दायर करनी होगी। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि ऐसे मामलों की सुनवाई हाईकोर्ट में डबल बेंच से नहीं होगी। मंत्री ने यह भी बताया कि विधेयक पेश होने के साथ ही कानून मंत्रालय ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विशेषज्ञ समितियों की भूमिका
नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन्हें इस संशोधन में समाहित किया गया है। इसके अलावा राधाकृष्णन समिति की कुल 46 सिफारिशों में से 35 सिफारिशें सरकार पहले ही लागू कर चुकी है, शेष पर काम जारी है।
विपक्ष पर सरकार का पलटवार
जितेंद्र सिंह ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर निशाना साधते हुए कहा कि 2009 के रेलवे भर्ती परीक्षा पेपर लीक से लेकर 2012 के एम्स प्रवेश परीक्षा पेपर लीक तक कई बड़े मामले कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सामने आए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रही हैं — अलग-अलग राज्यों और परीक्षाओं में पहले भी ऐसे मामले सामने आते रहे, लेकिन उस समय इतनी सख्त कार्रवाई नहीं होती थी।
आगे क्या होगा
विधेयक पर लोकसभा में चर्चा जारी है। सरकार को उम्मीद है कि इसके प्रावधानों पर व्यापक सहमति बनेगी, क्योंकि यह कानून करोड़ों प्रतियोगी छात्रों के हितों की रक्षा और परीक्षा प्रणाली में जनविश्वास बहाल करने के लिए लाया गया है। स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है, जो इस कानून की क्रियान्वयन गति का संकेत देती है।