27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026: भाजपा सांसदों ने बताया ऐतिहासिक, पेपर लीक दोषियों पर सख्त कार्रवाई का संकल्प

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026: भाजपा सांसदों ने बताया ऐतिहासिक, पेपर लीक दोषियों पर सख्त कार्रवाई का संकल्प

सारांश

संसद के मॉनसून सत्र में पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026 पर BJP सांसदों ने एकजुट होकर इसे ऐतिहासिक बताया। पेपर लीक दोषियों पर सख्ती, हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता — ये तीन स्तंभ इस बिल की नींव हैं।

मुख्य बातें

संसद के मॉनसून सत्र 2026 में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पेश किया गया।
BJP सांसद तरुण चुघ ने बताया कि सरकार ने परीक्षा सुधार के लिए हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है।
BJP सांसद लहर सिंह सिरोया ने कहा — केवल कानून नहीं, उसका प्रभावी क्रियान्वयन और सामाजिक जागरूकता भी जरूरी।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने अन्य राज्यों की पेपर लीक घटनाओं पर भी समान चर्चा की माँग की।
BJP सांसद मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।

संसद के मॉनसून सत्र में 27 जुलाई 2026 को पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसदों ने इसे देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने वाला ऐतिहासिक कदम करार दिया। सांसदों ने एकमत से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

BJP सांसद तरुण चुघ ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जिन लोगों ने छह दशकों तक देश पर शासन किया, उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले दो कार्यकालों से लगातार बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए काम कर रहे हैं।

चुघ ने यह भी बताया कि सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।

सांसदों की प्रतिक्रिया

BJP सांसद राहुल सिन्हा ने इस संशोधन बिल को भविष्य में पेपर लीक रोकने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस बिल का विरोध करने के नए-नए तरीके तलाश रहा है और सदन की कार्यवाही बाधित करना चाहता है।

BJP सांसद जगदंबिका पाल ने परीक्षा सुधारों को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि नीट परीक्षा प्रणाली तथा शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर संसद में गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार ने युवाओं की चिंताओं को हमेशा प्राथमिकता दी है।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने कहा कि संसद में परीक्षा लीक मामलों की जाँच प्रक्रिया और शिक्षा व्यवस्था में सुधार सहित सभी मुद्दों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पेपर लीक का मुद्दा उठाया जा रहा है, तो अन्य राज्यों में हुई ऐसी घटनाओं पर भी समान रूप से विचार होना चाहिए।

कानून और सामाजिक जागरूकता दोनों जरूरी

BJP सांसद लहर सिंह सिरोया ने स्पष्ट किया कि परीक्षा में छात्रों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए, लेकिन पेपर लीक और अनियमितताओं में लिप्त असामाजिक तत्वों पर सख्त कदम उठाना अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा — उसका प्रभावी क्रियान्वयन और समाज की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है।

विपक्ष पर आरोप

BJP सांसद मदन राठौड़ ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर सदन में व्यवधान पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है और वह छात्रों के प्रदर्शन से लेकर अन्य आंदोलनों का सहारा लेकर सरकार पर हमला करती रहती है। राठौड़ ने कांग्रेस नेतृत्व पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में स्पष्ट दिशा और निर्णय क्षमता का अभाव है।

आगे क्या होगा

यह बिल ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए हैं। गौरतलब है कि हाई पावर्ड टास्क फोर्स के गठन और इस संशोधन बिल के माध्यम से सरकार एक व्यापक सुधार ढाँचा तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। संसद में इस बिल पर आगे की चर्चा और मतदान के बाद ही इसके क्रियान्वयन की रूपरेखा स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि केवल नीतिगत पहल। असली सवाल यह है कि हाई पावर्ड टास्क फोर्स के पास स्वतंत्र जाँच का अधिकार होगा या नहीं, और क्या दोषियों की जवाबदेही केंद्र व राज्य दोनों स्तरों पर समान रूप से तय होगी। विपक्ष पर व्यवधान का आरोप लगाना सुविधाजनक है, लेकिन यह उस मूल प्रश्न को नहीं टालता कि पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा एजेंसियों की निगरानी में कहाँ चूक हुई। बिना पारदर्शी क्रियान्वयन तंत्र के यह बिल भी पिछले कानूनी प्रावधानों की तरह कागज़ों तक सीमित रहने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल 2026 क्या है?
यह संसद के मॉनसून सत्र 2026 में पेश किया गया संशोधन बिल है, जिसका उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को रोकना तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। सरकार ने इसके साथ एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स के गठन की भी घोषणा की है।
इस बिल के तहत पेपर लीक दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी?
BJP सांसदों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट संकल्प है कि पेपर लीक या परीक्षा अनियमितताओं में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। बिल में असामाजिक तत्वों के विरुद्ध सख्त कदम उठाने का प्रावधान है, जबकि छात्रों को इससे अलग रखा गया है।
हाई पावर्ड टास्क फोर्स का क्या काम होगा?
BJP सांसद तरुण चुघ के अनुसार, इस टास्क फोर्स का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाना है। हालाँकि इसके अधिकार क्षेत्र और कार्यप्रणाली का विस्तृत ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
विपक्ष ने इस बिल पर क्या रुख अपनाया है?
BJP सांसद राहुल सिन्हा और मदन राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस बिल का विरोध करने के नए तरीके तलाश रही है और सदन की कार्यवाही बाधित करना चाहती है। विपक्ष की ओर से स्वतंत्र रोजगार सत्यापन और जाँच तंत्र की माँग उठाई जा रही है।
क्या यह बिल केवल केंद्रीय परीक्षाओं पर लागू होगा?
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने संसद में माँग की है कि विभिन्न राज्यों में हुई पेपर लीक घटनाओं पर भी समान रूप से चर्चा हो। बिल के दायरे और राज्यों पर इसके प्रभाव का विवरण संसदीय चर्चा के बाद स्पष्ट होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 घंटे पहले
  3. 2 घंटे पहले
  4. 2 घंटे पहले
  5. 2 घंटे पहले
  6. 14 घंटे पहले
  7. कल
  8. 2 दिन पहले