पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026 संसद में पास, अमित शाह बोले — परीक्षा माफिया को मिलेगी सख्त सजा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 30 जुलाई 2026 को संसद में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' के पारित होने को देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम करार दिया। यह विधेयक पेपर लीक, नकल और परीक्षा में धांधली जैसी गंभीर समस्याओं पर लगाम लगाने के लिए कड़े दंड और फास्ट-ट्रैक न्याय तंत्र का प्रावधान करता है।
बिल में क्या है खास
नए संशोधन विधेयक में पेपर लीक, नकल और परीक्षा प्रक्रिया से छेड़छाड़ को रोकने के लिए कठोर दंड के प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत समयबद्ध जाँच, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और आवश्यकता पड़ने पर विशेष एसटीएफ (STF) के गठन की व्यवस्था शामिल है। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन को भी अनिवार्य किया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में NEET, SSC और विभिन्न राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों के विश्वास को गहरी चोट पहुँचाई थी। गौरतलब है कि यह विधेयक 2024 में लाए गए मूल कानून का संशोधित और अधिक सशक्त रूप है।
अमित शाह की प्रतिक्रिया
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, "मोदी सरकार ने आज संसद में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026' पास करके हमारे छात्रों का भविष्य सुरक्षित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है।" शाह ने यह भी कहा कि मेरिट-आधारित व्यवस्था की निष्पक्षता से छेड़छाड़ करने वालों को सख्त से सख्त सजा देने के प्रावधानों के ज़रिए यह कानून यह सुनिश्चित करेगा कि युवा अपने सपनों को पूरा कर सकें।
शिवराज सिंह चौहान का बयान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में विधेयक के पारित होने पर कहा, "आज 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' के पारित होने से पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली को नई मजबूती मिली है।" उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम बताते हुए कहा कि यह परीक्षा प्रणाली को भ्रष्टाचार और पेपर लीक के भय से मुक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।
चौहान ने यह भी रेखांकित किया कि लंबे समय से छात्र और अभिभावक पेपर लीक और धांधली की घटनाओं से परेशान थे, और इस नए कानून से परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा फिर से बहाल होगा।
आम छात्रों पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो यह उन लाखों छात्रों के लिए राहत की खबर होगी जो ईमानदारी से तैयारी करते हैं लेकिन परीक्षा-माफिया के कारण अवसर से वंचित रह जाते हैं। बायोमेट्रिक सत्यापन और एसटीएफ जैसे प्रावधान परीक्षा केंद्रों पर निगरानी को पहले से कहीं अधिक कड़ा बनाएंगे।
आगे क्या होगा
संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि कानून के क्रियान्वयन के लिए नियम और दिशानिर्देश शीघ्र जारी किए जाएंगे। इस कानून की असली परीक्षा इसके अमल में होगी — विशेषकर उन राज्यों में जहाँ परीक्षा-माफिया के नेटवर्क गहरे जड़ें जमाए हुए हैं।