31 जुलाई 2026
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पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026 संसद में पास, अमित शाह बोले — परीक्षा माफिया को मिलेगी सख्त सजा

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पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026 संसद में पास, अमित शाह बोले — परीक्षा माफिया को मिलेगी सख्त सजा

सारांश

संसद ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पास किया — पेपर लीक और परीक्षा माफिया पर अब फास्ट-ट्रैक कोर्ट, विशेष एसटीएफ और बायोमेट्रिक सत्यापन का शिकंजा कसेगा। गृह मंत्री अमित शाह ने इसे करोड़ों ईमानदार छात्रों के सपनों की सुरक्षा का कवच बताया।

मुख्य बातें

संसद ने 30 जुलाई 2026 को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पारित किया।
बिल में फास्ट-ट्रैक कोर्ट , विशेष एसटीएफ और बायोमेट्रिक सत्यापन के प्रावधान शामिल हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर इसे छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे PM नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम कहा।
विधेयक अब राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, इसके बाद नियम और दिशानिर्देश जारी होंगे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 30 जुलाई 2026 को संसद में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' के पारित होने को देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम करार दिया। यह विधेयक पेपर लीक, नकल और परीक्षा में धांधली जैसी गंभीर समस्याओं पर लगाम लगाने के लिए कड़े दंड और फास्ट-ट्रैक न्याय तंत्र का प्रावधान करता है।

बिल में क्या है खास

नए संशोधन विधेयक में पेपर लीक, नकल और परीक्षा प्रक्रिया से छेड़छाड़ को रोकने के लिए कठोर दंड के प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत समयबद्ध जाँच, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और आवश्यकता पड़ने पर विशेष एसटीएफ (STF) के गठन की व्यवस्था शामिल है। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन को भी अनिवार्य किया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में NEET, SSC और विभिन्न राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों के विश्वास को गहरी चोट पहुँचाई थी। गौरतलब है कि यह विधेयक 2024 में लाए गए मूल कानून का संशोधित और अधिक सशक्त रूप है।

अमित शाह की प्रतिक्रिया

गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, "मोदी सरकार ने आज संसद में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026' पास करके हमारे छात्रों का भविष्य सुरक्षित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है।" शाह ने यह भी कहा कि मेरिट-आधारित व्यवस्था की निष्पक्षता से छेड़छाड़ करने वालों को सख्त से सख्त सजा देने के प्रावधानों के ज़रिए यह कानून यह सुनिश्चित करेगा कि युवा अपने सपनों को पूरा कर सकें।

शिवराज सिंह चौहान का बयान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में विधेयक के पारित होने पर कहा, "आज 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' के पारित होने से पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली को नई मजबूती मिली है।" उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम बताते हुए कहा कि यह परीक्षा प्रणाली को भ्रष्टाचार और पेपर लीक के भय से मुक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।

चौहान ने यह भी रेखांकित किया कि लंबे समय से छात्र और अभिभावक पेपर लीक और धांधली की घटनाओं से परेशान थे, और इस नए कानून से परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा फिर से बहाल होगा।

आम छात्रों पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो यह उन लाखों छात्रों के लिए राहत की खबर होगी जो ईमानदारी से तैयारी करते हैं लेकिन परीक्षा-माफिया के कारण अवसर से वंचित रह जाते हैं। बायोमेट्रिक सत्यापन और एसटीएफ जैसे प्रावधान परीक्षा केंद्रों पर निगरानी को पहले से कहीं अधिक कड़ा बनाएंगे।

आगे क्या होगा

संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार की ओर से संकेत दिए गए हैं कि कानून के क्रियान्वयन के लिए नियम और दिशानिर्देश शीघ्र जारी किए जाएंगे। इस कानून की असली परीक्षा इसके अमल में होगी — विशेषकर उन राज्यों में जहाँ परीक्षा-माफिया के नेटवर्क गहरे जड़ें जमाए हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है। भारत में पेपर लीक की जड़ें परीक्षा-संचालन एजेंसियों की संरचनात्मक कमज़ोरियों और राज्य स्तरीय भ्रष्टाचार में हैं, जिन्हें केवल केंद्रीय कानून से नहीं मिटाया जा सकता। एसटीएफ और फास्ट-ट्रैक कोर्ट जैसे प्रावधान तभी प्रभावी होंगे जब राज्य सरकारें सहयोग करें और अभियोजन दर बढ़े। बिना स्वतंत्र निगरानी तंत्र और सार्वजनिक जवाबदेही के, यह कानून भी पिछले अनेक 'ऐतिहासिक' शिक्षा सुधारों की तरह कागज़ों तक सीमित रहने का जोखिम रखता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल 2026 क्या है?
यह 30 जुलाई 2026 को संसद में पारित वह विधेयक है जो सार्वजनिक प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित साधनों को रोकने के लिए कड़े दंड, फास्ट-ट्रैक कोर्ट, विशेष एसटीएफ और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसे उपाय लागू करता है। यह 2024 के मूल कानून का संशोधित और अधिक सशक्त रूप है।
इस बिल में दोषियों के लिए क्या सजा का प्रावधान है?
बिल में कठोर दंड के प्रावधान हैं जिनमें समयबद्ध जाँच और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के माध्यम से त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। गंभीर मामलों में विशेष एसटीएफ के गठन का भी प्रावधान है, हालांकि सजा की विस्तृत धाराएँ नियम अधिसूचना के बाद स्पष्ट होंगी।
बायोमेट्रिक सत्यापन से परीक्षाओं में क्या बदलेगा?
बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य होने से परीक्षा केंद्रों पर फर्जी परीक्षार्थियों की पहचान तत्काल संभव होगी और प्रतिरूपण (impersonation) की घटनाओं पर लगाम लगेगी। यह परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की दिशा में एक तकनीकी कदम है।
अमित शाह ने इस बिल के बारे में क्या कहा?
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यह कानून मेरिट-आधारित व्यवस्था से छेड़छाड़ करने वालों को सख्त सजा देगा और यह सुनिश्चित करेगा कि युवा अपने सपने पूरे कर सकें। उन्होंने इसे सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने का सबसे मजबूत उपाय बताया।
यह कानून कब से लागू होगा और आगे की प्रक्रिया क्या है?
संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद सरकार क्रियान्वयन के नियम और दिशानिर्देश जारी करेगी, जिनकी घोषणा शीघ्र होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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