30 जुलाई 2026
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एंटी पेपर लीक बिल संसद से पास: राज्यसभा की मंजूरी, ₹10 करोड़ जुर्माना और फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रावधान

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एंटी पेपर लीक बिल संसद से पास: राज्यसभा की मंजूरी, ₹10 करोड़ जुर्माना और फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रावधान

सारांश

नकल माफिया पर नकेल कसने के लिए संसद ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। पेपर लीक विरोधी संशोधन विधेयक दोनों सदनों से पास हो गया है — ₹10 करोड़ जुर्माना, फास्ट-ट्रैक अदालतें और सख्त सज़ा के प्रावधान के साथ। अब राष्ट्रपति की मुहर ही इसे कानून बनाने के लिए काफी है।

मुख्य बातें

राज्यसभा ने 30 जुलाई 2026 को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' पारित किया; लोकसभा इसे एक दिन पहले सात घंटे की बहस के बाद पास कर चुकी थी।
संशोधित कानून में आर्थिक दंड ₹10 करोड़ तक बढ़ाया गया और फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतों का प्रावधान किया गया।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2024 के मूल कानून के बाद से 52 एफआईआर दर्ज हुई हैं और पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्याओं में कमी आई है।
सरकार ने नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में टास्क फोर्स और गड़बड़ी वाली परीक्षाओं को तत्काल रद्द करने का उल्लेख किया।
विपक्ष ने NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए व्यापक ढाँचागत सुधार और अधिक जवाबदेही की माँग की।
अब विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून बनेगा।

संसद ने 30 जुलाई 2026 को 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक' को दोनों सदनों से पारित करा लिया। राज्यसभा ने गुरुवार को इस विधेयक पर मुहर लगाई, जबकि लोकसभा इसे एक दिन पहले लगभग सात घंटे की बहस के बाद पास कर चुकी थी। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद कानून का रूप लेगा।

विधेयक में क्या है खास

संशोधित कानून में आर्थिक दंड को बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दिया गया है। इसके साथ ही पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष (फास्ट-ट्रैक) अदालतें गठित करने और तय समय-सीमा के भीतर मुकदमे निपटाने का प्रावधान किया गया है। सरकार का तर्क है कि ये बदलाव नकल माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए अनिवार्य हैं।

सरकार का पक्ष

विधेयक को सदन में पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2024 के मूल कानून के लागू होने के बाद से अब तक 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्याओं की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि ये संशोधन पिछले अनुभवों से सीखकर तैयार किए गए हैं। सत्ता पक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार ने पूर्व शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार किया, नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स बनाई और गड़बड़ी वाली परीक्षाओं को तत्काल रद्द कर दोबारा आयोजित करने का निर्णय लिया।

विपक्ष की आपत्तियाँ

उच्च सदन में बहस के दौरान विपक्षी सदस्यों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। आलोचकों का कहना है कि महज़ दंड बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी — ज़रूरत व्यापक ढाँचागत सुधारों और परीक्षा-संचालन एजेंसियों की अधिक जवाबदेही की है। विपक्ष ने स्वतंत्र सत्यापन तंत्र की माँग भी दोहराई।

आम परीक्षार्थियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में लाखों युवा सरकारी नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि NEET और UGC-NET जैसी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने 2024 में बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन को जन्म दिया था। नया कानून परीक्षा प्रक्रिया में विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आगे क्या होगा

दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार से उम्मीद है कि राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलते ही संशोधनों को शीघ्र अधिसूचित किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन की गति ही इस कानून की वास्तविक प्रभावशीलता तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या NTA जैसी एजेंसियों की संरचनात्मक कमज़ोरियों को बिना छुए महज़ दंड बढ़ाने से पेपर लीक की जड़ें खत्म होंगी। 2024 का मूल कानून भी कड़े प्रावधानों के साथ आया था, फिर भी NEET और UGC-NET विवाद सामने आए। विपक्ष की जवाबदेही की माँग को खारिज करने की बजाय सरकार को स्वतंत्र सत्यापन तंत्र पर ठोस जवाब देना होगा — वरना यह कानून भी उन घोषणाओं की सूची में शामिल हो जाएगा जिन्होंने सुर्खियाँ तो बटोरीं, पर परीक्षार्थियों का भरोसा नहीं जीत सकीं।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक क्या है?
यह 2024 के मूल पेपर लीक विरोधी कानून में संशोधन करने वाला विधेयक है, जिसे 30 जुलाई 2026 को राज्यसभा ने पारित किया। इसमें आर्थिक दंड को बढ़ाकर ₹10 करोड़ करना, फास्ट-ट्रैक विशेष अदालतें बनाना और तय समय-सीमा में मुकदमे निपटाना शामिल है।
नए कानून में पेपर लीक पर कितना जुर्माना लगेगा?
संशोधित कानून के तहत पेपर लीक के दोषियों पर ₹10 करोड़ तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा। इसके अलावा जेल की सज़ा और फास्ट-ट्रैक अदालतों में त्वरित सुनवाई का भी प्रावधान है।
2024 के मूल कानून का अब तक क्या असर रहा?
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के अनुसार, 2024 का मूल कानून लागू होने के बाद से 52 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्याओं की घटनाओं में कमी आई है। हालाँकि विपक्ष का कहना है कि इस दौरान भी बड़े पेपर लीक सामने आए।
विपक्ष ने इस विधेयक पर क्या आपत्तियाँ जताई हैं?
विपक्षी सदस्यों ने NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि केवल जुर्माना बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने परीक्षा-संचालन एजेंसियों में व्यापक ढाँचागत सुधार और स्वतंत्र जवाबदेही तंत्र की माँग की।
यह विधेयक कब कानून बनेगा?
दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही सरकार इसे अधिसूचित कर कानून का दर्जा देगी, जो जल्द होने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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