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पेपर लीक पर केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला: 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने वाले संशोधन बिल को मंजूरी

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पेपर लीक पर केंद्रीय कैबिनेट का बड़ा फैसला: 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने वाले संशोधन बिल को मंजूरी

सारांश

पेपर लीक पर सरकार की सबसे कड़ी कार्रवाई — केंद्रीय कैबिनेट ने संगठित मामलों में 10 साल जेल और ₹10 करोड़ जुर्माने वाले संशोधन बिल को मंजूरी दी। यह फैसला PM मोदी के वादे के कुछ घंटों बाद आया और अगले सप्ताह संसद में पेश होगा।

मुख्य बातें

केंद्रीय कैबिनेट ने 24 जुलाई को 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' में संशोधन को मंजूरी दी।
संगठित पेपर लीक मामलों में 10 साल तक जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव।
व्यक्तिगत अपराधियों के लिए न्यूनतम 5 साल की जेल का प्रावधान।
वर्तमान कानून में संगठित अपराधों पर न्यूनतम ₹1 करोड़ जुर्माना था — नया प्रस्ताव इसे 10 गुना तक बढ़ाता है।
PM मोदी ने 22 लाख से अधिक छात्रों के हितों की रक्षा का हवाला देते हुए सख्त कदम का वादा किया था।
बिल अगले सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा, जहाँ फास्ट-ट्रैक ट्रायल के प्रावधानों पर और विवरण आने की संभावना।

केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार, 24 जुलाई को प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' में संशोधन को मंजूरी दे दी। इस ड्राफ्ट बिल में संगठित पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। यह फैसला उसी दिन आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा का वादा किया था।

कैबिनेट बैठक और मंजूरी का विवरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में संसद भवन परिसर में हुई कैबिनेट बैठक में यह संशोधन पारित किया गया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन प्रावधानों का उद्देश्य उन अनुचित साधनों पर कड़ी रोक लगाना है जिनकी वजह से बार-बार राष्ट्रीय परीक्षाएँ बाधित हुई हैं और लाखों छात्रों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देशभर में पेपर लीक को लेकर छात्रों और अभिभावकों में व्यापक आक्रोश है, और कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएँ विवादों में घिरी रही हैं।

नए कानून में क्या बदला

मंजूर किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, पेपर लीक में शामिल व्यक्तियों को कम से कम 5 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान होगा। संगठित रूप से पेपर लीक करने या नकल माफिया से जुड़े मामलों में सजा 10 साल तक और जुर्माना अधिकतम ₹10 करोड़ तक हो सकता है।

वर्तमान कानून की तुलना में यह उल्लेखनीय वृद्धि है — मौजूदा प्रावधानों के तहत व्यक्तिगत अपराधियों के लिए 3 से 5 वर्ष की सजा और संगठित अपराधों के लिए 5 से 10 वर्ष तक कारावास तथा न्यूनतम ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान था। नए संशोधन आर्थिक दंड को कई गुना बढ़ाते हैं और बार-बार या बड़े पैमाने पर अपराध करने वालों के लिए और कड़ी सजा सुनिश्चित करते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी का बयान और पृष्ठभूमि

अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान के तुरंत बाद आया जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार 22 लाख से अधिक छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित करने और नतीजे घोषित करने के बाद चुप नहीं बैठेगी। यह ऐसे समय में है जब NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के आरोपों ने पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस छेड़ दी है।

यह भी उल्लेखनीय है कि यह तीसरी बड़ी विधायी कोशिश है जो परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है — पिछले प्रयासों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे।

आम जनता और छात्रों पर असर

प्रस्तावित संशोधन से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत होने और छात्रों व अभिभावकों का भरोसा बहाल होने की उम्मीद जताई जा रही है। फास्ट-ट्रैक ट्रायल के प्रावधानों से मामलों के त्वरित निपटारे की संभावना बनेगी, जो अब तक वर्षों तक लंबित रहते थे।

आगे क्या होगा

अगले सप्ताह जब यह बिल संसद में पेश किया जाएगा, तब फास्ट-ट्रैक ट्रायल के प्रावधानों समेत और विवरण सामने आने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि कानून की असली परीक्षा उसके क्रियान्वयन में होगी — विशेषकर जाँच एजेंसियों की क्षमता और न्यायिक बुनियादी ढाँचे के संदर्भ में।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि जाँच एजेंसियों की क्षमता और न्यायिक बुनियादी ढाँचा अभी भी कमज़ोर बना हुआ है। पिछले वर्षों में भी कई राज्यों ने सख्त कानून बनाए, फिर भी लीक की घटनाएँ नहीं रुकीं — जो यह संकेत देता है कि समस्या केवल दंड की कमी नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली की संरचनात्मक कमज़ोरियों में है। फास्ट-ट्रैक अदालतों के प्रावधान का क्रियान्वयन और स्वतंत्र निगरानी तंत्र की स्थापना ही इस कानून को कागज़ से ज़मीन पर उतारेगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक पर कौन-सा बिल मंजूर किया?
केंद्रीय कैबिनेट ने 24 जुलाई को 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024' में संशोधन को मंजूरी दी। इसमें संगठित पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक जेल और ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रस्ताव है।
नए कानून में पेपर लीक के लिए क्या सजा होगी?
नए प्रावधानों के तहत व्यक्तिगत अपराधियों को कम से कम 5 साल की जेल होगी। संगठित या बड़े पैमाने पर पेपर लीक के मामलों में 10 साल तक कारावास और अधिकतम ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रस्ताव है।
मौजूदा कानून और नए बिल में क्या फर्क है?
वर्तमान कानून में संगठित अपराधों पर न्यूनतम ₹1 करोड़ जुर्माना और 5 से 10 साल की सजा का प्रावधान था। नया बिल आर्थिक दंड को ₹10 करोड़ तक बढ़ाता है और बार-बार अपराध करने वालों के लिए और कड़ी सजा सुनिश्चित करता है।
यह बिल संसद में कब पेश होगा?
अधिकारियों के अनुसार यह बिल अगले सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा। तब फास्ट-ट्रैक ट्रायल के प्रावधानों समेत और विवरण सामने आने की संभावना है।
इस कानून से छात्रों को क्या फायदा होगा?
प्रस्तावित संशोधन से परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता मजबूत होने और छात्रों व अभिभावकों का भरोसा बहाल होने की उम्मीद है। फास्ट-ट्रैक ट्रायल के प्रावधान से मामलों का त्वरित निपटारा संभव होगा, जिससे दोषियों को जल्द सजा मिल सकेगी और भविष्य में पेपर लीक की आशंका कम होगी।
राष्ट्र प्रेस
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