लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 लोकसभा में पेश, सजा 5 से 10 साल और जुर्माना ₹50 लाख तक
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया। यह विधेयक 2024 के मूल अधिनियम को और कठोर बनाने के उद्देश्य से लाया गया है, जिसमें सजा की अवधि बढ़ाने, फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने और जुर्माने की सीमा कई गुना बढ़ाने का प्रस्ताव है। हाल के वर्षों में प्रश्न-पत्र लीक और संगठित परीक्षा गड़बड़ियों की बढ़ती घटनाओं की पृष्ठभूमि में यह कदम उठाया गया है।
विधेयक में क्या बदला
अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले परीक्षार्थियों के लिए न्यूनतम कारावास 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष करने का प्रस्ताव है। साथ ही अधिकतम जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख किया जाएगा।
परीक्षा संचालन से जुड़े सेवा प्रदाताओं पर अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ होगा और उन्हें सार्वजनिक परीक्षाएँ आयोजित करने से प्रतिबंधित करने की अवधि 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष की जाएगी। सेवा प्रदाताओं के प्रबंधकीय कर्मियों के लिए भी न्यूनतम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की सजा के साथ ₹5 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।
संगठित परीक्षा अपराधों के मामलों में न्यूनतम सजा 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष, अधिकतम 10 वर्ष और जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ तक करने का प्रस्ताव है।
फास्ट-ट्रैक न्याय का ढाँचा
विधेयक में नई धारा 12क जोड़ी जाएगी, जिसके तहत जाँच दो माह के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। सत्र न्यायालयों को विशेष फास्ट-ट्रैक अदालत के रूप में नामित किया जाएगा, जहाँ दैनिक सुनवाई होगी और आरोप पत्र दाखिल होने के तीन माह के भीतर सुनवाई पूरी करना आवश्यक होगा। प्रत्येक ऐसी अदालत के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किए जाएँगे।
नई धारा 12ख के अनुसार, फास्ट-ट्रैक अदालत के किसी भी निर्णय के विरुद्ध अपील 30 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में की जा सकेगी और यथासंभव तीन माह में उसका निपटान होगा। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार को अधिनियम के तहत अपराधों की जाँच विशेष कार्य बल (STF) को सौंपने का अधिकार भी दिया जाएगा।
मूल अधिनियम की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को 12 फरवरी 2024 को अधिनियमित और 21 जून 2024 से प्रभावी किया गया था। यह अधिनियम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) समेत केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित सभी परीक्षा प्राधिकरणों पर लागू होता है।
इस अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-मुआवजा योग्य हैं, जिनमें कारावास, जुर्माना और संपत्ति जब्त करने के प्रावधान हैं। यह ऐसे समय में आया है जब NEET-UG और अन्य केंद्रीय परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में आक्रोश रहा है।
किसे होगा फायदा
प्रस्तावित संशोधन प्रश्न-पत्र लीक, किसी अन्य व्यक्ति की जगह परीक्षा देने और संगठित नकल जैसे अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए बनाए गए हैं। सरकार का तर्क है कि कड़े दंड और त्वरित न्याय से योग्य और मेधावी उम्मीदवारों के हितों की रक्षा होगी और लोक परीक्षा प्रणाली में जनता का भरोसा बहाल होगा।
यह विधेयक आगे संसदीय प्रक्रिया से गुजरेगा और इसके पारित होने के बाद देश की परीक्षा व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत होने की उम्मीद है।