राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026: सजा 10 साल, जुर्माना ₹50 लाख तक का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को गुरुवार को पेश किया जाएगा। सदन के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 30 जुलाई को सदन को सूचित किया कि लोकसभा से पारित इस विधेयक को राज्यसभा में विचार और पारित कराने के लिए कार्य संचालन नियमों के नियम 123 के तहत छूट प्रदान की गई है। इसके अनुरूप अनुपूरक कार्यसूची भी जारी कर दी गई है।
विधेयक कौन पेश करेगा
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह राज्यसभा में यह संशोधन विधेयक प्रस्तुत करेंगे। विधेयक में त्वरित जाँच, विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से शीघ्र सुनवाई, अपीलों का समयबद्ध निपटारा और कठोर दंड प्रावधानों की व्यवस्था की गई है।
मुख्य दंड प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन के अंतर्गत परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने वालों के लिए न्यूनतम 5 वर्ष की सजा का प्रावधान है, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा अधिकतम जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख करने का प्रस्ताव है — यानी पाँच गुना वृद्धि।
संशोधन प्रस्तावों की प्रक्रिया
सभापति राधाकृष्णन ने बताया कि लोकसभा से पारित विधेयक की प्रति मंगलवार अपराह्न लगभग 3 बजकर 30 मिनट पर राज्यसभा सदस्यों के पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई गई थी। सदस्यों के पास अध्ययन के लिए कम समय को देखते हुए विशेष व्यवस्था की गई — जो सदस्य संशोधन प्रस्ताव देना चाहते थे, उन्हें गुरुवार दोपहर तक सचिवालय को प्रस्ताव सौंपने का अवसर दिया गया। गुरुवार दोपहर तक प्राप्त सभी संशोधन प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं।
विधेयक की पृष्ठभूमि
हाल के वर्षों में प्रश्न-पत्र लीक और परीक्षाओं से जुड़ी संगठित गड़बड़ियों की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर ये संशोधन लाए गए हैं। गौरतलब है कि NEET और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं ने देशभर में व्यापक विरोध और न्यायिक हस्तक्षेप की माँग को जन्म दिया था। प्रस्तावित प्रावधान परीक्षा प्रणाली में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने और लोक परीक्षाओं की शुचिता बहाल करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।
आगे की राह
इस घोषणा के साथ राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा और उसे पारित कराने की संसदीय प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सदन में पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून का रूप लेगा।