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राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026: सजा 10 साल, जुर्माना ₹50 लाख तक का प्रस्ताव

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राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026: सजा 10 साल, जुर्माना ₹50 लाख तक का प्रस्ताव

सारांश

प्रश्न-पत्र लीक और परीक्षा घोटालों पर लगाम लगाने के लिए लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 राज्यसभा में गुरुवार को पेश होगा। सजा 10 साल और जुर्माना ₹50 लाख तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। नियम 123 के तहत विशेष छूट देकर संसदीय प्रक्रिया तेज की गई।

मुख्य बातें

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 राज्यसभा में गुरुवार को पेश किया जाएगा।
विधेयक को नियम 123 के तहत विशेष छूट दी गई है; अनुपूरक कार्यसूची जारी।
जितेंद्र सिंह सदन में विधेयक प्रस्तुत करेंगे।
प्रस्तावित सजा: न्यूनतम 5 वर्ष , अधिकतम 10 वर्ष ; जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख ।
विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के ज़रिए त्वरित सुनवाई और अपीलों का समयबद्ध निपटारा।
गुरुवार दोपहर तक प्राप्त सभी संशोधन प्रस्ताव सचिवालय ने स्वीकृत किए।

राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को गुरुवार को पेश किया जाएगा। सदन के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 30 जुलाई को सदन को सूचित किया कि लोकसभा से पारित इस विधेयक को राज्यसभा में विचार और पारित कराने के लिए कार्य संचालन नियमों के नियम 123 के तहत छूट प्रदान की गई है। इसके अनुरूप अनुपूरक कार्यसूची भी जारी कर दी गई है।

विधेयक कौन पेश करेगा

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह राज्यसभा में यह संशोधन विधेयक प्रस्तुत करेंगे। विधेयक में त्वरित जाँच, विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के माध्यम से शीघ्र सुनवाई, अपीलों का समयबद्ध निपटारा और कठोर दंड प्रावधानों की व्यवस्था की गई है।

मुख्य दंड प्रावधान

प्रस्तावित संशोधन के अंतर्गत परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने वालों के लिए न्यूनतम 5 वर्ष की सजा का प्रावधान है, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा अधिकतम जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख करने का प्रस्ताव है — यानी पाँच गुना वृद्धि।

संशोधन प्रस्तावों की प्रक्रिया

सभापति राधाकृष्णन ने बताया कि लोकसभा से पारित विधेयक की प्रति मंगलवार अपराह्न लगभग 3 बजकर 30 मिनट पर राज्यसभा सदस्यों के पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई गई थी। सदस्यों के पास अध्ययन के लिए कम समय को देखते हुए विशेष व्यवस्था की गई — जो सदस्य संशोधन प्रस्ताव देना चाहते थे, उन्हें गुरुवार दोपहर तक सचिवालय को प्रस्ताव सौंपने का अवसर दिया गया। गुरुवार दोपहर तक प्राप्त सभी संशोधन प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं।

विधेयक की पृष्ठभूमि

हाल के वर्षों में प्रश्न-पत्र लीक और परीक्षाओं से जुड़ी संगठित गड़बड़ियों की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर ये संशोधन लाए गए हैं। गौरतलब है कि NEET और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं ने देशभर में व्यापक विरोध और न्यायिक हस्तक्षेप की माँग को जन्म दिया था। प्रस्तावित प्रावधान परीक्षा प्रणाली में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने और लोक परीक्षाओं की शुचिता बहाल करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।

आगे की राह

इस घोषणा के साथ राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा और उसे पारित कराने की संसदीय प्रक्रिया का मार्ग प्रशस्त हो गया है। सदन में पारित होने के बाद यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद यह कानून का रूप लेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर असली परीक्षा यह होगी कि फास्ट-ट्रैक अदालतें कितनी तेज़ी से काम करती हैं — NEET विवाद के बाद भी कई मामले न्यायालयों में लंबित हैं। बिना मज़बूत जाँच एजेंसी और डिजिटल परीक्षा सुधारों के, केवल सज़ा बढ़ाने से प्रश्न-पत्र लीक की जड़ें नहीं कटेंगी।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में धोखाधड़ी, प्रश्न-पत्र लीक और संगठित गड़बड़ियों पर कठोर दंड लागू करने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन करता है। इसमें न्यूनतम 5 वर्ष से अधिकतम 10 वर्ष की जेल और ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।
राज्यसभा में यह विधेयक कब पेश होगा?
विधेयक गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 30 जुलाई को इसकी घोषणा की और नियम 123 के तहत विशेष छूट देते हुए अनुपूरक कार्यसूची जारी की।
नियम 123 के तहत छूट क्यों दी गई?
नियम 123 के तहत छूट इसलिए दी गई ताकि लोकसभा से पारित इस विधेयक को राज्यसभा में बिना सामान्य प्रतीक्षा अवधि के शीघ्र विचार और पारित किया जा सके। सदस्यों को विधेयक का अध्ययन करने के लिए अपेक्षाकृत कम समय मिला था, इसलिए संशोधन प्रस्ताव देने की विशेष व्यवस्था भी की गई।
इस विधेयक से परीक्षार्थियों और संस्थाओं पर क्या असर पड़ेगा?
परीक्षा में अनुचित साधन अपनाने वाले अभ्यर्थियों को पहले से कहीं अधिक कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा। फास्ट-ट्रैक अदालतों के ज़रिए मामलों का शीघ्र निपटारा होगा, जिससे परीक्षा संचालन संस्थाओं की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
यह विधेयक क्यों लाया गया?
हाल के वर्षों में NEET सहित कई सार्वजनिक परीक्षाओं में प्रश्न-पत्र लीक और संगठित धांधली की घटनाएँ सामने आईं, जिनसे लाखों ईमानदार परीक्षार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ। इन घटनाओं के बाद देशव्यापी विरोध और न्यायिक हस्तक्षेप की माँग उठी, जिसके जवाब में यह संशोधन विधेयक तैयार किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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