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लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026: सजा 10 साल तक, जुर्माना ₹10 करोड़ तक, फास्ट ट्रैक अदालतें

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लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026: सजा 10 साल तक, जुर्माना ₹10 करोड़ तक, फास्ट ट्रैक अदालतें

सारांश

परीक्षा माफिया पर केंद्र का सबसे कड़ा प्रहार — लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 में सजा 10 साल तक, जुर्माना ₹10 करोड़ तक और 2 महीने में जांच पूरी करने की बाध्यता। NEET-NET विवाद के बाद यह कानूनी ढाँचे की सबसे बड़ी मजबूती है।

मुख्य बातें

जितेंद्र सिंह ने 17 जुलाई 2026 को लोक सभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया।
अनुचित साधन अपनाने पर कारावास 3-5 वर्ष से बढ़ाकर 5-10 वर्ष और जुर्माना ₹10 लाख से ₹50 लाख तक।
संगठित परीक्षा अपराध में जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़कर ₹10 करोड़ , सजा 7-10 वर्ष ।
सेवा प्रदाताओं पर प्रतिबंध अवधि 4 वर्ष से 8 वर्ष ; जुर्माना ₹5 करोड़ तक।
नई धारा 12क के तहत 2 माह में जांच, 3 माह में सुनवाई और विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें अनिवार्य।
केंद्र सरकार को जांच विशेष कार्य बल (STF) को सौंपने का अधिकार।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार, 17 जुलाई 2026 को लोक सभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया। यह विधेयक 2024 के मूल अधिनियम को और सख्त बनाने के लिए लाया गया है, जिसमें परीक्षा माफिया पर नकेल कसने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें, त्वरित जांच और कड़े दंड प्रावधान शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब हाल के वर्षों में प्रश्न-पत्र लीक और संगठित परीक्षा गड़बड़ियों की घटनाओं ने सार्वजनिक भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सजा और जुर्माने में बड़ा इजाफा

विधेयक में अनुचित साधनों का उपयोग करने वाले अभ्यर्थियों के लिए कारावास की न्यूनतम सजा 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष और अधिकतम 5 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही अधिकतम जुर्माना ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख किया जाएगा।

संगठित परीक्षा अपराधों के मामलों में न्यूनतम सजा 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष (अधिकतम 10 वर्ष तक) और जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने का प्रस्ताव है — यह इस विधेयक का सबसे कठोर प्रावधान है।

सेवा प्रदाताओं पर शिकंजा

परीक्षा संचालन में शामिल सेवा प्रदाताओं के लिए अधिकतम जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ किया जाएगा। साथ ही, परीक्षा आयोजन से प्रतिबंध की अवधि 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष की जाएगी। सेवा प्रदाताओं के प्रबंधकीय कर्मियों को भी 5 से 10 वर्ष के कारावास और ₹5 करोड़ तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

फास्ट ट्रैक अदालतें और त्वरित जांच

विधेयक में नई धारा 12क जोड़ने का प्रस्ताव है, जिसके तहत जांच 2 माह के भीतर पूरी करनी होगी। सत्र न्यायालयों को विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के रूप में नामित किया जाएगा, जहाँ दैनिक सुनवाई होगी। आरोप पत्र दाखिल होने की तारीख से 3 माह के भीतर सुनवाई पूरी करना अनिवार्य होगा। प्रत्येक ऐसी अदालत के लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का भी प्रावधान है।

धारा 12ख के तहत फास्ट ट्रैक अदालत के किसी निर्णय के विरुद्ध अपील 30 दिनों के भीतर उच्च न्यायालय में की जा सकेगी और जहाँ संभव हो, उसका निपटान 3 माह में होना चाहिए।

विशेष कार्य बल को जांच का अधिकार

विधेयक केंद्र सरकार को यह शक्ति देता है कि वह इस अधिनियम के तहत अपराधों की जांच विशेष रूप से गठित कार्य बल (Special Task Force) को सौंप सके। यह प्रावधान परीक्षा माफिया के अंतरराज्यीय नेटवर्क से निपटने के लिए केंद्रीकृत जांच तंत्र सुनिश्चित करेगा।

आगे की राह

गौरतलब है कि NEET-UG और NET जैसी परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बाद 2024 में मूल कानून बनाया गया था, लेकिन आलोचकों का कहना है कि उसके दंड प्रावधान पर्याप्त नहीं थे। यह संशोधन उसी खामी को दूर करने का प्रयास है। विधेयक के लोक सभा में पारित होने के बाद राज्य सभा की मंजूरी आवश्यक होगी, जिसके बाद यह कानून का रूप लेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या जांच तंत्र उतना ही मजबूत है — क्योंकि NEET-NET विवाद में देखा गया कि गड़बड़ी पकड़ने में नहीं, बल्कि समय पर कार्रवाई में चूक हुई थी। फास्ट ट्रैक अदालतें तभी कारगर होंगी जब उनके लिए पर्याप्त न्यायिक संसाधन आवंटित हों — जो अभी तक विधेयक में स्पष्ट नहीं है। विशेष कार्य बल का प्रावधान सराहनीय है, लेकिन राज्य पुलिस के साथ समन्वय का ढाँचा तय किए बिना यह कागज़ी रह सकता है। कानून की कठोरता तभी अर्थपूर्ण होगी जब सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही तय करने वाला स्वतंत्र ऑडिट तंत्र भी साथ हो।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह विधेयक 2024 के लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम को और सख्त बनाने के लिए 17 जुलाई 2026 को लोक सभा में पेश किया गया। इसमें कड़ी सजा, फास्ट ट्रैक अदालतें और विशेष कार्य बल के प्रावधान शामिल हैं।
इस विधेयक में परीक्षा में धोखाधड़ी पर क्या सजा है?
अनुचित साधन अपनाने पर अब न्यूनतम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की जेल और ₹50 लाख तक जुर्माने का प्रस्ताव है। संगठित अपराध के मामलों में यह सजा 7 से 10 वर्ष और जुर्माना ₹10 करोड़ तक हो सकता है।
फास्ट ट्रैक अदालतें कैसे काम करेंगी?
नई धारा 12क के तहत जांच 2 माह में पूरी होगी और आरोप पत्र दाखिल होने के 3 माह के भीतर सुनवाई समाप्त करना अनिवार्य होगा। सत्र न्यायालयों को विशेष फास्ट ट्रैक अदालत के रूप में नामित किया जाएगा और प्रत्येक के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त होंगे।
परीक्षा सेवा प्रदाताओं पर क्या असर पड़ेगा?
दोषी सेवा प्रदाताओं पर जुर्माना ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ और परीक्षा आयोजन से प्रतिबंध की अवधि 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष की जाएगी। उनके प्रबंधकीय कर्मियों को भी 5-10 वर्ष कारावास और ₹5 करोड़ जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
यह विधेयक 2024 के मूल कानून से कैसे अलग है?
2024 का मूल अधिनियम परीक्षा में अनुचित साधनों को दंडनीय बनाता था, लेकिन आलोचकों के अनुसार उसके दंड प्रावधान और जांच समयसीमा अपर्याप्त थी। 2026 का संशोधन सजा दोगुनी करता है, जुर्माना 5-10 गुना बढ़ाता है और बाध्यकारी समयसीमा के साथ फास्ट ट्रैक तंत्र जोड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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