28 जुलाई 2026
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एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा में बांसुरी स्वराज बोलीं — परीक्षा माफिया को कड़ी चेतावनी

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एंटी पेपर लीक बिल पर लोकसभा में बांसुरी स्वराज बोलीं — परीक्षा माफिया को कड़ी चेतावनी

सारांश

लोकसभा में एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 पर बहस के दौरान BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने परीक्षा माफिया को सदन के सामूहिक संकल्प की कड़ी चेतावनी दी, विपक्ष से उनके अपने राज्यों के घोटालों पर जवाब माँगा, और इस कानून को छात्रों के भविष्य की रक्षा का निर्णायक कदम बताया।

मुख्य बातें

BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (संशोधन) विधेयक, 2026 का समर्थन किया।
विधेयक में जाँच के लिए केंद्र सरकार को टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार दिया गया है।
बांसुरी स्वराज ने यूपीए कार्यकाल, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और पंजाब के पेपर लीक मामलों का हवाला देकर विपक्ष पर निशाना साधा।
उन्होंने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से पूछा कि क्या उन्होंने पंजाब के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा माँगा है।
प्रधानमंत्री मोदी का मंत्र — ' डिटेक्ट, डिसाइड एंड डिलिवर ' — परीक्षा सुधार की नीति का आधार बताया गया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद बांसुरी स्वराज ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान विधेयक का पुरज़ोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महज़ एक कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य के प्रति मोदी सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का ठोस प्रमाण है।

विधेयक की अहमियत

बांसुरी स्वराज ने सदन को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि पेपर लीक एक घोर अपराध है। उन्होंने कहा, 'यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि मोदी सरकार की स्पष्ट नीयत और प्रतिबद्धता है।' उनके अनुसार, इसी सोच के आधार पर यह संशोधन विधेयक लाया गया है ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सके।

उन्होंने रेखांकित किया कि आज परीक्षा माफिया संगठित रूप से काम कर रहा है और उससे निपटने के लिए एक सुदृढ़ कानूनी ढाँचे की आवश्यकता थी। यह विधेयक न्यायिक प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को भी दूर करता है।

टास्क फोर्स और कानूनी प्रावधान

स्वयं को वकील बताते हुए बांसुरी स्वराज ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस कानून में जाँच के लिए केंद्र सरकार को टास्क फोर्स गठित करने का अधिकार दिया गया है। उन्होंने इसे एक मज़बूत और प्रभावी कानूनी व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी एवं केंद्र सरकार को बधाई दी।

विपक्ष पर तीखा प्रहार

चर्चा के दौरान बांसुरी स्वराज ने विपक्ष को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर बहस तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि पूर्वाग्रह या राजनीतिक नैरेटिव के आधार पर। जमानत के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जमानत सरकार नहीं, अदालत देती है, क्योंकि लोकतंत्र में न्यायपालिका स्वतंत्र होती है।

उन्होंने कांग्रेस (INC) और अन्य विपक्षी दलों को घेरते हुए यूपीए सरकार के कार्यकाल, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में हुए पेपर लीक एवं भर्ती घोटालों के कई मामलों का हवाला दिया। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में हाईटेक ब्लूटूथ तकनीक के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया।

बांसुरी स्वराज ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से सीधे सवाल किया कि क्या उन्होंने पंजाब के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा माँगा है। उन्होंने कहा, 'अगर यह सिद्धांतों की लड़ाई है, तो सरकार बदलते ही सिद्धांत कैसे बदल जाते हैं?'

परीक्षा माफिया को चेतावनी और आगे का रास्ता

बांसुरी स्वराज ने पेपर लीक माफियाओं को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वे इस सदन के सामूहिक संकल्प से बड़े नहीं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के मंत्र — 'डिटेक्ट, डिसाइड एंड डिलिवर' — का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में किसी भी तरह की धाँधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि वे इस विधेयक का समर्थन कर देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने में सहयोग दें।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ अक्सर राजनीतिक हस्तक्षेप की शिकायतें रही हैं। बांसुरी स्वराज ने विपक्ष-शासित राज्यों के उदाहरण तो गिनाए, लेकिन केंद्र-प्रशासित परीक्षाओं में हुई चूकों पर चर्चा से बचती रहीं — यह चूक मुख्यधारा कवरेज में भी अनदेखी रही। बिना स्वतंत्र जाँच तंत्र और समयबद्ध सज़ा के, यह कानून भी पिछले कड़े शब्दों वाले कानूनों की तरह कागज़ पर ही ताकतवर साबित हो सकता है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पब्लिक एग्जामिनेशंस (संशोधन) विधेयक, 2026 क्या है?
यह विधेयक पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित साधनों के उपयोग को रोकने के लिए मौजूदा कानून में संशोधन करता है। इसमें जाँच के लिए केंद्र सरकार को टास्क फोर्स बनाने का अधिकार दिया गया है और न्यायिक प्रक्रिया की व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के प्रावधान हैं।
बांसुरी स्वराज ने विधेयक के पक्ष में क्या तर्क दिए?
बांसुरी स्वराज ने कहा कि परीक्षा माफिया अब संगठित रूप से काम कर रहा है और उससे निपटने के लिए मज़बूत कानून ज़रूरी था। उन्होंने इसे मोदी सरकार की छात्रों के भविष्य के प्रति संवेदनशीलता का प्रमाण बताया।
बांसुरी स्वराज ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे पूर्वाग्रह और राजनीतिक नैरेटिव के आधार पर बहस कर रहे हैं। उन्होंने यूपीए कार्यकाल, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और पंजाब के पेपर लीक मामलों का हवाला देते हुए विपक्ष से उनके अपने राज्यों पर जवाब माँगा।
इस विधेयक से छात्रों को क्या फायदा होगा?
विधेयक का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है ताकि ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों को नुकसान न हो। केंद्रीय टास्क फोर्स के प्रावधान से पेपर लीक मामलों की जाँच अधिक प्रभावी और त्वरित हो सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी का 'डिटेक्ट, डिसाइड एंड डिलिवर' मंत्र क्या है?
बांसुरी स्वराज के अनुसार यह प्रधानमंत्री मोदी का परीक्षा सुधार के प्रति दृष्टिकोण है — समस्या की पहचान करो, निर्णय लो और उसे लागू करो। इसी सोच के आधार पर यह संशोधन विधेयक लाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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