एंटी पेपर लीक बिल पर विपक्ष का हमला: 'कानून नहीं, ज़मीनी अमल चाहिए' — कांग्रेस, सपा
सारांश
मुख्य बातें
संसद के दोनों सदनों से एंटी पेपर लीक बिल पारित होने के बाद 31 जुलाई को विपक्षी दलों ने एकसुर में सरकार की नीयत और क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं का कहना है कि केवल कानून बना देने से पेपर लीक की समस्या हल नहीं होगी — असली ज़रूरत प्रभावी और निष्पक्ष अमल की है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है। उनके अनुसार, 'इस कानून से कुछ होने वाला नहीं है।' उन्होंने तर्क दिया कि पेपर लीक से जुड़े कानून पहले भी मौजूद थे, लेकिन आज तक गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र तक दाखिल नहीं हुआ।
मसूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो संदेश पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने पेपर लीक के आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का वादा किया था। मसूद ने कहा, 'प्रधानमंत्री अगर यही बयान संसद में दें, तो ज़्यादा बेहतर रहेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के वीडियो बनाने से कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा।
कांग्रेस सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था को बदहाल कर दिया है।
हुसैन दलवई का सुझाव — परीक्षाएँ अलग-अलग राज्यों में हों
कांग्रेस सांसद हुसैन दलवई ने कहा कि इस प्रकार के कानूनों से कुछ हासिल नहीं होगा, क्योंकि ऐसे कानून पहले भी थे और पेपर लीक का सिलसिला नहीं रुका। उन्होंने एक ठोस सुझाव देते हुए कहा कि 'पूरे देश की परीक्षा एक ही राज्य में कराने की प्रथा बंद होनी चाहिए' और एक ऐसी प्रणाली विकसित की जाए, जिससे परीक्षाएँ अलग-अलग राज्यों में आयोजित हो सकें — इससे छात्रों को सहूलियत होगी और जोखिम भी बँटेगा।
दलवई ने राम मंदिर चंदा विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने उस मामले में भी कोई कठोर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने नई दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन का ज़िक्र किया और आरोप लगाया कि सरकार ने दमनकारी रवैया अपनाया तथा कथित तौर पर कई छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद — 'सदन में न मोदी थे, न शाह'
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि एंटी पेपर लीक बिल पर सदन में चर्चा के दौरान न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद थे और न ही गृह मंत्री अमित शाह। उनके अनुसार, यह सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाता है। प्रसाद ने कहा, 'सिर्फ कानून बना देने से काम नहीं चलेगा — अंत में वो कानून किसके हाथ में जाता है और कौन उसे लागू करता है, यह अहम है।'
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा — संजू मुखिया और सीबीआई पर सवाल
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने याद दिलाया कि 2024 में भी इसी तरह का बिल पास हुआ था, जिसके बाद नीट पेपर लीक में एक आरोपी गिरफ्तार हुआ था। उन्होंने कहा कि दो साल बाद स्थिति यह है कि संजू मुखिया आज़ादी से घूम रहे हैं और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने कहा है कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
वर्मा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जानबूझकर इस मामले में कार्रवाई से बच रही है, क्योंकि कथित तौर पर आरोपी पार्टी से जुड़े बताए जा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश पर कहा कि इंस्टाग्राम पर वीडियो बनाकर युवाओं को संबोधित करना एक 'गलतफहमी' है और देश की जनता अब पहले से कहीं अधिक जागरूक है।
आगे क्या होगा
विपक्ष की मुख्य माँग यह है कि सरकार केवल कानून बनाने की औपचारिकता से आगे बढ़कर जाँच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दे और आरोपियों के खिलाफ समयबद्ध आरोपपत्र दाखिल हों। गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद से देशभर में छात्र आंदोलन और न्यायिक जाँच की माँग उठती रही है। अब नए कानून की परीक्षा इस बात से होगी कि सरकार इसे धरातल पर कितनी तेज़ी और निष्पक्षता से लागू करती है।