31 जुलाई 2026
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एंटी पेपर लीक बिल पर विपक्ष का हमला: 'कानून नहीं, ज़मीनी अमल चाहिए' — कांग्रेस, सपा

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एंटी पेपर लीक बिल पर विपक्ष का हमला: 'कानून नहीं, ज़मीनी अमल चाहिए' — कांग्रेस, सपा

सारांश

एंटी पेपर लीक बिल संसद से पास हो गया, लेकिन विपक्ष का सवाल वही पुराना है — कानून तो 2024 में भी था, संजू मुखिया आज भी आज़ाद हैं। कांग्रेस और सपा ने एकसुर में कहा: असली लड़ाई कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर लड़नी होगी।

मुख्य बातें

एंटी पेपर लीक बिल संसद के दोनों सदनों से 31 जुलाई को पारित हुआ।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पेपर लीक मामलों में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आज तक आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ।
कांग्रेस सांसद हुसैन दलवई ने सुझाया कि परीक्षाएँ एक राज्य की बजाय अलग-अलग राज्यों में आयोजित की जाएँ।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि बिल पर चर्चा के दौरान न PM मोदी सदन में थे, न गृह मंत्री अमित शाह ।
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने कहा कि 2024 में बने कानून के बावजूद नीट पेपर लीक के आरोपी संजू मुखिया के खिलाफ CBI के पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
विपक्ष ने PM मोदी के वीडियो संदेश को संसदीय जवाबदेही का विकल्प नहीं माना।

संसद के दोनों सदनों से एंटी पेपर लीक बिल पारित होने के बाद 31 जुलाई को विपक्षी दलों ने एकसुर में सरकार की नीयत और क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं का कहना है कि केवल कानून बना देने से पेपर लीक की समस्या हल नहीं होगी — असली ज़रूरत प्रभावी और निष्पक्ष अमल की है।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि सरकार की नीयत ठीक नहीं है। उनके अनुसार, 'इस कानून से कुछ होने वाला नहीं है।' उन्होंने तर्क दिया कि पेपर लीक से जुड़े कानून पहले भी मौजूद थे, लेकिन आज तक गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र तक दाखिल नहीं हुआ।

मसूद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो संदेश पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने पेपर लीक के आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का वादा किया था। मसूद ने कहा, 'प्रधानमंत्री अगर यही बयान संसद में दें, तो ज़्यादा बेहतर रहेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के वीडियो बनाने से कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा।

कांग्रेस सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था को बदहाल कर दिया है।

हुसैन दलवई का सुझाव — परीक्षाएँ अलग-अलग राज्यों में हों

कांग्रेस सांसद हुसैन दलवई ने कहा कि इस प्रकार के कानूनों से कुछ हासिल नहीं होगा, क्योंकि ऐसे कानून पहले भी थे और पेपर लीक का सिलसिला नहीं रुका। उन्होंने एक ठोस सुझाव देते हुए कहा कि 'पूरे देश की परीक्षा एक ही राज्य में कराने की प्रथा बंद होनी चाहिए' और एक ऐसी प्रणाली विकसित की जाए, जिससे परीक्षाएँ अलग-अलग राज्यों में आयोजित हो सकें — इससे छात्रों को सहूलियत होगी और जोखिम भी बँटेगा।

दलवई ने राम मंदिर चंदा विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने उस मामले में भी कोई कठोर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने नई दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन का ज़िक्र किया और आरोप लगाया कि सरकार ने दमनकारी रवैया अपनाया तथा कथित तौर पर कई छात्रों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।

सपा सांसद अवधेश प्रसाद — 'सदन में न मोदी थे, न शाह'

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि एंटी पेपर लीक बिल पर सदन में चर्चा के दौरान न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद थे और न ही गृह मंत्री अमित शाह। उनके अनुसार, यह सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाता है। प्रसाद ने कहा, 'सिर्फ कानून बना देने से काम नहीं चलेगा — अंत में वो कानून किसके हाथ में जाता है और कौन उसे लागू करता है, यह अहम है।'

सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा — संजू मुखिया और सीबीआई पर सवाल

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने याद दिलाया कि 2024 में भी इसी तरह का बिल पास हुआ था, जिसके बाद नीट पेपर लीक में एक आरोपी गिरफ्तार हुआ था। उन्होंने कहा कि दो साल बाद स्थिति यह है कि संजू मुखिया आज़ादी से घूम रहे हैं और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने कहा है कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।

वर्मा ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जानबूझकर इस मामले में कार्रवाई से बच रही है, क्योंकि कथित तौर पर आरोपी पार्टी से जुड़े बताए जा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश पर कहा कि इंस्टाग्राम पर वीडियो बनाकर युवाओं को संबोधित करना एक 'गलतफहमी' है और देश की जनता अब पहले से कहीं अधिक जागरूक है।

आगे क्या होगा

विपक्ष की मुख्य माँग यह है कि सरकार केवल कानून बनाने की औपचारिकता से आगे बढ़कर जाँच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दे और आरोपियों के खिलाफ समयबद्ध आरोपपत्र दाखिल हों। गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद से देशभर में छात्र आंदोलन और न्यायिक जाँच की माँग उठती रही है। अब नए कानून की परीक्षा इस बात से होगी कि सरकार इसे धरातल पर कितनी तेज़ी और निष्पक्षता से लागू करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर उस पर सरकारी चुप्पी बताती है कि बहस कानून की भाषा में है, समाधान की दिशा में नहीं। जब तक जाँच एजेंसियों की स्वायत्तता और समयबद्ध अभियोजन सुनिश्चित नहीं होता, नया कानून भी पुराने की तरह शोभा की वस्तु बनकर रह सकता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एंटी पेपर लीक बिल क्या है और यह कब पास हुआ?
एंटी पेपर लीक बिल एक केंद्रीय कानून है जो परीक्षा पेपर लीक करने वालों के विरुद्ध कड़े दंड का प्रावधान करता है। यह बिल 31 जुलाई को संसद के दोनों सदनों — लोकसभा और राज्यसभा — से पारित हुआ।
विपक्ष ने एंटी पेपर लीक बिल का विरोध क्यों किया?
विपक्ष का तर्क है कि पेपर लीक रोकने के लिए कानून पहले भी मौजूद थे, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ। कांग्रेस और सपा नेताओं ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र तक दाखिल नहीं हुए, इसलिए नया कानून बिना ज़मीनी अमल के निरर्थक है।
संजू मुखिया कौन हैं और उनका नीट पेपर लीक से क्या संबंध है?
संजू मुखिया नीट-यूजी पेपर लीक विवाद में नामित आरोपी हैं। सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा के अनुसार, 2024 में कानून बनने और एक गिरफ्तारी के बाद भी CBI ने कहा है कि उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं और वे अभी तक स्वतंत्र हैं।
PM मोदी के वीडियो संदेश पर विपक्ष ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि प्रधानमंत्री को वीडियो की बजाय संसद में बयान देना चाहिए। कांग्रेस सांसद हुसैन दलवई और सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने भी कहा कि जब कानून बन चुका है, तो सोशल मीडिया वीडियो की ज़रूरत नहीं — ज़रूरत है उस कानून को लागू करने की।
परीक्षाओं के विकेंद्रीकरण का सुझाव किसने दिया और इसका क्या मतलब है?
कांग्रेस सांसद हुसैन दलवई ने सुझाया कि राष्ट्रीय परीक्षाएँ एक ही राज्य में केंद्रित करने की बजाय अलग-अलग राज्यों में आयोजित की जाएँ। इससे एकल-बिंदु विफलता का जोखिम कम होगा और छात्रों को यात्रा की परेशानी से राहत मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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