29 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एंटी-पेपर लीक बिल: सुप्रिया सुले ने की जेपीसी गठन और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एंटी-पेपर लीक बिल: सुप्रिया सुले ने की जेपीसी गठन और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग

सारांश

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर बहस के दौरान सुप्रिया सुले ने दो सीधी मांगें रखीं — जेपीसी गठन और छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता की एसआईटी जांच। उन्होंने 2024 के कानून की जल्दबाजी पर सवाल उठाए और कहा कि यह लड़ाई व्यवस्था बनाम युवाओं की आकांक्षाओं की है।

मुख्य बातें

सुप्रिया सुले ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में जेपीसी गठन और एसआईटी जांच की दोहरी मांग रखी।
लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान यह मांगें उठाई गईं।
सुले ने कहा कि 21 जून 2024 को कानून बना और 22 जून को ही समिति गठित हो गई — यह जल्दबाजी संदिग्ध है।
छगन भुजबल के बयान का हवाला देते हुए सुले ने कहा कि भाजपा के सहयोगी भी पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात कर रहे थे।
नीट पेपर लीक के बाद छात्रों की आत्महत्या और कथित पुलिस बर्बरता को सुले ने संवेदनशीलता का मुद्दा बताया।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार से संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समिति में विपक्षी सदस्यों की भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि पेपर लीक की समस्या पर एक टिकाऊ और प्रभावी कानूनी ढाँचा तैयार हो सके।

मुख्य मांगें और संसदीय बहस

सुले ने सदन में दो सूत्री मांग रखी — पहली, जेपीसी गठन और सर्वदलीय बैठक; दूसरी, देशभर में पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन। उन्होंने कहा, 'सर्वदलीय बैठक बुलाइए, हम सभी एक ही पक्ष में हैं।'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद तेजस्वी सूर्या के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने विपक्ष को 'डेलुलु' कहते हुए कहा था कि युवा उनके साथ नहीं हैं — सुले ने तीखी प्रतिक्रिया दी: 'आप भी इस भ्रम में मत रहिए कि युवा आपके साथ हैं।'

कानून की खामियों पर सवाल

सुले ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की मूल भावना की सराहना करते हुए भी प्रक्रियागत विरोधाभास उजागर किया। उन्होंने कहा, 'यह विधेयक अच्छा था, क्योंकि यह बहस करने का विषय नहीं है।' लेकिन उन्होंने यह भी पूछा कि यदि 21 जून 2024 को कानून बना और 22 जून को ही सिफारिशों के लिए समिति गठित कर दी गई, तो पहले कानून लाने की इतनी जल्दबाजी क्यों थी। उनका तर्क था कि यदि 2024 का कानून प्रभावी ढंग से लागू होता, तो जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की नौबत नहीं आती।

नीट विवाद और छात्रों की पीड़ा

नीट पेपर लीक के बाद छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा उठाते हुए सुले ने कहा कि जब बच्चों का सवाल हो तो सांसदों को संवेदनशीलता, सहानुभूति और विनम्रता के साथ बोलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नीट को लेकर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार से पर्याप्त बातचीत नहीं की गई। उन्होंने देश में बढ़ती आर्थिक असमानता और कोचिंग संस्थानों के विस्तारित कारोबार पर भी चिंता जताई।

सहयोगी दलों की आवाज़

सुले ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता छगन भुजबल के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 15 दिन पहले इस्तीफा दे देते तो विवाद इतना बड़ा नहीं होता। सुले ने कहा, 'सिर्फ मैं नहीं, बल्कि भाजपा के सहयोगी दल भी यह बात कह रहे हैं।' भुजबल ने छात्रों के प्रदर्शन को एक 'संकेत' बताया था, और सुले ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस संदेश को गंभीरता से लेगी।

आगे क्या होगा

प्रदर्शनों पर विदेशी फंडिंग के आरोपों को सुले ने सिरे से खारिज किया और कहा कि छात्र खुद इस पर मीम बना रहे थे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल के बीच नहीं, बल्कि व्यवस्था और युवाओं की आकांक्षाओं के बीच है। जेपीसी गठन और एसआईटी जांच की मांग पर सरकार का रुख अभी स्पष्ट नहीं हुआ है, और यह मुद्दा संसद के आगामी सत्रों में भी गूंजने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रक्रियागत विरोधाभास उजागर कर सरकार को घेरती हैं। असली सवाल यह है कि 2024 का कानून लागू होने के 24 घंटे के भीतर समिति क्यों बनी — यह संसदीय प्रक्रिया की गंभीर खामी है जिस पर मुख्यधारा की कवरेज पर्याप्त ध्यान नहीं देती। छगन भुजबल जैसे सत्तापक्ष के सहयोगियों का भी सुर मिलाना यह दर्शाता है कि नीट विवाद का राजनीतिक दबाव गठबंधन के भीतर भी महसूस हो रहा है। एसआईटी और जेपीसी — दोनों मांगें सरकार स्वीकार करे, इसकी संभावना फिलहाल कम दिखती है, लेकिन इनकार की कीमत चुनावी रूप से युवा मतदाताओं के बीच चुकानी पड़ सकती है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रिया सुले ने जेपीसी की मांग क्यों की?
सुप्रिया सुले का कहना है कि पेपर लीक रोकने के लिए एक मज़बूत कानून तभी बन सकता है जब विपक्ष सहित सभी हितधारकों को संयुक्त संसदीय समिति में शामिल किया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि 2024 का कानून बनाने में जल्दबाजी हुई और उसके परिणाम जंतर-मंतर के प्रदर्शनों के रूप में सामने आए।
एसआईटी जांच की मांग किस घटना के संदर्भ में की गई?
पेपर लीक विरोधी आंदोलनों के दौरान देशभर में छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई की घटनाएँ सामने आई थीं। सुले ने इन घटनाओं की पारदर्शी जांच के लिए एसआईटी गठन की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।
लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में क्या खामी बताई गई?
सुले के अनुसार, यह कानून 21 जून 2024 को बना और अगले ही दिन 22 जून को सिफारिशों के लिए समिति गठित कर दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कानून पहले से तैयार नहीं था तो इतनी जल्दी क्यों लाया गया, और यदि तैयार था तो समिति की ज़रूरत क्यों पड़ी।
तेजस्वी सूर्या और सुप्रिया सुले के बीच क्या विवाद हुआ?
BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने कहा था कि विपक्ष यह सोच रहा है कि युवा उनके साथ हैं, इससे बड़ा भ्रम नहीं हो सकता। इस पर सुले ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकारी पक्ष भी यह भ्रम न पाले कि युवा उनके साथ हैं।
छगन भुजबल का बयान इस मामले में क्यों अहम है?
छगन भुजबल ने कहा था कि यदि पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 15 दिन पहले इस्तीफा दे देते तो विवाद इतना बड़ा नहीं होता। सुले ने इस बयान को इस बात के प्रमाण के रूप में पेश किया कि भाजपा के सहयोगी दल भी नीट विवाद की जिम्मेदारी सरकार पर डाल रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 8 घंटे पहले
  3. 9 घंटे पहले
  4. 10 घंटे पहले
  5. 11 घंटे पहले
  6. 2 दिन पहले
  7. 6 दिन पहले
  8. 2 सप्ताह पहले