एंटी-पेपर लीक बिल: सुप्रिया सुले ने की जेपीसी गठन और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने 28 जुलाई 2026 को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार से संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठित करने की मांग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समिति में विपक्षी सदस्यों की भागीदारी अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि पेपर लीक की समस्या पर एक टिकाऊ और प्रभावी कानूनी ढाँचा तैयार हो सके।
मुख्य मांगें और संसदीय बहस
सुले ने सदन में दो सूत्री मांग रखी — पहली, जेपीसी गठन और सर्वदलीय बैठक; दूसरी, देशभर में पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस बर्बरता की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन। उन्होंने कहा, 'सर्वदलीय बैठक बुलाइए, हम सभी एक ही पक्ष में हैं।'
भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद तेजस्वी सूर्या के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने विपक्ष को 'डेलुलु' कहते हुए कहा था कि युवा उनके साथ नहीं हैं — सुले ने तीखी प्रतिक्रिया दी: 'आप भी इस भ्रम में मत रहिए कि युवा आपके साथ हैं।'
कानून की खामियों पर सवाल
सुले ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की मूल भावना की सराहना करते हुए भी प्रक्रियागत विरोधाभास उजागर किया। उन्होंने कहा, 'यह विधेयक अच्छा था, क्योंकि यह बहस करने का विषय नहीं है।' लेकिन उन्होंने यह भी पूछा कि यदि 21 जून 2024 को कानून बना और 22 जून को ही सिफारिशों के लिए समिति गठित कर दी गई, तो पहले कानून लाने की इतनी जल्दबाजी क्यों थी। उनका तर्क था कि यदि 2024 का कानून प्रभावी ढंग से लागू होता, तो जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की नौबत नहीं आती।
नीट विवाद और छात्रों की पीड़ा
नीट पेपर लीक के बाद छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा उठाते हुए सुले ने कहा कि जब बच्चों का सवाल हो तो सांसदों को संवेदनशीलता, सहानुभूति और विनम्रता के साथ बोलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नीट को लेकर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार से पर्याप्त बातचीत नहीं की गई। उन्होंने देश में बढ़ती आर्थिक असमानता और कोचिंग संस्थानों के विस्तारित कारोबार पर भी चिंता जताई।
सहयोगी दलों की आवाज़
सुले ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता छगन भुजबल के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान 15 दिन पहले इस्तीफा दे देते तो विवाद इतना बड़ा नहीं होता। सुले ने कहा, 'सिर्फ मैं नहीं, बल्कि भाजपा के सहयोगी दल भी यह बात कह रहे हैं।' भुजबल ने छात्रों के प्रदर्शन को एक 'संकेत' बताया था, और सुले ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस संदेश को गंभीरता से लेगी।
आगे क्या होगा
प्रदर्शनों पर विदेशी फंडिंग के आरोपों को सुले ने सिरे से खारिज किया और कहा कि छात्र खुद इस पर मीम बना रहे थे। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल के बीच नहीं, बल्कि व्यवस्था और युवाओं की आकांक्षाओं के बीच है। जेपीसी गठन और एसआईटी जांच की मांग पर सरकार का रुख अभी स्पष्ट नहीं हुआ है, और यह मुद्दा संसद के आगामी सत्रों में भी गूंजने की संभावना है।