मंगलुरु साइबर पुलिस ने म्यूल अकाउंट रैकेट का भंडाफोड़ किया: दो गिरफ्तार, 70 से अधिक बैंक खाते जब्त

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मंगलुरु साइबर पुलिस ने म्यूल अकाउंट रैकेट का भंडाफोड़ किया: दो गिरफ्तार, 70 से अधिक बैंक खाते जब्त

सारांश

मंगलुरु साइबर पुलिस ने म्यूल बैंक अकाउंट्स के बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। दो स्थानीय आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से 70 से अधिक बैंक खाते जब्त किए गए हैं। यह कार्रवाई कर्नाटक में चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है।

Key Takeaways

  • मंगलुरु साइबर पुलिस ने म्यूल अकाउंट रैकेट का भंडाफोड़ किया।
  • दो स्थानीय आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।
  • 70 से अधिक बैंक खाते जब्त किए गए हैं।
  • यह कार्रवाई कर्नाटक में चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है।
  • साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

मंगलुरु, 11 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मंगलुरु सिटी साइबर क्राइम पुलिस ने साइबर धोखाधड़ी में उपयोग किए जाने वाले म्यूल बैंक अकाउंट्स का एक बड़ा नेटवर्क ध्वस्त करते हुए दो स्थानीय आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई कर्नाटक राज्य में चल रहे एक विशेष अभियान का हिस्सा है, जिसमें म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से साइबर अपराधियों को धन हस्तांतरित करने वाले व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

इस मामले में अपराध संख्या 11/2026 के तहत मंगलुरु सिटी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धारा 308(5), 318(4), 319(2), 3(5) और आईटी एक्ट की धारा 66(सी) और 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता मोहम्मद सिनान (मंगलुरु निवासी) ने 10 मार्च 2026 को पुलिस के सामने बयान दिया कि उनके परिचित मोहम्मद अनीश और सलीथ अहमद एम ने ट्रेडिंग व्यवसाय के बहाने उनके बैंक अकाउंट में पैसे जमा करवाए, लेकिन बाद में इन अकाउंट्स का उपयोग साइबर धोखाधड़ी में किया गया।

जांच में तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल फोन डेटा के विश्लेषण से आरोपियों का पता चला। पूछताछ में पता चला कि दोनों आरोपी मंगलुरु शहर में आम नागरिकों से बैंक अकाउंट इकट्ठा करते थे और उन्हें साइबर धोखाधड़ी के लिए उपलब्ध कराते थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम मोहम्मद अनीश (30 वर्ष) और सलीथ अहमद एम. (32 वर्ष) हैं।

आरोपियों से जब्त की गई संपत्ति में 4 मोबाइल फोन, 18 डेबिट कार्ड, 17 बैंक पासबुक, 6 चेक बुक, 1,479.31 यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) और एक मारुति कंपनी की कार शामिल हैं।

आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे भारतीयों से कम कीमत पर यूएसडीटी (टेदर) खरीदते थे और वाट्सएप-टेलीग्राम के जरिए चीन में बैठे साइबर धोखाधड़ी करने वालों को अधिक कीमत पर बेच देते थे। धोखाधड़ी से प्राप्त धन चीनी अपराधी इन आरोपियों द्वारा दिए गए भारतीय बैंक अकाउंट्स में ट्रांसफर करते थे। जब किसी अकाउंट पर शिकायत होती और बैंक उसे फ्रीज कर देता, तो आरोपी नए अकाउंट इकट्ठा कर लेते थे।

जांच से पता चला कि आरोपियों ने मंगलुरु और आस-पास के क्षेत्रों में 70 से अधिक बैंक अकाउंट्स इकट्ठा किए थे, जिनमें से 37 अकाउंट्स एनसीआरपी पोर्टल पर पहले से ही रिपोर्ट हो चुके हैं। इन अकाउंट्स से संबंधित देशभर में 88 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। वित्तीय लेनदेन और आगे की जांच जारी है।

Point of View

बल्कि यह समाज में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का भी एक प्रयास है।
NationPress
11/03/2026

Frequently Asked Questions

म्यूल अकाउंट क्या होते हैं?
म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं, जिनका उपयोग साइबर अपराधियों द्वारा धोखाधड़ी के लिए किया जाता है।
मंगलुरु साइबर पुलिस ने कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया?
मंगलुरु साइबर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
क्या म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल केवल एक ही बार होता है?
नहीं, म्यूल अकाउंट्स का उपयोग कई बार किया जा सकता है और यह साइबर अपराधियों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
क्या इस मामले में कोई शिकायत दर्ज की गई थी?
हाँ, इस मामले में कई शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिनकी संख्या 88 से अधिक है।
क्या इस कार्रवाई से साइबर सुरक्षा में सुधार होगा?
हां, इस तरह की कार्रवाई से समाज में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
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