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अमित शाह का युवाओं को संदेश: समाज के लिए लक्ष्य तय करें, जीत-हार का बोझ नहीं रहेगा

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अमित शाह का युवाओं को संदेश: समाज के लिए लक्ष्य तय करें, जीत-हार का बोझ नहीं रहेगा

सारांश

अहमदाबाद में गुजरात विद्यापीठ के 72वें दीक्षांत समारोह में गृह मंत्री अमित शाह ने 900 स्नातकों को एक अलग तरह की सीख दी — लक्ष्य खुद के लिए नहीं, समाज के लिए तय करो। निजी अनुभवों और गांधी-प्रेरणा से सजा यह भाषण महज़ औपचारिकता नहीं, एक गहरा जीवन-दर्शन था।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 अगस्त 2026 को गुजरात विद्यापीठ के 72वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
समारोह में 900 छात्रों को उपाधियाँ प्रदान की गईं; राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अध्यक्षता की।
शाह ने कहा — "समाज और देश के लिए लक्ष्य तय करें, तो जीत या हार का बोझ नहीं रहेगा।" उन्होंने अपने व्यक्तिगत संघर्षों का उदाहरण देते हुए बताया कि सामाजिक उद्देश्य ने उन्हें हर कठिनाई में टिकाए रखा।
महात्मा गांधी से प्रेरणा और जीवनभर खादी पहनने के संकल्प का भी उल्लेख किया।
छात्रों से आग्रह किया कि विद्यापीठ की शिक्षा को स्नातक के बाद भी नियमित स्वाध्याय से जीवित रखें।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 अगस्त 2026 को अहमदाबाद स्थित गुजरात विद्यापीठ के 72वें दीक्षांत समारोह में स्नातक हो रहे 900 छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि महत्वाकांक्षाओं को केवल निजी या पारिवारिक लाभ तक सीमित रखना उचित नहीं — असली लक्ष्य वह होना चाहिए जो देश, समाज और वंचित वर्गों की सेवा करे। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से सफलता या असफलता का दबाव व्यक्ति को कमज़ोर नहीं कर पाता।

समारोह का आयोजन और प्रमुख उपस्थिति

यह समारोह प्राणजीवन विद्यार्थी भवन में आयोजित हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे, जबकि गुजरात के राज्यपाल एवं कुलाधिपति आचार्य देवव्रत ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। 900 स्नातकों को इस अवसर पर उपाधियाँ प्रदान की गईं।

मुख्य संदेश: लक्ष्य बड़ा हो, बोझ नहीं

शाह ने छात्रों से आग्रह किया कि वे परिसर छोड़ने से पहले एक सुनिश्चित लक्ष्य तय करें, किंतु उस लक्ष्य की सफलता या विफलता की चिंता में न उलझें। उन्होंने एक वरिष्ठ व्यक्ति का उद्धरण देते हुए कहा, "किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि कोई काम पूरा होगा या नहीं। किसी को केवल यह सोचना चाहिए कि क्या वह काम करने लायक है या नहीं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि देश और समाज पर केंद्रित लक्ष्य व्यक्ति को असफलताओं के बावजूद निरंतर कार्यशील रखता है — "अगर आप समाज और देश के लिए कोई लक्ष्य तय करते हैं, तो जीत या हार का बोझ आप पर नहीं रहेगा।"

अपने अनुभवों से दिया उदाहरण

शाह ने अपने व्यक्तिगत जीवन के कठिन दौर का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने जीवन में अनेक कठिनाइयों का सामना किया, परंतु निराशा कभी हावी नहीं हुई। उन्होंने इसका कारण यह बताया कि उनके संघर्षों का उद्देश्य कभी भी व्यक्तिगत या पारिवारिक स्वार्थ नहीं था। उन्होंने कहा कि हतोत्साहित करने की कोशिशों के बावजूद 'ईश्वर की कृपा से' वे हर लड़ाई लड़ते रहे और सफल होते रहे।

गुजरात विद्यापीठ से व्यक्तिगत जुड़ाव

शाह ने बताया कि बचपन में वे इसी संस्थान की पुस्तकालय में घंटों पढ़ा करते थे और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वे यहाँ मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करेंगे। उन्होंने महात्मा गांधी के प्रति अपनी बचपन से चली आ रही श्रद्धा का भी उल्लेख किया और बताया कि उनकी माँ गांधीजी की अनुयायी थीं। उन्होंने अपने युवाकाल में खादी बुनने और जीवनभर खादी पहनने के संकल्प की भी चर्चा की।

शिक्षा को निरंतर मार्गदर्शक बनाएँ

शाह ने छात्रों को स्मरण कराया कि गुजरात विद्यापीठ की शिक्षा — जिसमें ग्राम-केंद्रित विकास मॉडल और बुनियादी शिक्षा शामिल है — स्नातक होने के बाद भी उनके जीवन में मार्गदर्शन का स्रोत बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्र यहाँ सीखी गई बातों का नियमित अभ्यास और स्वाध्याय जारी रखते हैं, तो जीवन की राह स्वतः निकलती जाएगी। यह संदेश उन लाखों युवाओं के लिए भी प्रासंगिक है जो आज करियर और पहचान के दोराहे पर खड़े हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि BJP और गांधी विरासत के बीच की खाई अक्सर चर्चा में रहती है। युवाओं को 'सामाजिक लक्ष्य' की सीख देना प्रेरक है, लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह सवाल नहीं उठाती कि क्या नीतिगत स्तर पर युवाओं के लिए वे अवसर मौजूद हैं जो ऐसे लक्ष्यों को व्यावहारिक बना सकें। संदेश और संरचना के बीच का यह अंतर ही असली विमर्श है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने गुजरात विद्यापीठ दीक्षांत समारोह में क्या कहा?
गृह मंत्री अमित शाह ने 27 अगस्त 2026 को गुजरात विद्यापीठ के 72वें दीक्षांत समारोह में 900 छात्रों से कहा कि वे अपने लक्ष्य खुद या परिवार के लिए नहीं, बल्कि देश और समाज के लिए तय करें। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्ष्य व्यक्ति को असफलता के बावजूद आगे बढ़ते रहने की शक्ति देते हैं।
गुजरात विद्यापीठ का 72वां दीक्षांत समारोह कहाँ आयोजित हुआ?
यह समारोह अहमदाबाद स्थित प्राणजीवन विद्यार्थी भवन में आयोजित हुआ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि थे और गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।
अमित शाह ने युवाओं को सफलता-असफलता के बारे में क्या सलाह दी?
शाह ने कहा कि किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि काम पूरा होगा या नहीं — बल्कि यह सोचना चाहिए कि वह काम करने लायक है या नहीं। उन्होंने कहा कि समाज और देश के लिए तय किए गए लक्ष्य व्यक्ति को जीत-हार के बोझ से मुक्त रखते हैं।
अमित शाह का गुजरात विद्यापीठ से क्या व्यक्तिगत संबंध है?
शाह ने बताया कि वे बचपन में गुजरात विद्यापीठ की पुस्तकालय में पढ़ा करते थे। उन्होंने महात्मा गांधी से प्रेरणा और जीवनभर खादी पहनने के अपने संकल्प का भी उल्लेख किया, जो उनकी माँ की गांधीजी के प्रति आस्था से प्रेरित था।
गुजरात विद्यापीठ की शिक्षा पद्धति क्या है?
गुजरात विद्यापीठ की शिक्षा पद्धति ग्राम-केंद्रित विकास मॉडल और बुनियादी शिक्षा पर आधारित है। अमित शाह ने इसे एक ऐसी संस्था बताया जहाँ छात्रों को खुद से आगे बढ़कर समाज के बारे में सोचने की शिक्षा दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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