अमित शाह ने महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता की, जल विवाद और नशामुक्ति पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 20 अगस्त 2026 को महाबलीपुरम, तमिलनाडु में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में दक्षिण भारत के सभी प्रमुख राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। शाह ने इस अवसर पर दक्षिण भारत को देश की विकास यात्रा का 'सबसे बड़ा योगदानकर्ता' बताया और जल विवाद, कुपोषण, स्कूल ड्रॉपआउट तथा नशामुक्ति जैसे अहम मुद्दों पर सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया।
दक्षिण भारत की विकास यात्रा और तीन स्तंभ
शाह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि दक्षिण भारत की समग्र विकास यात्रा तीन मूलभूत स्तंभों पर टिकी है — उच्च साक्षरता दर, प्रशिक्षित मानव संसाधन और गहरे समुद्री तकनीकी विशेषज्ञता। उन्होंने कहा कि साहित्य, अनुसंधान एवं विकास (R&D), अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), औद्योगिक विकास और कृषि — हर क्षेत्र में दक्षिण भारत ने अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि देश के IT, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में दक्षिण भारत की भूमिका अग्रणी रही है, जिसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का प्रवाह भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। शाह ने कहा कि इनोवेशन और राजस्व सृजन के क्षेत्र में दक्षिण भारत ने जो परंपराएँ स्थापित की हैं, उनसे पूरे देश को सीख लेनी चाहिए।
क्षेत्रीय परिषद की सार्थकता और उपलब्धियाँ
गृह मंत्री ने बताया कि 2014 से 2026 के बीच क्षेत्रीय परिषद की कुल 70 बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें 1,869 मुद्दों में से 1,445 यानी लगभग 80 प्रतिशत का समाधान निकाला जा चुका है। उन्होंने तुलनात्मक आँकड़ा देते हुए कहा कि 2004 से 2014 के बीच परिषद की औसतन ढाई बैठक प्रतिवर्ष होती थीं, जबकि अब यह संख्या छह बैठक प्रतिवर्ष हो गई है।
शाह ने यह भी उल्लेख किया कि 60 वर्षों से अधिक समय से लंबित कई मुद्दों को इन्हीं बैठकों के माध्यम से सुलझाया जा चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 80वें स्वतंत्रता दिवस के संदेश का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले सात दशकों में जो नहीं हो सका, वह अगले पाँच-सात वर्षों में करना होगा।
जल विवाद और नदी-जोड़ परियोजना
बैठक में दक्षिणी राज्यों के जल विवादों पर विशेष चर्चा हुई। शाह ने कहा कि यदि ब्रह्मपुत्र से कावेरी और गोदावरी तक महानदियों को आपस में जोड़ा जाए, तो भारत में अगले 100 वर्षों तक जल संकट से बचा जा सकता है। उनके अनुसार इससे जलमार्गों (Waterways) का निर्माण भी संभव होगा, जो ईंधन की बचत, पर्यावरण सुधार और सस्ते परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अंतर-राज्य परिषद द्वारा संबंधित राज्यों के साथ संयुक्त बैठक आयोजित कर लंबित जल मुद्दों को शीघ्र हल करने पर जोर दिया। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच परिसंपत्तियों एवं देनदारियों के बँटवारे से जुड़े विवादों पर दोनों राज्यों ने गृह मंत्रालय के परामर्श से समाधान निकालने पर सहमति जताई।
कुपोषण, स्कूल ड्रॉपआउट और स्वास्थ्य पर चिंता
शाह ने स्कूल ड्रॉपआउट दर को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश का औसत स्कूल ड्रॉपआउट अनुपात 9.5 है और यदि सभी राज्य मिलकर प्रयास करें तो इसे 3 प्रतिशत से नीचे लाया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध अपराधों में फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों के प्रभावी क्रियान्वयन और नई न्याय संहिता के तहत त्वरित न्याय पर भी बल दिया।
कुपोषण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश ने इस लड़ाई की शुरुआत की थी, जिसे बाद में देशभर ने अपनाया। उन्होंने स्टंटिंग (बौनापन) को कुपोषण से भी अधिक गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों की क्षमताओं को प्रभावित कर सकती है।
नशामुक्त भारत और बैठक में उपस्थित नेता
गृह मंत्री ने 'नशामुक्त भारत' के लिए गृह मंत्रालय के तीन वर्षीय रोडमैप का उल्लेख किया और कहा कि जब तक केंद्र व राज्य सरकारों के सभी विभाग इस अभियान से नहीं जुड़ते, आने वाली पीढ़ी को नशे की बुराई से बचाना संभव नहीं होगा।
बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, पुदुचेरी के उप-राज्यपाल के. कैलाशनाथन, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के उप-राज्यपाल डी.के. जोशी, लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल पटेल और तेलंगाना के उप-मुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू उपस्थित रहे। राज्यों के मुख्य सचिव, वरिष्ठ सलाहकार और केंद्र सरकार के अधिकारी भी इस बैठक में शामिल हुए। यह बैठक केंद्र-राज्य समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।