20 अगस्त 2026
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अमित शाह की अध्यक्षता में 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद: कावेरी जल विवाद, सुरक्षा और परिसीमन पर मंथन

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अमित शाह की अध्यक्षता में 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद: कावेरी जल विवाद, सुरक्षा और परिसीमन पर मंथन

सारांश

31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक महज़ एक औपचारिक सम्मेलन नहीं थी — यह दशकों पुराने जल विवादों, सीमा तनाव और परिसीमन की राजनीति का एक साझा मंच था। अमित शाह की अध्यक्षता में पाँच दक्षिणी राज्यों के नेताओं का एक मेज़ पर आना, सहकारी संघवाद की परीक्षा भी है।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 अगस्त 2026 को कोवलम, मामल्लापुरम के निकट 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की।
तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना के मुख्यमंत्री/प्रतिनिधि उपस्थित; पुडुचेरी के मुख्यमंत्री अनुपस्थित रहे।
कावेरी और कृष्णा नदी जल बंटवारे, मेकेदातु बांध और मुल्लापेरियार बांध विवाद एजेंडे में प्रमुख रहे।
कर्नाटक सीमा के निकट तीन तमिल युवकों की गोलीबारी में मौत का मुद्दा उठाए जाने की संभावना थी।
परिसीमन का दक्षिणी राज्यों पर प्रभाव और महिलाओं व बच्चों के लिए विशेष त्वरित अदालतों का प्रस्ताव भी एजेंडे में शामिल।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 अगस्त 2026 को कोवलम, मामल्लापुरम के निकट एक होटल में 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की। इस सम्मेलन में दक्षिण भारत के पाँच राज्यों — तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और तेलंगाना — के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने अंतर्राज्यीय जल विवादों, आंतरिक सुरक्षा और विकास प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक का आयोजन और प्रमुख उपस्थिति

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने गृह मंत्री शाह का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया और कार्यवाही शुरू होने से पहले दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क उपस्थित रहे।

पुडुचेरी के मुख्यमंत्री एन. रंगासामी बैठक में अनुपस्थित रहे; उनके स्थान पर उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने केंद्र शासित प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल और लक्षद्वीप के अधिकारी भी इस सम्मेलन में शामिल हुए।

नदी जल विवाद: कावेरी, कृष्णा और मेकेदातु

परिषद की बैठक में कावेरी और कृष्णा नदियों के जल बंटवारे के दशकों पुराने विवाद पर प्रमुखता से चर्चा होने की उम्मीद थी। कर्नाटक के प्रस्तावित मेकेदातु बांध का मुद्दा और मुल्लापेरियार बांध से जुड़ी सुरक्षा चिंताएँ भी एजेंडे में शामिल बताई गईं। ये विवाद वर्षों से राज्यों के बीच तनाव का कारण रहे हैं और क्षेत्रीय परिषद जैसे मंचों पर इनके समाधान की माँग लंबे समय से उठती रही है।

सुरक्षा और सीमा विवाद

सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु द्वारा कर्नाटक सीमा के निकट हाल ही में तीन तमिल युवकों की गोलीबारी में मौत का मुद्दा भी बैठक में उठाए जाने की संभावना थी। राज्य सरकार से दोनों राज्यों के बीच बेहतर सुरक्षा समन्वय की माँग किए जाने की उम्मीद जताई गई। इसके अतिरिक्त, परिसीमन और दक्षिणी राज्यों पर इसके संभावित प्रभावों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना थी — यह मुद्दा दक्षिण भारत के राज्यों में राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।

व्यापक विकास एजेंडा

अधिकारियों के अनुसार, बैठक के एजेंडे में अंतर्राज्यीय सहयोग को सुदृढ़ करना, आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे विषय शामिल थे। महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों के मामलों के शीघ्र निपटान के लिए विशेष त्वरित अदालतों की स्थापना के प्रस्ताव पर भी विचार किए जाने की संभावना थी।

सहकारी संघवाद की दिशा में कदम

अधिकारियों ने बताया कि कोवलम बैठक का मूल उद्देश्य प्रशासनिक समन्वय को मज़बूत करना और सहकारी संघवाद की भावना को आगे बढ़ाना था। यह मंच भाग लेने वाली राज्य सरकारों को केंद्र के समक्ष अपनी-अपनी चिंताएँ रखने और वर्षों से अनसुलझे विवादों के समन्वित समाधान खोजने का अवसर देता है। अनुवर्ती कार्रवाई के लिए विभागों के बीच नियमित संवाद और संयुक्त रूप से स्वीकृत निर्णयों के त्वरित क्रियान्वयन पर ज़ोर दिया जाना था।

संपादकीय दृष्टिकोण

ये मुद्दे हर बार एजेंडे में आते हैं और हर बार अगली बैठक तक टल जाते हैं। असली सवाल यह है कि इस बार अनुवर्ती कार्रवाई के लिए जो 'व्यावहारिक तंत्र' की बात की गई, उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा। परिसीमन का मुद्दा विशेष रूप से राजनीतिक रूप से विस्फोटक है — दक्षिणी राज्य मानते हैं कि जनसंख्या नियंत्रण में उनकी सफलता ही उनकी संसदीय प्रतिनिधित्व में कमी का कारण बनेगी। जब तक केंद्र इस पर ठोस आश्वासन नहीं देता, ये बैठकें सहकारी संघवाद की तस्वीर से ज़्यादा कुछ नहीं बन पाएँगी।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक कहाँ और कब हुई?
यह बैठक 20 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के मामल्लापुरम के निकट कोवलम में आयोजित हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी अध्यक्षता की और दक्षिण भारत के पाँच राज्यों के नेता इसमें शामिल हुए।
इस बैठक में कौन-से प्रमुख विवाद एजेंडे में थे?
कावेरी और कृष्णा नदियों का जल बंटवारा विवाद, कर्नाटक का प्रस्तावित मेकेदातु बांध, मुल्लापेरियार बांध से जुड़ी सुरक्षा चिंताएँ और परिसीमन का दक्षिणी राज्यों पर प्रभाव प्रमुख मुद्दों में शामिल थे। कर्नाटक सीमा के पास तीन तमिल युवकों की गोलीबारी में मौत का मुद्दा भी उठाए जाने की संभावना थी।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद क्या होती है और इसका उद्देश्य क्या है?
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद एक संवैधानिक मंच है जो दक्षिण भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच अंतर्राज्यीय सहयोग, विवाद समाधान और नीतिगत समन्वय के लिए बनाया गया है। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री करते हैं।
इस बैठक में कौन-कौन से राज्यों के नेता शामिल हुए?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क उपस्थित रहे। पुडुचेरी के मुख्यमंत्री अनुपस्थित रहे और उनका प्रतिनिधित्व उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन ने किया।
बैठक में महिला सुरक्षा के संदर्भ में क्या प्रस्ताव था?
महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध यौन अपराधों से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटान के लिए विशेष त्वरित अदालतों की स्थापना के प्रस्ताव पर विचार किए जाने की संभावना थी। यह प्रस्ताव न्यायिक प्रक्रिया में तेज़ी लाने के व्यापक एजेंडे का हिस्सा था।
राष्ट्र प्रेस
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