मुल्लापेरियार विवाद: केरल ने नए बांध का पूरा खर्च उठाने की पेशकश की, तमिलनाडु 152 फीट जलस्तर पर अड़ा
सारांश
मुख्य बातें
महाबलीपुरम में 20 अगस्त 2026 को आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में मुल्लापेरियार विवाद एक बार फिर केंद्र में आ गया। केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने दशकों पुराने इस गतिरोध को तोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण पेशकश की — राज्य नए बांध के निर्माण की पूरी लागत स्वयं वहन करने को तैयार है। दूसरी ओर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मौजूदा जलाशय का जलस्तर 152 फीट तक बढ़ाने की अपनी पुरानी माँग दोहराई, जिससे दोनों राज्यों के मूलभूत मतभेद एक बार फिर उजागर हो गए।
बैठक में क्या हुआ
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में महाबलीपुरम में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि जन सुरक्षा के हित में मुल्लापेरियार में नया बांध बनाना अनिवार्य है। उन्होंने इसे केरल की ओर से एक बड़ी रियायत बताया। केरल ने यह भी संकेत दिया कि प्रस्तावित बांध का स्थान तमिलनाडु तय कर सकता है, जो इस विवाद की एक प्रमुख व्यावहारिक अड़चन को दूर करने का प्रयास है।
गौरतलब है कि केरल लंबे समय से यह तर्क देता आया है कि 100 वर्ष से अधिक पुराना मुल्लापेरियार बांध संरचनात्मक रूप से असुरक्षित है और निचले इलाकों में रहने वाली आबादी के लिए खतरा है। तमिलनाडु इस दावे को खारिज करते हुए मौजूदा बांध को सुरक्षित बताता रहा है।
तमिलनाडु का रुख
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बैठक में अपने स्थापित रुख से कोई पीछे नहीं हटे। उन्होंने माँग की कि मौजूदा मुल्लापेरियार जलाशय में जलस्तर 152 फीट तक बढ़ाया जाए। तमिलनाडु का तर्क है कि राज्य की सिंचाई जरूरतें इस पर निर्भर हैं और मौजूदा बांध की मरम्मत कर इसे दीर्घकालिक रूप से उपयोगी बनाया जा सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के सबसे जटिल अंतर-राज्यीय जल विवादों में से एक दशकों की कानूनी लड़ाइयों और कई दौर की बातचीत के बावजूद अनसुलझा बना हुआ है।
विवाद की पृष्ठभूमि
मुल्लापेरियार बांध 1895 में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था और यह केरल की भूमि पर स्थित है, लेकिन इसका संचालन तमिलनाडु करता है। इस बांध का पानी तमिलनाडु के पाँच जिलों — मदुरई, डिंडीगुल, थेनी, इरोड और तिरुचिरापल्ली — की सिंचाई और पेयजल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है और कई समितियाँ इस पर रिपोर्ट दे चुकी हैं, फिर भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
यह Nवीं ऐसी उच्चस्तरीय बैठक है जिसमें दोनों राज्य अपने-अपने रुख पर कायम रहे। केरल की नई वित्तीय पेशकश कुछ व्यावहारिक आपत्तियों को दूर कर सकती है, लेकिन तमिलनाडु की 152 फीट जलस्तर की माँग यह स्पष्ट करती है कि मूल मतभेद अभी भी बरकरार हैं।
आगे की राह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में दोनों पक्षों की बात सुनी गई, लेकिन किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों राज्य बांध की सुरक्षा और जल-बँटवारे के मुद्दे पर किसी मध्यस्थता-आधारित ढाँचे पर सहमत नहीं होते, तब तक यह विवाद सुलझना मुश्किल है। केरल की ताज़ा पेशकश को वार्ता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, हालाँकि इसकी स्वीकृति अभी तमिलनाडु की सहमति पर निर्भर है।