20 अगस्त 2026
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मुल्लापेरियार विवाद: केरल ने नए बांध का पूरा खर्च उठाने की पेशकश की, तमिलनाडु 152 फीट जलस्तर पर अड़ा

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मुल्लापेरियार विवाद: केरल ने नए बांध का पूरा खर्च उठाने की पेशकश की, तमिलनाडु 152 फीट जलस्तर पर अड़ा

सारांश

महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में केरल ने नए मुल्लापेरियार बांध का पूरा खर्च उठाने और स्थान चुनने का अधिकार तमिलनाडु को देने की पेशकश की — लेकिन तमिलनाडु 152 फीट जलस्तर की माँग पर अड़ा रहा। दशकों पुराना यह विवाद एक बार फिर बिना समाधान के समाप्त हुआ।

मुख्य बातें

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 20 अगस्त 2026 को महाबलीपुरम में नए मुल्लापेरियार बांध की पूरी लागत वहन करने की पेशकश की।
केरल ने प्रस्तावित बांध का स्थान चुनने का अधिकार तमिलनाडु को देने का संकेत दिया।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.
जोसेफ विजय ने मौजूदा जलाशय में जलस्तर 152 फीट तक बढ़ाने की माँग दोहराई।
बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की; कोई ठोस समझौता नहीं हुआ।
मुल्लापेरियार बांध 1895 में निर्मित है और केरल की भूमि पर स्थित है, लेकिन संचालन तमिलनाडु करता है।

महाबलीपुरम में 20 अगस्त 2026 को आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में मुल्लापेरियार विवाद एक बार फिर केंद्र में आ गया। केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने दशकों पुराने इस गतिरोध को तोड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण पेशकश की — राज्य नए बांध के निर्माण की पूरी लागत स्वयं वहन करने को तैयार है। दूसरी ओर, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मौजूदा जलाशय का जलस्तर 152 फीट तक बढ़ाने की अपनी पुरानी माँग दोहराई, जिससे दोनों राज्यों के मूलभूत मतभेद एक बार फिर उजागर हो गए।

बैठक में क्या हुआ

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में महाबलीपुरम में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि जन सुरक्षा के हित में मुल्लापेरियार में नया बांध बनाना अनिवार्य है। उन्होंने इसे केरल की ओर से एक बड़ी रियायत बताया। केरल ने यह भी संकेत दिया कि प्रस्तावित बांध का स्थान तमिलनाडु तय कर सकता है, जो इस विवाद की एक प्रमुख व्यावहारिक अड़चन को दूर करने का प्रयास है।

गौरतलब है कि केरल लंबे समय से यह तर्क देता आया है कि 100 वर्ष से अधिक पुराना मुल्लापेरियार बांध संरचनात्मक रूप से असुरक्षित है और निचले इलाकों में रहने वाली आबादी के लिए खतरा है। तमिलनाडु इस दावे को खारिज करते हुए मौजूदा बांध को सुरक्षित बताता रहा है।

तमिलनाडु का रुख

मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बैठक में अपने स्थापित रुख से कोई पीछे नहीं हटे। उन्होंने माँग की कि मौजूदा मुल्लापेरियार जलाशय में जलस्तर 152 फीट तक बढ़ाया जाए। तमिलनाडु का तर्क है कि राज्य की सिंचाई जरूरतें इस पर निर्भर हैं और मौजूदा बांध की मरम्मत कर इसे दीर्घकालिक रूप से उपयोगी बनाया जा सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारत के सबसे जटिल अंतर-राज्यीय जल विवादों में से एक दशकों की कानूनी लड़ाइयों और कई दौर की बातचीत के बावजूद अनसुलझा बना हुआ है।

विवाद की पृष्ठभूमि

मुल्लापेरियार बांध 1895 में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था और यह केरल की भूमि पर स्थित है, लेकिन इसका संचालन तमिलनाडु करता है। इस बांध का पानी तमिलनाडु के पाँच जिलों — मदुरई, डिंडीगुल, थेनी, इरोड और तिरुचिरापल्ली — की सिंचाई और पेयजल जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है और कई समितियाँ इस पर रिपोर्ट दे चुकी हैं, फिर भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

यह Nवीं ऐसी उच्चस्तरीय बैठक है जिसमें दोनों राज्य अपने-अपने रुख पर कायम रहे। केरल की नई वित्तीय पेशकश कुछ व्यावहारिक आपत्तियों को दूर कर सकती है, लेकिन तमिलनाडु की 152 फीट जलस्तर की माँग यह स्पष्ट करती है कि मूल मतभेद अभी भी बरकरार हैं।

आगे की राह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में दोनों पक्षों की बात सुनी गई, लेकिन किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों राज्य बांध की सुरक्षा और जल-बँटवारे के मुद्दे पर किसी मध्यस्थता-आधारित ढाँचे पर सहमत नहीं होते, तब तक यह विवाद सुलझना मुश्किल है। केरल की ताज़ा पेशकश को वार्ता की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, हालाँकि इसकी स्वीकृति अभी तमिलनाडु की सहमति पर निर्भर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह विवाद की जड़ को नहीं छूती। असली मतभेद तकनीकी नहीं, राजनीतिक है: तमिलनाडु के लिए जल-सुरक्षा और केरल के लिए जन-सुरक्षा — दोनों के मतदाता-आधार से जुड़े मुद्दे हैं। दशकों की अदालती लड़ाइयों और समितियों की रिपोर्टों के बावजूद यह विवाद अनसुलझा है, जो यह दर्शाता है कि बिना केंद्र की बाध्यकारी मध्यस्थता के कोई स्थायी हल संभव नहीं। अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी कोई ठोस परिणाम न निकलना यह सवाल उठाता है कि क्षेत्रीय परिषद का यह मंच वास्तव में कितना प्रभावी है।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुल्लापेरियार विवाद क्या है?
मुल्लापेरियार बांध 1895 में निर्मित एक पुरानी संरचना है जो केरल की भूमि पर स्थित है, लेकिन इसका संचालन तमिलनाडु करता है। केरल इसे सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक मानते हुए नए बांध की माँग करता है, जबकि तमिलनाडु इसे सुरक्षित बताकर जलस्तर बढ़ाने की माँग करता है।
केरल ने महाबलीपुरम बैठक में क्या नई पेशकश की?
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 20 अगस्त 2026 को दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में कहा कि केरल नए बांध की पूरी निर्माण लागत वहन करने को तैयार है। साथ ही, प्रस्तावित बांध का स्थान तमिलनाडु तय कर सकता है।
तमिलनाडु 152 फीट जलस्तर की माँग क्यों कर रहा है?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के अनुसार, राज्य के पाँच जिलों की सिंचाई और पेयजल जरूरतें मुल्लापेरियार जलाशय पर निर्भर हैं। 152 फीट जलस्तर से अधिक जल संग्रहण संभव होगा, जिससे इन जिलों की पानी की माँग पूरी हो सकेगी।
इस बैठक में कोई समझौता क्यों नहीं हुआ?
दोनों राज्यों के मूलभूत रुख परस्पर विरोधी हैं — केरल नया बांध चाहता है और तमिलनाडु मौजूदा बांध में जलस्तर बढ़ाना चाहता है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दोनों पक्षों की बात सुनी गई, लेकिन किसी बाध्यकारी निर्णय की घोषणा नहीं की गई।
मुल्लापेरियार विवाद का सर्वोच्च न्यायालय से क्या संबंध है?
यह विवाद पहले भी सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है और कई समितियाँ इस पर रिपोर्ट दे चुकी हैं। अदालती प्रक्रियाओं और बातचीत के कई दौरों के बावजूद कोई स्थायी समाधान अब तक नहीं निकला है, जिससे यह दक्षिण भारत के सबसे लंबे अंतर-राज्यीय जल विवादों में से एक बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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