मुल्लापेरियार बांध सुरक्षा समिति: केरल के नए प्रतिनिधि की मांग, एनडीएसए की प्रक्रिया पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा को लेकर जल शक्ति मंत्रालय के संसदीय जवाब ने नई बहस छेड़ दी है — राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) ने 25 जून 2026 को केरल सरकार को पत्र लिखकर व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन (सीडीएसई) समिति में राज्य का नया स्वतंत्र प्रतिनिधि नामित करने का अनुरोध किया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब केरल के एकमात्र प्रतिनिधि को बिना पूर्व सूचना के समिति से हटाए जाने पर राज्य सरकार ने तीखा विरोध दर्ज कराया था।
मुख्य घटनाक्रम
राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास के प्रश्न के उत्तर में जल शक्ति मंत्रालय ने स्वीकार किया कि एनडीएसए ने केरल को नया नाम भेजने का अनुरोध किया है। इससे पहले, केंद्रीय जल आयोग के पूर्व मुख्य अभियंता टी.के. शिवराजन — जो सीडीएसई समिति में केरल के प्रतिनिधि थे — को हटाकर उनकी जगह उत्तर प्रदेश के एक विशेषज्ञ को शामिल किया गया था। इस निर्णय ने केरल में व्यापक विरोध को जन्म दिया और एनडीएसए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे।
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि पूर्व नामित विशेषज्ञ ने समिति में कार्य जारी रखने में असमर्थता व्यक्त की थी, जिसके बाद मूल्यांकन कार्य समय पर पूरा करने के उद्देश्य से प्रतिस्थापन किया गया। हालांकि, इस स्पष्टीकरण ने विवाद को शांत करने के बजाय नए प्रश्न खड़े कर दिए।
केंद्र के जवाब पर उठे सवाल
संसद में मंत्रालय ने इस प्रमुख प्रश्न का सीधा उत्तर नहीं दिया कि क्या केरल सरकार से उसके प्रतिनिधि को हटाने से पहले कोई औपचारिक परामर्श किया गया था। 'हाँ' या 'नहीं' में जवाब देने से परहेज करते हुए मंत्रालय ने प्रक्रियागत तर्क का सहारा लिया, जिसे आलोचकों ने अपर्याप्त बताया।
इसके अतिरिक्त, विशेषज्ञ समिति में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल पर भी स्पष्टता नहीं आई। मंत्रालय ने केवल सदस्यों के नाम और उनकी पेशेवर संबद्धता का उल्लेख किया, लेकिन यह नहीं बताया कि वे किन राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं — जो बहु-राज्यीय बांध विवाद के संदर्भ में एक अहम चूक मानी जा रही है।
केरल की चिंताएँ और दाँव पर क्या है
मुल्लापेरियार बांध केरल के इडुक्की जिले में स्थित है, लेकिन इसका संचालन तमिलनाडु करता है — यह दशकों पुराना अंतर-राज्यीय विवाद है जिसमें लाखों लोगों की सुरक्षा दाँव पर है। केरल लंबे समय से नए बांध के निर्माण की माँग करता आया है, जबकि तमिलनाडु मौजूदा बांध की सुरक्षा को पर्याप्त बताता है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर सीडीएसई समिति में केरल का प्रभावी प्रतिनिधित्व राज्य के लिए अस्तित्व की बात है।
गौरतलब है कि यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन रहा है और बांध की संरचनात्मक स्थिति को लेकर विशेषज्ञों की राय विभाजित रही है। ऐसे में एनडीएसए की स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की भूमिका और उसकी निष्पक्षता दोनों पक्षों के लिए निर्णायक है।
आगे क्या होगा
अब केरल सरकार के सामने नया नाम नामित करने का अनुरोध है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करना चाहेगी कि नया प्रतिनिधि न केवल तकनीकी रूप से सक्षम हो, बल्कि समिति की कार्यवाही में केरल के हितों की प्रभावी पैरवी कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि एनडीएसए को भविष्य में बहु-राज्यीय बांध समितियों में प्रतिनिधित्व परिवर्तन से पहले संबंधित राज्यों से अनिवार्य परामर्श की प्रक्रिया स्थापित करनी चाहिए।