एनएसएस ने सीएम सतीशन पर लगाया अहंकार का आरोप, अब नहीं मांगेगी मुलाकात का वक्त
सारांश
मुख्य बातें
नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस) के महासचिव जी. सुकुमारन नायर ने 20 जून 2026 को पेरन्ना स्थित एनएसएस मुख्यालय में आयोजित वार्षिक बजट बैठक के दौरान केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन पर सीधा और तीखा हमला बोला। उन्होंने सतीशन पर अहंकार का आरोप लगाते हुए घोषणा की कि संगठन अब उनसे मुलाकात का समय नहीं माँगेगा। इस बयान ने केरल की राजनीति में हलचल मचा दी है।
क्यों भड़का एनएसएस नेतृत्व
एनएसएस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री कार्यालय से दो बार मुलाकात का समय माँगा था — एक बार इनकम टैक्स संशोधनों से जुड़ी तकनीकी समस्याओं को लेकर, और दूसरी बार पिछली वामपंथी सरकार के कार्यकाल में सौंपे गए ज्ञापन पर आगे की कार्रवाई जानने के लिए। कथित तौर पर दोनों ही बार कोई जवाब नहीं मिला, जिसे एनएसएस ने 'जानबूझकर की गई अनदेखी' करार दिया।
सुकुमारन नायर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'मुलाकात का समय पाने की दो कोशिशें की गईं, लेकिन समय नहीं दिया गया। एनएसएस अब किसी के पीछे नहीं भागेगा। पेरन्ना अब किसी के आगे हाथ नहीं जोड़ेगा।'
पुराने बयानों का हवाला
एनएसएस प्रमुख ने सतीशन के उन पुराने वक्तव्यों की भी याद दिलाई, जिनमें उन्होंने कहा था कि वे चुनावों के दौरान समर्थन पाने के लिए 'समुदाय के नेताओं के दरवाजों के चक्कर नहीं लगाएंगे।' सुकुमारन नायर ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले सतीशन स्वयं एनएसएस मुख्यालय आते थे और बैठकों का इंतजार करते थे, परंतु मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका रवैया बदल गया है।
कांग्रेस और एनएसएस के रिश्तों पर असर
गौरतलब है कि एनएसएस हिंदू नायर समुदाय का एक शक्तिशाली सामाजिक संगठन है, जो परंपरागत रूप से राजनीतिक दलों से समान दूरी बनाए रखता आया है। इस बार का खुला टकराव कांग्रेस नेतृत्व और एनएसएस के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों को और गहरा करता है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ आरंभ हो चुकी हैं।
सत्ताधारी गठबंधन के कुछ नेताओं ने भी चेतावनी दी है कि बड़े समुदाय संगठनों को नाराज करना राजनीतिक दृष्टि से नुकसानदेह साबित हो सकता है। कांग्रेस के भीतर भी इस घटनाक्रम को लेकर बेचैनी देखी जा रही है।
आगे क्या होगा
एनएसएस के इस रुख से स्पष्ट है कि संगठन अब सरकार के साथ संवाद की पहल करने की स्थिति में नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह दूरी बनी रही तो नायर समुदाय का वोट बैंक कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकता है। फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।