मुल्लापेरियार बांध सुरक्षा समिति से केरल प्रतिनिधि हटाया, सांसद जॉन ब्रिटास ने जल शक्ति मंत्री को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा जांच के लिए गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से केरल के एकमात्र प्रतिनिधि को हटाए जाने के खिलाफ कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने 22 जून को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल को पत्र लिखकर राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) के इस निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त की और मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की।
क्या है पूरा मामला
केंद्रीय जल आयोग के पूर्व मुख्य अभियंता टी.के. शिवराजन को स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से हटाकर किसी अन्य राज्य के सदस्य को उनकी जगह शामिल किया गया। डॉ. ब्रिटास के अनुसार, यह निर्णय केरल सरकार से किसी भी पूर्व परामर्श के बिना लिया गया। इससे केरल उस समिति में अपने एकमात्र प्रतिनिधित्व से वंचित हो गया, जो एक सदी से अधिक पुराने मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा का मूल्यांकन कर रही है।
गौरतलब है कि मुल्लापेरियार बांध केरल की इडुक्की ज़िले में स्थित है और इसका प्रबंधन तमिलनाडु के पास है। यह बांध दशकों से दोनों राज्यों के बीच विवाद का विषय रहा है, और इसकी संरचनात्मक सुरक्षा पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
सांसद की मुख्य आपत्तियाँ
डॉ. ब्रिटास ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा केवल दो राज्यों के बीच जल बंटवारे तक सीमित नहीं है — यह बांध के निचले इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की जान, सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा गंभीर मानवीय प्रश्न है।
उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी आपात स्थिति में केरल के निवासी सबसे अधिक प्रभावित होंगे, इसलिए उस राज्य को सुरक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी से वंचित नहीं किया जा सकता। सांसद ने इसे बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की भावना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया।
सहकारी संघवाद पर सवाल
डॉ. ब्रिटास ने आरोप लगाया कि केरल से बिना चर्चा किए प्रतिनिधि को हटाना सहकारी संघवाद की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने के बाद केवल सूचना देना परामर्श प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता। इस कदम से विशेषज्ञ समिति की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर विपक्ष शासित राज्य पहले से ही कई मुद्दों पर केंद्र सरकार से असहमति जता रहे हैं।
सांसद की माँग
डॉ. ब्रिटास ने केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल से आग्रह किया कि वे इस निर्णय पर पुनर्विचार करें और भविष्य में मुल्लापेरियार बांध से संबंधित किसी भी समिति या विशेषज्ञ निकाय में बदलाव से पहले केरल सरकार से उचित परामर्श सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार बांध सुरक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और समान प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों का पालन करेगी।
अब देखना होगा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय इस पत्र पर क्या रुख अपनाता है और क्या केरल को विशेषज्ञ समिति में पुनः प्रतिनिधित्व मिल पाता है।