9 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मुल्लापेरियार बांध सुरक्षा समिति से केरल प्रतिनिधि हटाया, सांसद जॉन ब्रिटास ने जल शक्ति मंत्री को लिखा पत्र

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मुल्लापेरियार बांध सुरक्षा समिति से केरल प्रतिनिधि हटाया, सांसद जॉन ब्रिटास ने जल शक्ति मंत्री को लिखा पत्र

सारांश

मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा जांच समिति से केरल के एकमात्र प्रतिनिधि को बिना परामर्श हटाए जाने पर सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्र को चेताया — यह सवाल सिर्फ प्रतिनिधित्व का नहीं, बल्कि लाखों लोगों की सुरक्षा और सहकारी संघवाद का है।

मुख्य बातें

सीपीआई (एम) सांसद डॉ.
जॉन ब्रिटास ने 22 जून को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर.
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) ने केरल के प्रतिनिधि टी.के.
शिवराजन को स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से हटाया।
यह निर्णय केरल सरकार से किसी पूर्व परामर्श के बिना लिया गया, जिसे सांसद ने सहकारी संघवाद के विरुद्ध बताया।
सांसद ने इसे बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ करार दिया।
ब्रिटास ने मंत्री से पुनर्विचार और भविष्य में केरल से उचित परामर्श सुनिश्चित करने की मांग की।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा जांच के लिए गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से केरल के एकमात्र प्रतिनिधि को हटाए जाने के खिलाफ कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने 22 जून को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल को पत्र लिखकर राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) के इस निर्णय पर गहरी चिंता व्यक्त की और मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की।

क्या है पूरा मामला

केंद्रीय जल आयोग के पूर्व मुख्य अभियंता टी.के. शिवराजन को स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से हटाकर किसी अन्य राज्य के सदस्य को उनकी जगह शामिल किया गया। डॉ. ब्रिटास के अनुसार, यह निर्णय केरल सरकार से किसी भी पूर्व परामर्श के बिना लिया गया। इससे केरल उस समिति में अपने एकमात्र प्रतिनिधित्व से वंचित हो गया, जो एक सदी से अधिक पुराने मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा का मूल्यांकन कर रही है।

गौरतलब है कि मुल्लापेरियार बांध केरल की इडुक्की ज़िले में स्थित है और इसका प्रबंधन तमिलनाडु के पास है। यह बांध दशकों से दोनों राज्यों के बीच विवाद का विषय रहा है, और इसकी संरचनात्मक सुरक्षा पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

सांसद की मुख्य आपत्तियाँ

डॉ. ब्रिटास ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा केवल दो राज्यों के बीच जल बंटवारे तक सीमित नहीं है — यह बांध के निचले इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों की जान, सुरक्षा और आजीविका से जुड़ा गंभीर मानवीय प्रश्न है।

उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी आपात स्थिति में केरल के निवासी सबसे अधिक प्रभावित होंगे, इसलिए उस राज्य को सुरक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी से वंचित नहीं किया जा सकता। सांसद ने इसे बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की भावना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया।

सहकारी संघवाद पर सवाल

डॉ. ब्रिटास ने आरोप लगाया कि केरल से बिना चर्चा किए प्रतिनिधि को हटाना सहकारी संघवाद की मूल भावना के विपरीत है। उन्होंने कहा कि निर्णय लेने के बाद केवल सूचना देना परामर्श प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकता। इस कदम से विशेषज्ञ समिति की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र-राज्य संबंधों को लेकर विपक्ष शासित राज्य पहले से ही कई मुद्दों पर केंद्र सरकार से असहमति जता रहे हैं।

सांसद की माँग

डॉ. ब्रिटास ने केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल से आग्रह किया कि वे इस निर्णय पर पुनर्विचार करें और भविष्य में मुल्लापेरियार बांध से संबंधित किसी भी समिति या विशेषज्ञ निकाय में बदलाव से पहले केरल सरकार से उचित परामर्श सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार बांध सुरक्षा व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए पारदर्शिता और समान प्रतिनिधित्व के सिद्धांतों का पालन करेगी।

अब देखना होगा कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय इस पत्र पर क्या रुख अपनाता है और क्या केरल को विशेषज्ञ समिति में पुनः प्रतिनिधित्व मिल पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विशेषज्ञ समिति से केरल के प्रतिनिधि को बिना सूचना हटाना एक नई और गंभीर परत जोड़ता है। जब बांध के निचले इलाकों में रहने वाले लाखों केरलवासियों की जान दांव पर हो, तो सुरक्षा मूल्यांकन में उस राज्य की अनुपस्थिति न केवल प्रक्रियागत खामी है, बल्कि विश्वास के संकट की शुरुआत भी। केंद्र सरकार के लिए यह अवसर है कि वह संघीय भावना का प्रदर्शन करे — अन्यथा यह विवाद तकनीकी से राजनीतिक मोड़ ले सकता है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुल्लापेरियार बांध सुरक्षा समिति से केरल प्रतिनिधि को क्यों हटाया गया?
राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) ने केंद्रीय जल आयोग के पूर्व मुख्य अभियंता टी.के. शिवराजन को स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से हटाकर किसी अन्य राज्य के सदस्य को शामिल किया। सांसद जॉन ब्रिटास के अनुसार, यह निर्णय केरल सरकार से किसी पूर्व परामर्श के बिना लिया गया।
सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्र से क्या मांग की है?
डॉ. जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और भविष्य में मुल्लापेरियार बांध से संबंधित किसी भी समिति में बदलाव से पहले केरल सरकार से उचित परामर्श सुनिश्चित करने की मांग की है।
मुल्लापेरियार बांध विवाद क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
मुल्लापेरियार बांध केरल के इडुक्की ज़िले में स्थित एक सदी से अधिक पुराना बांध है, जिसका प्रबंधन तमिलनाडु के पास है। यह बांध दशकों से दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे और सुरक्षा को लेकर विवाद का केंद्र रहा है, क्योंकि इसके निचले क्षेत्रों में रहने वाले लाखों केरलवासियों की सुरक्षा इससे सीधे जुड़ी है।
बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 का इस मामले से क्या संबंध है?
सांसद डॉ. ब्रिटास ने कहा कि केरल से बिना परामर्श प्रतिनिधि हटाना बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 की भावना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। यह अधिनियम बांध सुरक्षा प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले