पश्चिमी घाट ईएसए: सांसद जॉन ब्रिटास ने भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर सातवें ड्राफ्ट में केरल का संशोधित प्रस्ताव शामिल करने की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) पर जारी सातवें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में केरल सरकार के संशोधित प्रस्ताव को शामिल करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि 27 जुलाई 2026 को जारी यह नोटिफिकेशन अब भी पुराने 9,993.7 वर्ग किमी के आँकड़े पर टिका है, जबकि केरल सरकार वर्षों पहले ही अपना संशोधित और आधिकारिक प्रस्ताव केंद्र को सौंप चुकी है।
मुख्य विवाद: पुराने आँकड़े बनाम संशोधित प्रस्ताव
डॉ. ब्रिटास ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि केरल सरकार ने 2 नवंबर 2024 को ईएसए को 98 गाँवों तक सीमित करते हुए 8,590.69 वर्ग किमी तक रखने का अंतिम प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। इसके बाद 1 फरवरी 2026 को केरल ने मंत्रालय द्वारा माँगे गए अतिरिक्त विवरण भी उपलब्ध कराए, जो इसी संशोधित प्रस्ताव के समर्थन में थे। बावजूद इसके, 27 जुलाई 2026 को जारी सातवाँ ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पुराने 9,993.7 वर्ग किमी के आँकड़े पर ही आधारित रहा।
मंत्रालय के आश्वासन और चार दिन बाद जारी नोटिफिकेशन
डॉ. ब्रिटास ने पत्र में एक महत्वपूर्ण विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, पर्यावरण मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा को सूचित किया था कि ईएसए नोटिफिकेशन को अंतिम रूप देने से पहले केरल सहित पश्चिमी घाट के छह राज्यों की चिंताओं और सुझावों की योग्यता के आधार पर जाँच की जा रही है। किन्तु इस आश्वासन के ठीक चार दिन बाद ही मंत्रालय ने सातवाँ ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया, जिसमें केरल का संशोधित रुख शामिल नहीं किया गया।
केरल का प्रस्ताव किस आधार पर तैयार हुआ
सांसद ने बताया कि केरल का संशोधित प्रस्ताव बिना किसी जल्दबाजी के व्यापक वैज्ञानिक प्रक्रिया के बाद तैयार किया गया था। इसमें कैडस्ट्रल मैपिंग, जीआईएस/केएमएल विश्लेषण, सैटेलाइट इमेजिंग, फील्ड वेरिफिकेशन और स्थानीय स्व-शासन संस्थानों व वन विभाग के साथ विस्तृत परामर्श शामिल था। यह प्रक्रिया राज्य की ओर से पारदर्शिता और वैज्ञानिक सटीकता का प्रमाण है।
आम जनता पर असर: एक दशक से जारी अनिश्चितता
डॉ. ब्रिटास ने इस बात पर जोर दिया कि यह मुद्दा केवल नक्शों और मापों तक सीमित नहीं है। केरल के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लाखों लोग — किसान, बागान कर्मचारी, आदिवासी समुदाय, छोटे उद्यमी और स्थानीय स्व-शासन संस्थान — एक दशक से अधिक समय से प्रस्तावित ईएसए को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहाड़ी इलाकों के निवासी पर्यावरण संरक्षण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी माँग है कि यह संरक्षण वैज्ञानिक सटीकता, पारदर्शी निर्णय-प्रक्रिया और उनकी आजीविका के सम्मान पर आधारित हो।
सांसद की माँग और आगे की राह
डॉ. जॉन ब्रिटास ने केंद्र सरकार से दो स्पष्ट माँगें रखी हैं: पहली, केरल की आधिकारिक तौर पर मंजूर अंतिम सिफारिश — अर्थात् 8,590.69 वर्ग किमी और 98 गाँव — को सातवें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में शामिल किया जाए; और दूसरी, इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए ताकि केरल के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता का अंत हो सके। गौरतलब है कि पश्चिमी घाट ईएसए विवाद वर्षों से लंबित है और इसका सीधा असर केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र और गुजरात — छह राज्यों के लाखों निवासियों पर पड़ता है।