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पश्चिमी घाट ईएसए: सांसद जॉन ब्रिटास ने भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर सातवें ड्राफ्ट में केरल का संशोधित प्रस्ताव शामिल करने की माँग की

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पश्चिमी घाट ईएसए: सांसद जॉन ब्रिटास ने भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर सातवें ड्राफ्ट में केरल का संशोधित प्रस्ताव शामिल करने की माँग की

सारांश

सीपीआई(एम) सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर पश्चिमी घाट के सातवें ईएसए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में केरल का संशोधित 8,590.69 वर्ग किमी प्रस्ताव शामिल करने की माँग की है — जो पुराने 9,993.7 वर्ग किमी के आँकड़े पर आधारित है। एक दशक से जारी इस अनिश्चितता ने केरल के पहाड़ी इलाकों के लाखों लोगों को प्रभावित किया है।

मुख्य बातें

सीपीआई(एम) सांसद डॉ.
जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर पश्चिमी घाट ईएसए के सातवें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में बदलाव का आग्रह किया।
नोटिफिकेशन अभी भी पुराने 9,993.7 वर्ग किमी के आँकड़े पर आधारित है, जबकि केरल का संशोधित प्रस्ताव 8,590.69 वर्ग किमी और 98 गाँवों तक सीमित करने का है।
केरल ने यह संशोधित प्रस्ताव 2 नवंबर 2024 को और अतिरिक्त विवरण 1 फरवरी 2026 को केंद्र को भेजे थे।
मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा में राज्यों की चिंताओं की जाँच का आश्वासन दिया, लेकिन चार दिन बाद ही पुराने आँकड़ों पर आधारित नोटिफिकेशन जारी कर दिया।
केरल के पहाड़ी इलाकों में एक दशक से अधिक समय से किसान, आदिवासी समुदाय और स्थानीय निकाय अनिश्चितता झेल रहे हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्यसभा सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) पर जारी सातवें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में केरल सरकार के संशोधित प्रस्ताव को शामिल करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि 27 जुलाई 2026 को जारी यह नोटिफिकेशन अब भी पुराने 9,993.7 वर्ग किमी के आँकड़े पर टिका है, जबकि केरल सरकार वर्षों पहले ही अपना संशोधित और आधिकारिक प्रस्ताव केंद्र को सौंप चुकी है।

मुख्य विवाद: पुराने आँकड़े बनाम संशोधित प्रस्ताव

डॉ. ब्रिटास ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि केरल सरकार ने 2 नवंबर 2024 को ईएसए को 98 गाँवों तक सीमित करते हुए 8,590.69 वर्ग किमी तक रखने का अंतिम प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। इसके बाद 1 फरवरी 2026 को केरल ने मंत्रालय द्वारा माँगे गए अतिरिक्त विवरण भी उपलब्ध कराए, जो इसी संशोधित प्रस्ताव के समर्थन में थे। बावजूद इसके, 27 जुलाई 2026 को जारी सातवाँ ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पुराने 9,993.7 वर्ग किमी के आँकड़े पर ही आधारित रहा।

मंत्रालय के आश्वासन और चार दिन बाद जारी नोटिफिकेशन

डॉ. ब्रिटास ने पत्र में एक महत्वपूर्ण विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, पर्यावरण मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा को सूचित किया था कि ईएसए नोटिफिकेशन को अंतिम रूप देने से पहले केरल सहित पश्चिमी घाट के छह राज्यों की चिंताओं और सुझावों की योग्यता के आधार पर जाँच की जा रही है। किन्तु इस आश्वासन के ठीक चार दिन बाद ही मंत्रालय ने सातवाँ ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया, जिसमें केरल का संशोधित रुख शामिल नहीं किया गया।

केरल का प्रस्ताव किस आधार पर तैयार हुआ

सांसद ने बताया कि केरल का संशोधित प्रस्ताव बिना किसी जल्दबाजी के व्यापक वैज्ञानिक प्रक्रिया के बाद तैयार किया गया था। इसमें कैडस्ट्रल मैपिंग, जीआईएस/केएमएल विश्लेषण, सैटेलाइट इमेजिंग, फील्ड वेरिफिकेशन और स्थानीय स्व-शासन संस्थानों व वन विभाग के साथ विस्तृत परामर्श शामिल था। यह प्रक्रिया राज्य की ओर से पारदर्शिता और वैज्ञानिक सटीकता का प्रमाण है।

आम जनता पर असर: एक दशक से जारी अनिश्चितता

डॉ. ब्रिटास ने इस बात पर जोर दिया कि यह मुद्दा केवल नक्शों और मापों तक सीमित नहीं है। केरल के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लाखों लोग — किसान, बागान कर्मचारी, आदिवासी समुदाय, छोटे उद्यमी और स्थानीय स्व-शासन संस्थान — एक दशक से अधिक समय से प्रस्तावित ईएसए को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहाड़ी इलाकों के निवासी पर्यावरण संरक्षण के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी माँग है कि यह संरक्षण वैज्ञानिक सटीकता, पारदर्शी निर्णय-प्रक्रिया और उनकी आजीविका के सम्मान पर आधारित हो।

सांसद की माँग और आगे की राह

डॉ. जॉन ब्रिटास ने केंद्र सरकार से दो स्पष्ट माँगें रखी हैं: पहली, केरल की आधिकारिक तौर पर मंजूर अंतिम सिफारिश — अर्थात् 8,590.69 वर्ग किमी और 98 गाँव — को सातवें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में शामिल किया जाए; और दूसरी, इस प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए ताकि केरल के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता का अंत हो सके। गौरतलब है कि पश्चिमी घाट ईएसए विवाद वर्षों से लंबित है और इसका सीधा असर केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, गोवा, महाराष्ट्र और गुजरात — छह राज्यों के लाखों निवासियों पर पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी उसे ड्राफ्ट में जगह नहीं मिली। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र राज्यों के वैज्ञानिक इनपुट को वास्तव में नीति में शामिल करता है, या यह परामर्श महज औपचारिकता है। पश्चिमी घाट के छह राज्यों के लाखों निवासियों की आजीविका इस प्रश्न के उत्तर पर निर्भर करती है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिमी घाट ईएसए का सातवाँ ड्राफ्ट नोटिफिकेशन क्या है?
यह केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 27 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना का सातवाँ मसौदा है, जो पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ईएसए) की सीमाएँ तय करता है। यह मसौदा अभी भी 9,993.7 वर्ग किमी के पुराने आँकड़े पर आधारित है।
केरल सरकार का संशोधित ईएसए प्रस्ताव क्या है और यह पुराने प्रस्ताव से कैसे अलग है?
केरल सरकार ने 2 नवंबर 2024 को ईएसए को 98 गाँवों तक सीमित करते हुए 8,590.69 वर्ग किमी तक रखने का संशोधित प्रस्ताव केंद्र को भेजा था, जबकि सातवाँ ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पुराने 9,993.7 वर्ग किमी के आँकड़े पर आधारित है। यह प्रस्ताव कैडस्ट्रल मैपिंग, जीआईएस विश्लेषण और फील्ड वेरिफिकेशन के बाद तैयार किया गया था।
डॉ. जॉन ब्रिटास ने केंद्र सरकार से क्या माँग की है?
डॉ. ब्रिटास ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से माँग की है कि केरल की आधिकारिक रूप से मंजूर अंतिम सिफारिश — 8,590.69 वर्ग किमी और 98 गाँव — को सातवें ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में शामिल किया जाए। साथ ही उन्होंने इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया है।
इस विवाद से केरल के किन लोगों पर असर पड़ रहा है?
केरल के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले किसान, बागान कर्मचारी, आदिवासी समुदाय, छोटे उद्यमी और स्थानीय स्व-शासन संस्थान एक दशक से अधिक समय से इस अनिश्चितता से प्रभावित हैं। ईएसए की सीमाएँ तय न होने से इन क्षेत्रों में विकास और आजीविका से जुड़े फैसले अटके हुए हैं।
पर्यावरण मंत्रालय ने राज्यों की चिंताओं पर क्या कहा था?
मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा को सूचित किया था कि ईएसए नोटिफिकेशन को अंतिम रूप देने से पहले केरल सहित पश्चिमी घाट के छह राज्यों की चिंताओं और सुझावों की योग्यता के आधार पर जाँच की जा रही है। हालाँकि, इसके चार दिन बाद ही 27 जुलाई 2026 को सातवाँ ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया, जिसमें केरल का संशोधित प्रस्ताव शामिल नहीं था।
राष्ट्र प्रेस
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