केरल में सिल्वरलाइन रद्द, सतीशन सरकार ₹63,000 करोड़ की जगह नए ब्रॉड-गेज हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर विचार कर रही
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार ने बहुचर्चित और विवादित सिल्वरलाइन परियोजना को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है और अब एक वैकल्पिक ब्रॉड-गेज सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं। यह घोषणा 22 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम से सामने आई और राज्य की बुनियादी ढाँचा नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है।
सिल्वरलाइन का अंत: एक राजनीतिक वादे की परिणति
गौरतलब है कि ₹63,000 करोड़ की अनुमानित लागत वाली सिल्वरलाइन परियोजना पिछली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (CPI-M) सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी। तत्कालीन विपक्ष के नेता के रूप में वी.डी. सतीशन ने इस परियोजना के विरुद्ध केरल के सबसे व्यापक राजनीतिक आंदोलनों में से एक का नेतृत्व किया था — विधानसभा के भीतर भी और सड़कों पर भी। उन्होंने इसे आर्थिक रूप से अव्यवहारिक और पर्यावरण के लिए विनाशकारी बताते हुए UDF की सत्ता में वापसी पर इसे रद्द करने का वादा किया था।
अब जब UDF सरकार में है, तो वह वादा पूरा किया जा रहा है। राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार ने सिल्वरलाइन भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान लगाए गए लगभग 8,000 पीले सीमा पत्थर हटाने का आदेश दिया है। इन पत्थरों को लगाने में कथित तौर पर ₹1.62 करोड़ खर्च हुए थे। संबंधित भूमि मालिकों को औपचारिक रूप से सूचित किया जाएगा कि उनकी जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया रद्द कर दी गई है।
नई परियोजना की रूपरेखा
प्रस्तावित ब्रॉड-गेज कॉरिडोर तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक 580 किलोमीटर की दूरी को लगभग साढ़े चार घंटे में तय करने में सक्षम होगा, जिसमें ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलेंगी। यह कॉरिडोर यात्री सेवाओं — जिनमें वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें भी शामिल हैं — के साथ-साथ माल ढुलाई को भी संभालने में सक्षम होगा।
भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखने के लिए सरकार एलिवेटेड अलाइनमेंट (खंभों पर निर्मित ऊँचे मार्ग) के बड़े हिस्से पर विचार कर रही है। प्रस्तावित कॉरिडोर के मौजूदा रेलवे नेटवर्क से नियमित अंतराल पर जुड़ने की भी योजना है।
श्रीधरन की भूमिका और रेल मंत्रालय का सहयोग
'मेट्रो मैन' के नाम से प्रसिद्ध ई. श्रीधरन ने पहले भी सिल्वरलाइन के स्टैंडर्ड गेज मॉडल की कड़ी आलोचना की थी और भारतीय रेलवे के अनुकूल ब्रॉड गेज प्रणाली अपनाने की वकालत की थी। अधिकारियों के अनुसार, रेल मंत्रालय से मंजूरी और तकनीकी सहायता माँगने से पहले राज्य सरकार सीधे श्रीधरन से मार्गदर्शन लेगी। जल्द ही एक नया फिजिबिलिटी स्टडी (संभाव्यता अध्ययन) भी शुरू होने की उम्मीद है।
विझिंजम बंदरगाह से जुड़ाव और आर्थिक संभावनाएँ
यह ऐसे समय में आया है जब विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह की परिचालन क्षमता बढ़ रही है। प्रस्तावित कॉरिडोर में रोल-ऑन/रोल-ऑफ माल ढुलाई प्रणाली को शामिल करने की संभावना है, जो विझिंजम बंदरगाह से सीधे जुड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे केरल की कार्गो लॉजिस्टिक्स क्षमता और औद्योगिक विकास को उल्लेखनीय बढ़ावा मिल सकता है।
आगे की राह
फिलहाल यह परियोजना विचार-विमर्श के प्रारंभिक चरण में है। संभाव्यता अध्ययन के बाद ही लागत, समयसीमा और केंद्र सरकार की भागीदारी की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। यदि रेल मंत्रालय की स्वीकृति मिलती है, तो यह परियोजना केरल के परिवहन ढाँचे को एक नई दिशा दे सकती है।