8 जुलाई 2026
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केरल में सिल्वरलाइन रद्द, सतीशन सरकार ₹63,000 करोड़ की जगह नए ब्रॉड-गेज हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर विचार कर रही

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केरल में सिल्वरलाइन रद्द, सतीशन सरकार ₹63,000 करोड़ की जगह नए ब्रॉड-गेज हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर विचार कर रही

सारांश

सिल्वरलाइन के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व करने वाले वी.डी. सतीशन अब मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने वह परियोजना रद्द कर दी है। लेकिन केरल की रेल कनेक्टिविटी की ज़रूरत खत्म नहीं हुई — अब 580 किमी ब्रॉड-गेज कॉरिडोर की नई परिकल्पना सामने है, जिसमें 'मेट्रो मैन' श्रीधरन की सलाह और विझिंजम बंदरगाह से जुड़ाव की संभावना है।

मुख्य बातें

UDF सरकार ने ₹63,000 करोड़ की विवादित सिल्वरलाइन परियोजना को औपचारिक रूप से रद्द किया।
नए प्रस्ताव में तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक 580 किलोमीटर का ब्रॉड-गेज सेमी हाई-स्पीड कॉरिडोर, गति 160 किमी/घंटा , यात्रा समय लगभग साढ़े चार घंटे ।
अनिल कुमार ने सिल्वरलाइन के ~8,000 पीले सीमा पत्थर हटाने का आदेश दिया; इन पर ₹1.62 करोड़ खर्च हुए थे।
सरकार रेल मंत्रालय से संपर्क से पहले ई.
श्रीधरन से सीधे मार्गदर्शन लेगी।
नया फिजिबिलिटी स्टडी जल्द शुरू होगा; विझिंजम बंदरगाह से माल ढुलाई जोड़ने की भी संभावना।

केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार ने बहुचर्चित और विवादित सिल्वरलाइन परियोजना को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है और अब एक वैकल्पिक ब्रॉड-गेज सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं। यह घोषणा 22 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम से सामने आई और राज्य की बुनियादी ढाँचा नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है।

सिल्वरलाइन का अंत: एक राजनीतिक वादे की परिणति

गौरतलब है कि ₹63,000 करोड़ की अनुमानित लागत वाली सिल्वरलाइन परियोजना पिछली भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी (CPI-M) सरकार की महत्वाकांक्षी योजना थी। तत्कालीन विपक्ष के नेता के रूप में वी.डी. सतीशन ने इस परियोजना के विरुद्ध केरल के सबसे व्यापक राजनीतिक आंदोलनों में से एक का नेतृत्व किया था — विधानसभा के भीतर भी और सड़कों पर भी। उन्होंने इसे आर्थिक रूप से अव्यवहारिक और पर्यावरण के लिए विनाशकारी बताते हुए UDF की सत्ता में वापसी पर इसे रद्द करने का वादा किया था।

अब जब UDF सरकार में है, तो वह वादा पूरा किया जा रहा है। राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार ने सिल्वरलाइन भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान लगाए गए लगभग 8,000 पीले सीमा पत्थर हटाने का आदेश दिया है। इन पत्थरों को लगाने में कथित तौर पर ₹1.62 करोड़ खर्च हुए थे। संबंधित भूमि मालिकों को औपचारिक रूप से सूचित किया जाएगा कि उनकी जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया रद्द कर दी गई है।

नई परियोजना की रूपरेखा

प्रस्तावित ब्रॉड-गेज कॉरिडोर तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक 580 किलोमीटर की दूरी को लगभग साढ़े चार घंटे में तय करने में सक्षम होगा, जिसमें ट्रेनें 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलेंगी। यह कॉरिडोर यात्री सेवाओं — जिनमें वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें भी शामिल हैं — के साथ-साथ माल ढुलाई को भी संभालने में सक्षम होगा।

भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखने के लिए सरकार एलिवेटेड अलाइनमेंट (खंभों पर निर्मित ऊँचे मार्ग) के बड़े हिस्से पर विचार कर रही है। प्रस्तावित कॉरिडोर के मौजूदा रेलवे नेटवर्क से नियमित अंतराल पर जुड़ने की भी योजना है।

श्रीधरन की भूमिका और रेल मंत्रालय का सहयोग

'मेट्रो मैन' के नाम से प्रसिद्ध ई. श्रीधरन ने पहले भी सिल्वरलाइन के स्टैंडर्ड गेज मॉडल की कड़ी आलोचना की थी और भारतीय रेलवे के अनुकूल ब्रॉड गेज प्रणाली अपनाने की वकालत की थी। अधिकारियों के अनुसार, रेल मंत्रालय से मंजूरी और तकनीकी सहायता माँगने से पहले राज्य सरकार सीधे श्रीधरन से मार्गदर्शन लेगी। जल्द ही एक नया फिजिबिलिटी स्टडी (संभाव्यता अध्ययन) भी शुरू होने की उम्मीद है।

विझिंजम बंदरगाह से जुड़ाव और आर्थिक संभावनाएँ

यह ऐसे समय में आया है जब विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह की परिचालन क्षमता बढ़ रही है। प्रस्तावित कॉरिडोर में रोल-ऑन/रोल-ऑफ माल ढुलाई प्रणाली को शामिल करने की संभावना है, जो विझिंजम बंदरगाह से सीधे जुड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे केरल की कार्गो लॉजिस्टिक्स क्षमता और औद्योगिक विकास को उल्लेखनीय बढ़ावा मिल सकता है।

आगे की राह

फिलहाल यह परियोजना विचार-विमर्श के प्रारंभिक चरण में है। संभाव्यता अध्ययन के बाद ही लागत, समयसीमा और केंद्र सरकार की भागीदारी की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। यदि रेल मंत्रालय की स्वीकृति मिलती है, तो यह परियोजना केरल के परिवहन ढाँचे को एक नई दिशा दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि नया ब्रॉड-गेज प्रस्ताव उन्हीं बाधाओं — भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण स्वीकृति, केंद्रीय वित्तपोषण — से कैसे बचेगा जिन्होंने सिल्वरलाइन को घेरा था। एलिवेटेड अलाइनमेंट और ब्रॉड गेज का विकल्प तकनीकी रूप से अधिक व्यावहारिक लगता है, लेकिन 580 किमी के कॉरिडोर की लागत और केंद्र की भागीदारी बिना फिजिबिलिटी रिपोर्ट के अस्पष्ट है। यह परियोजना तब तक वादे से आगे नहीं बढ़ेगी जब तक रेल मंत्रालय की स्पष्ट सहमति और बजट प्रावधान सामने न आएँ।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल की सिल्वरलाइन परियोजना क्यों रद्द की गई?
UDF सरकार ने सिल्वरलाइन को आर्थिक रूप से अव्यवहारिक और पर्यावरण के लिए हानिकारक बताते हुए रद्द किया। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने विपक्ष में रहते हुए इस ₹63,000 करोड़ की परियोजना के विरुद्ध बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया था और सत्ता में आने पर इसे समाप्त करने का वादा किया था।
नए ब्रॉड-गेज हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की क्या विशेषताएँ हैं?
प्रस्तावित कॉरिडोर तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक 580 किलोमीटर की दूरी लगभग साढ़े चार घंटे में तय करेगा, जिसमें ट्रेनें 160 किमी/घंटे की गति से चलेंगी। यह यात्री सेवाओं (वंदे भारत सहित) और माल ढुलाई दोनों के लिए उपयुक्त होगा तथा एलिवेटेड अलाइनमेंट पर बनाया जाएगा।
सिल्वरलाइन के पीले पत्थरों का क्या होगा?
राजस्व मंत्री ए.पी. अनिल कुमार ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान लगाए गए लगभग 8,000 पीले सीमा पत्थर हटाने का आदेश दिया है। इन पत्थरों पर कथित तौर पर ₹1.62 करोड़ खर्च हुए थे और संबंधित भूमि मालिकों को भी औपचारिक रूप से सूचित किया जाएगा।
ई. श्रीधरन की इस नई परियोजना में क्या भूमिका होगी?
अधिकारियों के अनुसार, सरकार रेल मंत्रालय से संपर्क करने से पहले 'मेट्रो मैन' ई. श्रीधरन से सीधे मार्गदर्शन लेगी। श्रीधरन पहले भी सिल्वरलाइन के स्टैंडर्ड गेज मॉडल की आलोचना कर चुके हैं और ब्रॉड गेज प्रणाली के पक्षधर रहे हैं।
नई रेल परियोजना कब तक शुरू हो सकती है?
अभी परियोजना प्रारंभिक विचार-विमर्श के चरण में है। जल्द ही एक फिजिबिलिटी स्टडी शुरू होने की उम्मीद है, जिसके बाद रेल मंत्रालय से मंजूरी और तकनीकी सहायता माँगी जाएगी। निर्माण की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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