केरल के लिए नया सेमी हाई-स्पीड रेल प्रस्ताव, 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन: ई. श्रीधरन

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केरल के लिए नया सेमी हाई-स्पीड रेल प्रस्ताव, 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन: ई. श्रीधरन

सारांश

ई. श्रीधरन ने केरल के लिए एक नया सेमी हाई-स्पीड रेल प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें ट्रेनें 200 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ेंगी। यह योजना कम लागत और न्यूनतम भूमि अधिग्रहण के साथ विकसित की जा रही है।

Key Takeaways

  • नई योजना में ट्रेनें 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी।
  • परियोजना की लागत लगभग 56,500 करोड़ रुपए है।
  • यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • इसमें पथानामथिट्टा और मलप्पुरम को भी शामिल किया गया है।
  • परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की योजना है।

तिरुवनंतपुरम, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। तकनीकी क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञ और कोंकण रेलवे के पूर्व चेयरमैन ई. श्रीधरन ने केरल के लिए सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का नया संशोधित प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। उन्होंने बताया कि यह नई योजना पहले की तुलना में अधिक तेज, कम लागत वाली और न्यूनतम भूमि अधिग्रहण के साथ होगी।

यह कॉरिडोर तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक प्रस्तावित है और इसमें पथानामथिट्टा और मलप्पुरम को भी शामिल किया गया है। योजना के अनुसार, ट्रेनें अधिकतम 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी, जिससे पूरे मार्ग की यात्रा लगभग ३ घंटे २० मिनट में पूरी होगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग ५६,५०० करोड़ रुपए बताई गई है।

श्रीधरन ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि परिचालन ऊर्जा लागत में एक-तिहाई की बचत की जा सकेगी, क्योंकि बिजली का उत्पादन परियोजना संचालित करने वाली कंपनी स्वयं करेगी।

उन्होंने कहा कि यह हाई-स्पीड रेलवे एक सेवा-उन्मुख व्यवस्था होगी और किराया न्यूनतम व्यवहार्य स्तर पर रखा जाएगा, जो मोटे तौर पर एसी चेयर कार किराए के बराबर होगा। यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा, समयपालन और स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

डिजाइन के अनुसार, नियमित स्टेशनों पर ट्रेन एक मिनट और प्रमुख स्टेशनों पर दो मिनट रुकेगी। प्रस्तावित मार्ग का अधिकांश हिस्सा एलिवेटेड वायाडक्ट और सुरंगों से होकर गुजरेगा, जिससे बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होगी और पर्यावरणीय प्रभाव भी सीमित रहेगा।

श्रीधरन ने बताया कि उनके पहले प्रस्ताव पर सीमित प्रगति के बाद यह संशोधित योजना तैयार की गई है और इसे जल्द ही भारत सरकार के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली केरल सरकार अलग क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट कॉरिडोर (आरआरटीसी) परियोजना को आगे बढ़ा रही है। राज्य मंत्रिमंडल ने इस परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिसमें चरणबद्ध तरीके से तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक तेज क्षेत्रीय परिवहन प्रणाली का विकास किया जाएगा। प्रारंभिक कार्यों के लिए बजट प्रावधान भी किया गया है।

दो समानांतर प्रस्ताव केरल की बढ़ती परिवहन चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न दृष्टिकोण दर्शाते हैं। जबकि श्रीधरन की योजना उच्च गति और एलिवेटेड संरचना के माध्यम से लागत को नियंत्रित करने पर केंद्रित है, वहीं राज्य सरकार की आरआरटीसी योजना प्रमुख शहरी केंद्रों को जोड़ने वाली एक समेकित क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत की जा रही है।

दोनों परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट अभी अंतिम रूप में नहीं आई है। आने वाले महीनों में यह तय होगा कि नीति स्तर पर किस मॉडल को प्राथमिकता दी जाती है और केरल के परिवहन ढांचे में कौन सा प्रस्ताव आगे बढ़ता है।

Point of View

दो अलग-अलग योजनाओं के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। नीति निर्माताओं को यह तय करना होगा कि किस योजना को प्राथमिकता दी जाए।
NationPress
24/02/2026

Frequently Asked Questions

इस परियोजना की लागत क्या है?
इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 56,500 करोड़ रुपए है.
यह रेल कॉरिडोर किस-किस शहरों को जोड़ेगा?
यह कॉरिडोर तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक प्रस्तावित है, जिसमें पथानामथिट्टा और मलप्पुरम भी शामिल हैं.
इस रेल कॉरिडोर में ट्रेनें कितनी रफ्तार से चलेंगी?
इस रेल कॉरिडोर में ट्रेनें अधिकतम 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी.
परियोजना का लाभ क्या होगा?
यह परियोजना कम लागत और न्यूनतम भूमि अधिग्रहण के साथ तेज यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी.
क्या यह परियोजना भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी?
हाँ, इस संशोधित योजना को जल्द ही भारत सरकार के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत किया जाएगा.
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