केरल: श्रीधरन का ₹1 लाख करोड़ का हाई-स्पीड रेल प्रस्ताव, सीएम सतीशन ने दो सप्ताह में रुख स्पष्ट करने का वादा किया
सारांश
मुख्य बातें
मेट्रो मैन ई. श्रीधरन ने 29 मई 2026 को तिरुवनंतपुरम स्थित सचिवालय में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के साथ ₹1 लाख करोड़ की अनुमानित लागत वाले वैकल्पिक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर विस्तृत बैठक की। यह प्रस्ताव तिरुवनंतपुरम से कन्नूर तक 430 किलोमीटर के मार्ग को कवर करता है और विवादास्पद के-रेल सिल्वरलाइन परियोजना के व्यावहारिक विकल्प के रूप में सामने आया है।
प्रस्ताव में क्या है
श्रीधरन के प्रस्ताव के अनुसार, 430 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा एलिवेटेड ट्रैक पर होगा, जबकि कुछ संवेदनशील खंडों को भूमिगत बनाया जाएगा। इस संरचनात्मक ढाँचे का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें मूल सिल्वरलाइन परियोजना की तुलना में बहुत कम भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होगी। साथ ही, प्रस्तावित कॉरिडोर केरल के चार प्रमुख हवाई अड्डों को भी जोड़ेगा, जिससे यह राज्य के लिए एक एकीकृत आधुनिक परिवहन नेटवर्क बन सकता है।
बैठक का घटनाक्रम
बैठक के दौरान श्रीधरन ने मुख्यमंत्री को परियोजना पर एक अंतरिम रिपोर्ट सौंपी। पोन्नानी से विधायक केपी नौशाद अली भी इस चर्चा में उपस्थित रहे। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री सतीशन ने प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और श्रीधरन को सूचित किया कि सरकार का आधिकारिक रुख दो सप्ताह के भीतर घोषित किया जाएगा। अंतिम निर्णय से पहले परामर्श के और दौर आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है।
सिल्वरलाइन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद यूडीएफ सरकार ने पूर्ववर्ती पिनाराई विजयन सरकार की तिरुवनंतपुरम-कासरगोड के-रेल सिल्वरलाइन परियोजना को औपचारिक रूप से रद्द कर दिया था। सिल्वरलाइन के विरुद्ध केरल भर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिनका मुख्य कारण बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय प्रभाव की आशंकाएँ थीं। हालाँकि, मुख्यमंत्री सतीशन ने स्पष्ट किया था कि राज्य को एक आधुनिक हाई-स्पीड परिवहन प्रणाली की ज़रूरत बनी हुई है और विस्तृत अध्ययन के बाद वैकल्पिक मॉडलों पर विचार किया जाएगा।
श्रीधरन का रुख
श्रीधरन ने परियोजना को विस्तार से तैयार करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा पहले ही व्यक्त कर दी है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल आधारभूत संरचना विकास और जन-विरोध के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है। श्रीधरन का दिल्ली मेट्रो और कोच्चि मेट्रो में अनुभव उनके प्रस्ताव को राजनीतिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर विश्वसनीयता देता है।
आगे क्या होगा
सरकार के अनुसार, दो सप्ताह के भीतर आधिकारिक रुख की घोषणा होगी, जिसके बाद परियोजना के विस्तृत अध्ययन और वित्तपोषण मॉडल पर काम शुरू हो सकता है। यदि सरकार हरी झंडी देती है, तो यह केरल के परिवहन बुनियादी ढाँचे में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।