15 जुलाई 2026
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केरल हाई-स्पीड रेल परियोजना रद्द नहीं, डीपीआर से पहले EIA और वित्तीय अध्ययन जरूरी: सीएम सतीशन

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केरल हाई-स्पीड रेल परियोजना रद्द नहीं, डीपीआर से पहले EIA और वित्तीय अध्ययन जरूरी: सीएम सतीशन

सारांश

केरल की हाई-स्पीड रेल परियोजना जिंदा है — लेकिन अभी रुकी हुई है। सीएम सतीशन ने साफ कहा कि डीएमआरसी की रिपोर्ट पर्याप्त नहीं, EIA और वित्तीय व्यवहार्यता अध्ययन पहले जरूरी हैं। के-रेल की विफलता की छाया में यह सतर्क कदम राज्य की बड़ी बुनियादी ढांचा नीति की नई दिशा तय कर सकता है।

मुख्य बातें

केरल हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर रद्द नहीं किया गया है, परंतु डीपीआर से पहले अनिवार्य अध्ययन जरूरी होंगे।
विशेषज्ञ समिति ने पाया कि डीएमआरसी की रिपोर्ट में EIA और भूमि अधिग्रहण की सीमा शामिल नहीं है।
सीएम वीडी सतीशन ने कहा कि केवल यात्री राजस्व से परियोजना टिकाऊ नहीं होगी; माल ढुलाई जैसे अतिरिक्त राजस्व स्रोत तलाशे जाएंगे।
सरकार ने पिछली वामपंथी सरकार की के-रेल परियोजना की गलतियों को न दोहराने की प्रतिबद्धता जताई।
मंत्रिमंडल ने सभी विभागों में परियोजना निगरानी और जवाबदेही ढांचा लागू करने का निर्णय लिया।

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने 15 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि मेट्रो मैन ई. श्रीधरन के मार्गदर्शन में दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) द्वारा तैयार प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को रद्द नहीं किया गया है, परंतु विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) बनाने से पहले अनिवार्य तकनीकी, पर्यावरणीय और आर्थिक अध्ययन पूरे करने होंगे। तिरुवनंतपुरम में कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने यह जानकारी दी।

विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें

सरकार द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने डीएमआरसी की रिपोर्ट की विस्तृत जांच की और अपनी सिफारिशें प्रस्तुत कीं। समिति ने पाया कि यद्यपि डीएमआरसी की रिपोर्ट एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है, इसे व्यापक परियोजना रिपोर्ट नहीं माना जा सकता। मुख्यमंत्री सतीशन के अनुसार, इस प्रस्ताव में अनिवार्य पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) शामिल नहीं है और कॉरिडोर के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की सीमा भी निर्दिष्ट नहीं की गई है।

वित्तीय व्यवहार्यता पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पहले परियोजना की वित्तीय और परिचालन व्यवहार्यता का विस्तृत अध्ययन करेगी, जिसमें माल ढुलाई और रसद आवागमन की संभावना भी शामिल होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल यात्री राजस्व से इतनी बड़ी परियोजना को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना पर्याप्त नहीं होगा, इसलिए राजस्व के अतिरिक्त स्रोत तलाशना अनिवार्य है। इन प्रारंभिक अध्ययनों के पूरा होने के बाद ही डीपीआर तैयार की जाएगी, जो कार्यान्वयन संबंधी अंतिम निर्णय का आधार बनेगी।

के-रेल की गलती न दोहराने की चेतावनी

सतीशन ने पिछली वामपंथी सरकार की के-रेल परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा, 'हम पिछली वामपंथी सरकार की बहुचर्चित के-रेल परियोजना में हुई गलतियों को दोहराना नहीं चाहते, जिसे अंततः रद्द करना पड़ा। सरकार आगे की राह तय करने से पहले पूरी तरह विचार करेगी।' यह ऐसे समय में आया है जब केरल में बड़े बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को लेकर राजनीतिक और जन-विमर्श तेज है।

परियोजना निगरानी में सुधार

इस बीच, मंत्रिमंडल ने सभी विभागों में परियोजना निगरानी को मजबूत करने का निर्णय लिया। राज्य के खजाने पर बढ़ते वित्तीय बोझ का कारण बन रही देरी की पहचान के लिए एक व्यापक परियोजना-मैपिंग अभ्यास किया जाएगा। सरकार परियोजनाओं के समय पर निष्पादन सुनिश्चित करने, देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने और सार्वजनिक अवसंरचना विकास में दक्षता सुधारने के उद्देश्य से एक नया जवाबदेही ढांचा और कार्यान्वयन प्रोटोकॉल लागू करेगी।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि डीपीआर तभी तैयार होगी जब EIA, भूमि अधिग्रहण आकलन और वित्तीय व्यवहार्यता अध्ययन — तीनों प्रक्रियाएं पूरी हों। इस पूरी प्रक्रिया में महीनों लग सकते हैं, जिससे हाई-स्पीड रेल परियोजना की समयसीमा अभी अनिश्चित बनी हुई है। केरल की यह सतर्क रणनीति राज्य में बुनियादी ढांचे की योजना के प्रति एक नए पारदर्शी दृष्टिकोण का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन 'अध्ययनों' की कोई समयसीमा तय की गई है या नहीं — क्योंकि बिना डेडलाइन के अध्ययन अक्सर परियोजनाओं को अनिश्चितकाल के लिए लटका देते हैं। के-रेल का हवाला देकर पिछली सरकार पर निशाना साधना राजनीतिक दृष्टि से समझ में आता है, लेकिन केरल की बुनियादी ढांचे की जरूरतें वास्तविक हैं और हर बार नए सिरे से अध्ययन शुरू करना भी एक तरह की देरी की रणनीति बन सकती है। जवाबदेही ढांचे की घोषणा स्वागतयोग्य है, पर क्रियान्वयन के बिना यह भी एक और कागजी वादा बन सकती है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल हाई-स्पीड रेल परियोजना को रद्द कर दिया गया है?
नहीं, सीएम वीडी सतीशन ने 15 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि परियोजना रद्द नहीं हुई है। हालांकि, डीपीआर तैयार करने से पहले EIA, भूमि अधिग्रहण आकलन और वित्तीय व्यवहार्यता अध्ययन पूरे करने होंगे।
डीएमआरसी की रिपोर्ट में क्या कमियाँ पाई गईं?
सरकार की विशेषज्ञ समिति ने पाया कि डीएमआरसी की रिपोर्ट में अनिवार्य पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) शामिल नहीं है और कॉरिडोर के लिए जरूरी भूमि अधिग्रहण की सीमा भी निर्दिष्ट नहीं की गई है। इसलिए इसे व्यापक परियोजना रिपोर्ट नहीं माना जा सकता।
केरल हाई-स्पीड रेल परियोजना की डीपीआर कब तैयार होगी?
EIA, भूमि अधिग्रहण आकलन और वित्तीय व्यवहार्यता अध्ययन — तीनों पूरे होने के बाद ही डीपीआर तैयार की जाएगी। इसकी कोई निश्चित समयसीमा अभी सरकार ने घोषित नहीं की है।
के-रेल और इस नई हाई-स्पीड रेल परियोजना में क्या अंतर है?
के-रेल पिछली वामपंथी सरकार की परियोजना थी जिसे व्यापक विरोध और व्यवहार्यता संबंधी सवालों के बाद रद्द करना पड़ा था। वर्तमान परियोजना डीएमआरसी द्वारा तैयार एक नए प्रस्ताव पर आधारित है, और सरकार ने कहा है कि वह पहले सभी जरूरी अध्ययन पूरे करके ही आगे बढ़ेगी।
केरल कैबिनेट ने परियोजना निगरानी के लिए क्या निर्णय लिया?
मंत्रिमंडल ने सभी विभागों में परियोजना निगरानी मजबूत करने और एक व्यापक परियोजना-मैपिंग अभ्यास करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने हेतु एक नया जवाबदेही ढांचा और कार्यान्वयन प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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