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क्या सुप्रीम कोर्ट ने मुल्लापेरियार बांध को बंद करने की याचिका पर केंद्र और तमिलनाडु को नोटिस जारी किया?

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क्या सुप्रीम कोर्ट ने मुल्लापेरियार बांध को बंद करने की याचिका पर केंद्र और तमिलनाडु को नोटिस जारी किया?

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने एक सदी पुराने मुल्लापेरियार बांध के बंद होने और नए बांध की मांग पर महत्वपूर्ण नोटिस जारी किया है। यह फैसला केरल और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद का नया मोड़ है। क्या यह कदम जल सुरक्षा को प्रभावित करेगा?

मुख्य बातें

मुल्लापेरियार बांध एक सदी पुराना है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और तमिलनाडु को नोटिस जारी किया।
बांध की सुरक्षा को लेकर केरल और तमिलनाडु के बीच विवाद है।
बांध में जल स्तर 142 फीट पर बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।
बांध का जलग्रहण क्षेत्र केरल में है, लेकिन इसका जल तमिलनाडु के लिए महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केरल में एक सदी पुराने मुल्लापेरियार बांध को बंद करने और उसी स्थान पर नया बांध बनाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और तमिलनाडु राज्य को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।

यह याचिका केरल स्थित संगठन, सेव केरल ब्रिगेड द्वारा दायर की गई थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था।

गवई ने टिप्पणी की कि मुल्लापेरियार बांध सबसे पुराने बांधों में से एक है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरी ने इस बात से सहमति जताई और कहा कि यह 130 साल पुराना है। हालांकि, उन्होंने बांध से जुड़ी समस्याओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि लगभग 1 करोड़ लोगों की जान को खतरा है। उन्होंने आगे कहा कि आपको यह बताना होगा कि वास्तव में समस्या क्या है।

अंग्रेजों द्वारा एक सदी से भी पहले निर्मित मुल्लापेरियार बांध लंबे समय से तमिलनाडु और केरल के बीच टकराव का कारण रहा है।

केरल ने बार-बार बांध की उम्र और संरचनात्मक कमजोरी का हवाला देते हुए सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई हैं, जबकि तमिलनाडु का कहना है कि बांध संरचनात्मक रूप से मजबूत और सुरक्षित है।

हालांकि, बांध और उसका जलग्रहण क्षेत्र केरल में स्थित है, जलाशय का पानी तमिलनाडु के लिए महत्वपूर्ण है, जो राज्य के पांच जिलों के लिए जीवन रेखा का काम करता है।

2014 के एक ऐतिहासिक फैसले में, सर्वोच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के रुख को बरकरार रखा, बांध को सुरक्षित घोषित करते हुए निर्देश दिया कि जलाशय में जल स्तर 142 फीट पर बनाए रखा जाए। न्यायालय ने बांध के प्रबंधन की निगरानी के लिए एक पर्यवेक्षी समिति भी गठित की। तमिलनाडु ने लगातार बांध की सुरक्षा की वकालत की है और इसकी संरचना को मजबूत करने के उपाय करने की मांग की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं मानता हूं कि यह मामला सिर्फ एक बांध के बंद होने का नहीं है, बल्कि यह देश की जल सुरक्षा और राज्यों के बीच संबंधों का मुद्दा है। हमें सभी पक्षों की चिंताओं को सुनना चाहिए और एक संतुलित समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुल्लापेरियार बांध कब बना था?
मुल्लापेरियार बांध लगभग 130 साल पहले, अंग्रेजों द्वारा निर्मित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने किसके खिलाफ नोटिस जारी किया?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और तमिलनाडु राज्य के खिलाफ नोटिस जारी किया।
बांध की सुरक्षा को लेकर क्या चिंताएँ हैं?
केरल राज्य बांध की उम्र और संरचनात्मक कमजोरी को लेकर चिंतित है, जबकि तमिलनाडु इसे सुरक्षित मानता है।
राष्ट्र प्रेस
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