जी-20 में सीतारमण ने किया अमेरिकी ग्रोथ एजेंडे का समर्थन, बोलीं — वैश्विक असंतुलन दूर करना अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 सितंबर 2026 को एशविले में जी-20 की बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि भारत, अमेरिकी अध्यक्षता के तहत आर्थिक विकास, वैश्विक असंतुलन और वित्तीय साक्षरता को प्राथमिकता देने के एजेंडे के साथ पूरी तरह सहमत है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के साथ 'सकारात्मक और रचनात्मक' द्विपक्षीय बैठक के बाद सीतारमण ने यह रुख सार्वजनिक रूप से रखा।
भारत-अमेरिका की साझा प्राथमिकताएँ
सीतारमण ने कहा, "अमेरिकी अध्यक्षता ने विकास को प्राथमिकता बताया है। इसने वैश्विक असंतुलन को एक चिंता के रूप में बताया है। अमेरिका ने वित्तीय साक्षरता को भी बहुत स्पष्ट रूप से उच्च महत्व दिया है, जो वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के लिए व्यक्तिगत रूप से बहुत प्रिय विषय है। तो इन सभी मुद्दों पर हम अमेरिका के साथ पूरी तरह से हैं।"
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नई दिल्ली और वाशिंगटन जी-20 के वित्तीय ट्रैक में चर्चा किए जा रहे मुख्य बिंदुओं पर एकमत हैं। सीतारमण ने कहा, "ये वो बिंदु हैं जिन पर हम भी निष्पक्ष, खुली चर्चा चाहते हैं। विकास जी-20 के वित्तीय ट्रैक के लिए एक केंद्रीय बिंदु है। इसी तरह वैश्विक असंतुलन को भी सुलझाना होगा।"
बहुपक्षीय द्विपक्षीय बैठकें
एशविले में जी-20 बैठक के दौरान वित्त मंत्री ने अमेरिका के अलावा पोलैंड, कतर, दक्षिण कोरिया और रूस के प्रतिनिधियों के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने बताया, "ये सभी बैठकें आज हुईं और बहुत ही सकारात्मक रहीं। सभी के हाथों में भारत के बारे में तथ्य थे और वे भारत के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने के लिए उत्सुक हैं।"
आगे की योजनाओं के अनुसार, दक्षिण कोरिया के साथ एक द्विपक्षीय संवाद इस वर्ष के अंत में होगा, जबकि कतर के साथ भी इसी वर्ष बातचीत निर्धारित है।
भारत की आर्थिक मज़बूती का संदर्भ
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। इसमें मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत और वित्तीय एवं पेशेवर सेवाओं में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है। सीतारमण ने इन आँकड़ों को वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की आर्थिक मज़बूती का प्रमाण बताया और कहा कि सरकार नई चुनौतियों के बावजूद भारत को लाभकारी स्थिति में बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
विदेश दौरे का विस्तृत कार्यक्रम
वित्त मंत्री सीतारमण की यह विदेश यात्रा कनाडा से शुरू हुई, जहाँ उन्होंने कनाडाई वित्त मंत्री से मुलाकात की। इसके बाद वह फंडिंग एजेंसियों के साथ चर्चा के लिए शिकागो गईं और फिर जी-20 बैठक के लिए एशविले पहुँचीं। एशविले के कार्यक्रम पूरे होने के बाद वह न्यूयॉर्क जाएंगी, जहाँ भारतीय बाज़ार में निवेश के इच्छुक वैश्विक निवेशकों से उनकी मुलाकात होगी। गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश में है।
आगे क्या होगा
जी-20 के वित्तीय ट्रैक में भारत की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि नई दिल्ली बहुपक्षीय मंचों पर अपनी आर्थिक कूटनीति को और धार देना चाहती है। वित्त मंत्री के अनुसार, कई द्विपक्षीय संवाद इस वर्ष के अंत तक निर्धारित हैं, जो भारत की वैश्विक आर्थिक साझेदारी को नई गति दे सकते हैं।