तेलंगाना सूखा राहत: टीपीसीसी उपाध्यक्ष ने अमित शाह पर ₹30,000 करोड़ की सहायता न देने का आरोप लगाया
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) की उपाध्यक्ष कोटा नीलिमा ने 6 नवंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए कि उन्होंने हैदराबाद यात्रा के दौरान सूखे से जूझ रहे तेलंगाना को कोई केंद्रीय सहायता नहीं दी। नीलिमा ने कहा कि 31 जिलों के 365 मंडलों में सूखा घोषित होने के बावजूद भाजपा नेतृत्व ने राहत के बजाय राजनीतिक मुद्दों को तरजीह दी।
सूखे का दायरा और राज्य की माँग
नीलिमा के अनुसार, 1 जून से 31 अक्टूबर के बीच तेलंगाना में 24 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार सूखा राहत के लिए केंद्र से ₹30,000 करोड़ की माँग कर रही है।
राज्य की प्रमुख माँगों में राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) सहायता, केंद्रीय मूल्यांकन दल की तैनाती, राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के केंद्रीय हिस्से की रिहाई, फसल हानि सहायता, इनपुट सब्सिडी, पेयजल बहाली और चारा आपूर्ति शामिल हैं। इसके अलावा राज्य ने ग्रामीण रोज़गार योजना के तहत 50 अतिरिक्त कार्यदिवस की भी माँग की है।
टीपीसीसी की प्रमुख आपत्तियाँ
नीलिमा ने कहा कि जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तेलंगाना दौरे पर थे, तब उन्होंने सूखा राहत पर बात करने के बजाय कथित तौर पर सांप्रदायिक मुद्दों पर भाषण दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा नेतृत्व का तेलंगाना के आम लोगों के प्रति अहंकारी रवैया दर्शाता है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हिंदू-मुस्लिम राजनीति से सूखे की समस्या का समाधान नहीं हो सकता। किसानों को राहत चाहिए, कृषि मजदूरों को रोज़गार चाहिए और परिवारों को इसके आर्थिक दुष्परिणामों से सुरक्षा चाहिए।'
आम जनता पर असर
नीलिमा के अनुसार, सूखे के कारण ग्रामीण और शहरी तेलंगाना दोनों में आर्थिक अनिश्चितता का माहौल है। फसल के नुकसान, भोजन की कमी और पेयजल की समस्या ने बड़े पैमाने पर संकट उत्पन्न किया है। हैदराबाद सहित शहरी क्षेत्रों में पेयजल बहाली की सख्त जरूरत बताई जा रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकार के बीच संसाधन आवंटन को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि तेलंगाना में कांग्रेस की सरकार है, जबकि केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेतृत्व वाला एनडीए गठबंधन सत्ता में है।
भाजपा पर संवैधानिक जिम्मेदारी का सवाल
नीलिमा ने कहा कि भाजपा नेतृत्व राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और संवैधानिक उत्तरदायित्व के बीच अंतर करने में विफल रहा है। उन्होंने माँग की कि भाजपा यह स्पष्ट करे कि शाह के भाषण में तेलंगाना की सबसे अहम चिंताओं को क्यों जगह नहीं मिली।
आगे क्या होगा
टीपीसीसी ने स्पष्ट किया कि तेलंगाना को मिलने वाली प्रत्येक रुपये की केंद्रीय सहायता के लिए राज्य सरकार का संघर्ष जारी रहेगा। केंद्र की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में तेलंगाना सरकार की माँगों और केंद्र की प्रतिक्रिया पर निगाहें टिकी रहेंगी।