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यूएनसीसीडी सीओपी-17: भूपेंद्र यादव उलानबटार पहुंचे, भारत रखेगा लैंड डिग्रेडेशन पर अपना पक्ष

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यूएनसीसीडी सीओपी-17: भूपेंद्र यादव उलानबटार पहुंचे, भारत रखेगा लैंड डिग्रेडेशन पर अपना पक्ष

सारांश

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव उलानबटार में यूएनसीसीडी सीओपी-17 में भारत का प्रतिनिधित्व करने पहुंचे हैं। 197 देशों के इस मंच पर भारत लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी और इको-रिस्टोरेशन पर अपना पक्ष रखेगा — ऐसे समय में जब मरुस्थलीकरण और सूखा वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं।

मुख्य बातें

पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव 23 अगस्त 2026 को यूएनसीसीडी सीओपी-17 के लिए मंगोलिया की राजधानी उलानबटार पहुंचे।
सम्मेलन 17 से 28 अगस्त 2026 तक 'जमीन को बहाल करना, उम्मीद जगाना' थीम के तहत आयोजित है।
यादव द्विपक्षीय बैठकों में लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी और इको-रिस्टोरेशन पर भारत का पक्ष रखेंगे।
मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सर्वे और डॉ.
ओडबयार ने मंत्री का स्वागत किया।
सीओपी-17 में 197 सदस्य देशों के प्रतिनिधि, वैज्ञानिक, युवा और पशुपालक भाग लेंगे।
यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय चारागाह और पशुपालक वर्ष (आईवाईआरपी 2026) के दौरान आयोजित हो रहा है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव 23 अगस्त 2026 को मंगोलिया की राजधानी उलानबटार पहुंचे, जहाँ वे संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन (यूएनसीसीडी) के 17वें कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टीज (सीओपी-17) में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह सम्मेलन 17 से 28 अगस्त 2026 तक 'जमीन को बहाल करना, उम्मीद जगाना' थीम के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।

मंत्री का स्वागत और प्रतिनिधिमंडल

उलानबटार पहुंचने पर मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सर्वे और मंगोलिया के राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार डॉ. ई. ओडबयार ने मंत्री यादव का औपचारिक स्वागत किया। मंगोलिया में भारतीय दूतावास ने एक्स पर जानकारी देते हुए पुष्टि की कि यादव इस महत्वपूर्ण वैश्विक मंच पर भारतीय दल का नेतृत्व कर रहे हैं।

भारत का एजेंडा: लैंड डिग्रेडेशन और इको-रिस्टोरेशन

मंत्री यादव ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में वे विभिन्न मंचों और द्विपक्षीय बैठकों में लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी (जमीन के खराब होने को रोकना) और इको-रिस्टोरेशन (पारिस्थितिक पुनर्स्थापना) के एजेंडे पर भारत का पक्ष प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने कहा, 'अगले कुछ दिनों में मैं अलग-अलग मंचों और द्विपक्षीय बैठकों में जमीन के खराब होने की समस्या को रोकने और पर्यावरण को फिर से बेहतर बनाने के एजेंडे और इससे जुड़े मुद्दों पर भारत का पक्ष रखूंगा।'

सीओपी-17 का महत्व और वैश्विक भागीदारी

यूएनसीसीडी के अनुसार, इस सम्मेलन में 197 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ सरकार, व्यापार जगत, नागरिक समाज, वैज्ञानिक, युवा, मूल निवासी, पशुपालक और छोटे किसान भाग लेंगे। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे की परस्पर जुड़ी चुनौतियाँ वैश्विक खाद्य सुरक्षा और जन-विस्थापन के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं।

गौरतलब है कि सीओपी-17 संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित और मंगोलिया द्वारा समर्थित 'संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय चारागाह और पशुपालक वर्ष' (आईवाईआरपी 2026) के दौरान आयोजित हो रहा है, जो इस सम्मेलन को विशेष प्रासंगिकता देता है।

आम जनता और कमज़ोर समुदायों पर असर

प्रतिनिधि यह समझने का प्रयास करेंगे कि कमज़ोर इलाकों में अस्थिरता कम करने, लोगों को विस्थापित होने से रोकने और मानवीय व राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए भूमि पुनर्स्थापना क्यों अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सहित कई विकासशील देश मरुस्थलीकरण के बढ़ते प्रभाव से जूझ रहे हैं।

आगे क्या होगा

सम्मेलन 28 अगस्त 2026 तक चलेगा, जिसमें भूमि बहाली पर ठोस अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएँ और नीतिगत घोषणाएँ अपेक्षित हैं। मंत्री यादव की द्विपक्षीय बैठकें भारत की पर्यावरण कूटनीति को नई दिशा दे सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह होगी कि उलानबटार से लौटकर भारत घरेलू स्तर पर क्या ठोस कदम उठाता है — राजस्थान से लेकर विदर्भ तक भूमि क्षरण की चुनौती गंभीर बनी हुई है। वैश्विक मंचों पर लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी की वकालत करना और देश के भीतर वन-अधिकार व किसान-हित के बीच संतुलन बनाना — यह विरोधाभास अभी भी अनसुलझा है। सीओपी-17 की घोषणाएँ तभी अर्थपूर्ण होंगी जब उन्हें सत्यापन-योग्य राष्ट्रीय लक्ष्यों से जोड़ा जाए।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएनसीसीडी सीओपी-17 क्या है और यह कहाँ हो रहा है?
यूएनसीसीडी सीओपी-17 संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन का 17वाँ वार्षिक सम्मेलन है, जो 17 से 28 अगस्त 2026 तक मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित हो रहा है। इसमें 197 सदस्य देशों के प्रतिनिधि मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे जैसी चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
भूपेंद्र यादव सीओपी-17 में भारत की ओर से क्या एजेंडा रखेंगे?
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव विभिन्न मंचों और द्विपक्षीय बैठकों में लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी और इको-रिस्टोरेशन पर भारत का पक्ष प्रस्तुत करेंगे। उनका उद्देश्य भूमि बहाली और पारिस्थितिक पुनर्स्थापना से जुड़े अंतर्राष्ट्रीय एजेंडे में भारत की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना है।
सीओपी-17 का थीम क्या है और इसका क्या महत्व है?
सीओपी-17 का थीम 'जमीन को बहाल करना, उम्मीद जगाना' है। यह थीम इस बात को रेखांकित करती है कि भूमि पुनर्स्थापना न केवल पर्यावरणीय, बल्कि मानवीय सुरक्षा, जन-विस्थापन रोकने और राष्ट्रीय स्थिरता के लिए भी अनिवार्य है।
सीओपी-17 में किन-किन लोगों के भाग लेने की उम्मीद है?
यूएनसीसीडी के अनुसार, इस सम्मेलन में 197 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के अलावा सरकारी नेता, व्यापार जगत, नागरिक समाज, वैज्ञानिक, युवा, मूल निवासी, पशुपालक और छोटे किसान शामिल होंगे। यह विविध भागीदारी सम्मेलन को व्यापक वैश्विक प्रतिनिधित्व देती है।
आईवाईआरपी 2026 क्या है और इसका सीओपी-17 से क्या संबंध है?
आईवाईआरपी 2026 यानी 'संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय चारागाह और पशुपालक वर्ष' को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने घोषित किया है और मंगोलिया ने इसका समर्थन किया है। सीओपी-17 इसी वर्ष के दौरान आयोजित हो रहा है, जो चारागाह भूमि संरक्षण और पशुपालक समुदायों की भूमिका को विशेष महत्व देता है।
राष्ट्र प्रेस
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