मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भूपेंद्र यादव का बड़ा कदम: गैंडा-डॉल्फिन समेत चार संरक्षण परियोजनाओं को मंजूरी, नया पोर्टल लॉन्च
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 10 जुलाई 2026 को कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष भारत के सामने संरक्षण और विकास से जुड़ी सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन चुका है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने आधुनिक तकनीक और समाधान-आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और नया डिजिटल पोर्टल
कोयंबटूर में स्थापित यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन में नवाचार और शोध का केंद्र बनेगा। इसी अवसर पर भूपेंद्र यादव ने राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल भी लॉन्च किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म देशभर में संघर्ष से जुड़े आंकड़ों के प्रबंधन, जानकारी साझा करने और नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगा।
साथ ही 'भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति: एक अवलोकन' शीर्षक से प्रकाशन श्रृंखला का पहला संस्करण भी जारी किया गया, जिसमें देशभर के संघर्ष के रुझानों और उभरती चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
मंत्री का संदेश: सह-अस्तित्व और सामंजस्य
भूपेंद्र यादव ने देशभर के वन विभागों से मानव बस्तियों और फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा, "संघर्ष नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व और सामंजस्य ही पारिस्थितिकीय स्थिरता का मूल मंत्र होना चाहिए।" उनका जोर स्थानीय समुदायों की भागीदारी और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय पर रहा।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में हाथी, तेंदुआ और जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों के मानव बस्तियों में प्रवेश की घटनाएँ बढ़ी हैं, जिससे जान-माल का नुकसान हो रहा है। गौरतलब है कि वन्यजीव संरक्षण और मानवीय विकास के बीच यह टकराव दशकों पुरानी समस्या है, और यह पहल उसे संस्थागत ढाँचे में हल करने का प्रयास है।
National CAMPA बैठक और नई संरक्षण परियोजनाएँ
मंत्री ने राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (National CAMPA) की संचालन समिति की सातवीं बैठक की अध्यक्षता भी की। इस बैठक में वन संरक्षण, प्रतिपूरक वनीकरण और वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई प्रस्तावों पर विचार किया गया।
बैठक में गैंडा और डॉल्फिन समेत चार नई संरक्षण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में उपस्थित रहे।
आम जनता और वन समुदायों पर असर
नई पहलों से विशेष रूप से वन क्षेत्रों के निकट रहने वाले किसानों और ग्रामीण समुदायों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो वन्यजीवों के हमलों और फसल नुकसान से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। डिजिटल पोर्टल से मुआवजा प्रक्रिया भी तेज होने की संभावना है।
आगे की राह
कोयंबटूर का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अब देशभर के वन अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण और शोध का केंद्र बनेगा। National CAMPA द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा और वित्तीय ब्यौरा आने वाले हफ्तों में जारी होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों की सफलता ज़मीनी स्तर पर निगरानी और समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करेगी।