10 जुलाई 2026
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मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भूपेंद्र यादव का बड़ा कदम: गैंडा-डॉल्फिन समेत चार संरक्षण परियोजनाओं को मंजूरी, नया पोर्टल लॉन्च

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मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भूपेंद्र यादव का बड़ा कदम: गैंडा-डॉल्फिन समेत चार संरक्षण परियोजनाओं को मंजूरी, नया पोर्टल लॉन्च

सारांश

भूपेंद्र यादव ने कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस खोला, राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया और National CAMPA की सातवीं बैठक में गैंडा-डॉल्फिन समेत चार नई संरक्षण परियोजनाओं को हरी झंडी दी — 'सह-अस्तित्व' को नीति का केंद्र बनाने की दिशा में ठोस कदम।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 10 जुलाई 2026 को कोयंबटूर, तमिलनाडु में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन किया।
राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल लॉन्च किया गया, जो देशभर के संघर्ष आंकड़ों को एकत्र और प्रबंधित करेगा।
गैंडा और डॉल्फिन समेत चार नई वन्यजीव संरक्षण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
National CAMPA की सातवीं संचालन समिति बैठक में वन संरक्षण और प्रतिपूरक वनीकरण के प्रस्तावों पर विचार हुआ।
मंत्री ने वन विभागों से समाधान-आधारित दृष्टिकोण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 10 जुलाई 2026 को कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष भारत के सामने संरक्षण और विकास से जुड़ी सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक बन चुका है। तमिलनाडु के कोयंबटूर में मानव-वन्यजीव संघर्ष पर स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का उद्घाटन करने के बाद उन्होंने आधुनिक तकनीक और समाधान-आधारित दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और नया डिजिटल पोर्टल

कोयंबटूर में स्थापित यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन में नवाचार और शोध का केंद्र बनेगा। इसी अवसर पर भूपेंद्र यादव ने राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल भी लॉन्च किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म देशभर में संघर्ष से जुड़े आंकड़ों के प्रबंधन, जानकारी साझा करने और नीतिगत निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेगा।

साथ ही 'भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति: एक अवलोकन' शीर्षक से प्रकाशन श्रृंखला का पहला संस्करण भी जारी किया गया, जिसमें देशभर के संघर्ष के रुझानों और उभरती चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

मंत्री का संदेश: सह-अस्तित्व और सामंजस्य

भूपेंद्र यादव ने देशभर के वन विभागों से मानव बस्तियों और फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा, "संघर्ष नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व और सामंजस्य ही पारिस्थितिकीय स्थिरता का मूल मंत्र होना चाहिए।" उनका जोर स्थानीय समुदायों की भागीदारी और विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय पर रहा।

यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में हाथी, तेंदुआ और जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों के मानव बस्तियों में प्रवेश की घटनाएँ बढ़ी हैं, जिससे जान-माल का नुकसान हो रहा है। गौरतलब है कि वन्यजीव संरक्षण और मानवीय विकास के बीच यह टकराव दशकों पुरानी समस्या है, और यह पहल उसे संस्थागत ढाँचे में हल करने का प्रयास है।

National CAMPA बैठक और नई संरक्षण परियोजनाएँ

मंत्री ने राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (National CAMPA) की संचालन समिति की सातवीं बैठक की अध्यक्षता भी की। इस बैठक में वन संरक्षण, प्रतिपूरक वनीकरण और वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई प्रस्तावों पर विचार किया गया।

बैठक में गैंडा और डॉल्फिन समेत चार नई संरक्षण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह समेत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में उपस्थित रहे।

आम जनता और वन समुदायों पर असर

नई पहलों से विशेष रूप से वन क्षेत्रों के निकट रहने वाले किसानों और ग्रामीण समुदायों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो वन्यजीवों के हमलों और फसल नुकसान से सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। डिजिटल पोर्टल से मुआवजा प्रक्रिया भी तेज होने की संभावना है।

आगे की राह

कोयंबटूर का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अब देशभर के वन अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण और शोध का केंद्र बनेगा। National CAMPA द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन की समयसीमा और वित्तीय ब्यौरा आने वाले हफ्तों में जारी होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों की सफलता ज़मीनी स्तर पर निगरानी और समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये संस्थागत ढाँचे ज़मीनी स्तर तक पहुँच पाएंगे। अतीत में भी ऐसी संस्थाएँ बनी हैं जो शहरी कार्यालयों तक सीमित रह गईं, जबकि वन सीमाओं पर रहने वाले किसान और आदिवासी समुदाय मुआवजे के लिए महीनों इंतजार करते रहे। National CAMPA के पास संसाधन हैं, पर पिछले वर्षों में इसके फंड के उपयोग की दर राज्यों में असमान रही है। नई परियोजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या मुआवजा तंत्र को पोर्टल से सीधे जोड़ा जाएगा — केवल डेटा संग्रह नहीं, बल्कि जवाबदेही का वास्तविक उपकरण।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोयंबटूर में खुला मानव-वन्यजीव संघर्ष सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्या है?
यह तमिलनाडु के कोयंबटूर में स्थापित एक विशेष केंद्र है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 10 जुलाई 2026 को किया। यह केंद्र मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन में नवाचार, शोध और वन अधिकारियों के प्रशिक्षण का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा।
राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल क्या काम करेगा?
यह डिजिटल प्लेटफॉर्म देशभर में मानव-वन्यजीव संघर्ष से जुड़े आंकड़ों का केंद्रीकृत प्रबंधन करेगा। इससे जानकारी साझा करना और नीतिगत निर्णय लेना अधिक त्वरित और प्रभावी होगा।
गैंडा और डॉल्फिन संरक्षण परियोजनाओं को मंजूरी कैसे मिली?
National CAMPA की सातवीं संचालन समिति बैठक में, जिसकी अध्यक्षता भूपेंद्र यादव ने की, गैंडा और डॉल्फिन समेत चार नई संरक्षण परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई। यह बैठक वन संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
मानव-वन्यजीव संघर्ष से सबसे अधिक कौन प्रभावित होता है?
वन क्षेत्रों के निकट रहने वाले किसान और ग्रामीण समुदाय सर्वाधिक प्रभावित होते हैं, जिनकी फसलें और जान-माल वन्यजीवों के हमलों से खतरे में रहते हैं। मंत्री ने इन्हीं समुदायों की भागीदारी को समाधान का केंद्र बताया।
National CAMPA क्या है और इसकी सातवीं बैठक में क्या हुआ?
National CAMPA यानी राष्ट्रीय प्रतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण वन संरक्षण और प्रतिपूरक वनीकरण के लिए धन प्रबंधन करता है। सातवीं बैठक में वन संरक्षण, प्रतिपूरक वनीकरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कई प्रस्तावों पर विचार किया गया और चार नई परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
राष्ट्र प्रेस
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