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क्या देशभर में डॉल्फिनों की दूसरी राउंड की गिनती शुरू हो गई है बिजनौर से?

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क्या देशभर में डॉल्फिनों की दूसरी राउंड की गिनती शुरू हो गई है बिजनौर से?

सारांश

भारत में डॉल्फिनों के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बिजनौर से दूसरी राउंड की गिनती शुरू कर दी है। यह सर्वे न केवल डॉल्फिनों की संख्या को ट्रैक करेगा, बल्कि उनके संरक्षण के लिए नई नीतियों को भी विकसित करेगा।

मुख्य बातें

डॉल्फिनों की गिनती का दूसरा राउंड शुरू हुआ।
बिजनौर में ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
सर्वे में हाइड्रोफोन जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
गंगा और सिंधु नदी में डॉल्फिनों की स्थितियों का मूल्यांकन किया जाएगा।
इस सर्वे से संरक्षण नीतियों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

नई दिल्ली, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में डॉल्फिनों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के बिजनौर से देशभर में डॉल्फिनों की गिनती शुरू की। यह कदम पिछले साल मार्च में प्रधानमंत्री द्वारा गिर के नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (एनबीडब्ल्यूएल) में पहली राउंड के परिणाम जारी करने के बाद उठाया गया है।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने पिछले वाइल्डलाइफ वीक में देहरादून में इस दूसरे राउंड और इसके एस्टिमेशन प्रोटोकॉल को लॉन्च किया था। इस कार्यक्रम का समन्वय वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) देहरादून कर रहा है। साथ ही इसमें राज्य वन विभाग और कुछ प्रमुख संरक्षण संस्थाएं जैसे डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, आराण्यक और वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया भी सहयोग कर रही हैं।

बिजनौर में 13 जिलों के वन कर्मचारियों के लिए एक रीजनल ट्रेनिंग वर्कशॉप हुई। आगे भी हर 10–15 जिलों के लिए समय-समय पर ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि फील्ड में सभी टीमों की क्षमता और तरीका एक समान हो।

सर्वे का काम 26 शोधकर्ताओं ने तीन बोटों में बैठकर शुरू किया। इस दौरान वे पारिस्थितिकी और हैबिटेट से जुड़े डाटा इकट्ठा करेंगे। साथ ही हाइड्रोफोन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके पानी के अंदर की आवाजों से डॉल्फिनों की मौजूदगी का पता लगाएंगे। पहले फेज में यह सर्वे गंगा नदी की मुख्य धारा में बिजनौर से लेकर गंगा सागर और साथ ही सिंधु नदी तक किया जाएगा। दूसरे फेज में ब्रह्मपुत्र, गंगा की सहायक नदियां, सुंदरबन और ओडिशा शामिल होंगे।

सर्वे में सिर्फ गंगा नदी में ही नहीं, बल्कि सिंधु नदी डॉल्फिन और इररावड्डी डॉल्फिन की भी स्थिति देखी जाएगी। साथ ही उनके रहने के पर्यावरण और खतरे और अन्य महत्वपूर्ण जीव-जंतु जो संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, उनका भी मूल्यांकन किया जाएगा। इससे वैज्ञानिक डाटा मिलेगा, जो नीतियों और संरक्षण योजनाओं को मजबूत बनाने में मदद करेगा।

पिछले सर्वे (2021–23) में भारत में लगभग 6,327 रिवरिन डॉल्फिनों का अनुमान लगाया गया था। इसमें गंगा, यमुना, चंबल, गंडक, घाघरा, कोसी, महानंदा और ब्रह्मपुत्र नदियों में गंगा नदी डॉल्फिनें शामिल थीं और बीच नदी में सिंधु नदी डॉल्फिन की छोटी आबादी मिली थी। सबसे ज्यादा डॉल्फिन उत्तर प्रदेश और बिहार में पाई गईं, इसके बाद पश्चिम बंगाल और असम का नंबर था। यह दिखाता है कि गंगा बेसिन लंबी अवधि के डॉल्फिन संरक्षण के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

इस बार का सर्वे पिछले तरीके के समान होगा, लेकिन नई नदियों और क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। इसमें इररावड्डी डॉल्फिन का भी अध्ययन किया जाएगा, खासकर सुंदरबन और ओडिशा में। इससे न केवल उनकी संख्या का अपडेट मिलेगा, बल्कि खतरे और हैबिटैट की स्थिति का भी पता चलेगा। ऐसे डाटा से प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत भारत की नदियों और डॉल्फिनों के संरक्षण में और बेहतर योजनाएं बनाई जा सकेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमारे जल पारिस्थितिकी तंत्र का भी अभिन्न हिस्सा हैं। इस गिनती के माध्यम से हम न केवल उनकी संख्या का पता लगाएंगे, बल्कि उनके संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियां भी बना सकेंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉल्फिनों की गिनती कब शुरू हुई?
डॉल्फिनों की गिनती 17 जनवरी 2024 को बिजनौर से शुरू हुई।
इस गिनती में कौन-कौन सी संस्थाएं शामिल हैं?
इस गिनती में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और कई प्रमुख संरक्षण संस्थाएं शामिल हैं।
सर्वे का उद्देश्य क्या है?
सर्वे का उद्देश्य डॉल्फिनों की संख्या को ट्रैक करना और उनके संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियां बनाना है।
राष्ट्र प्रेस
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