दिल्ली में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा, 9 नए वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर की नियुक्ति
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली सरकार ने वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर के नौ नए पद बनाए हैं।
- इनकी तैनाती से जैव विविधता की सुरक्षा में सहायता मिलेगी।
- पदों की भर्ती डीएसएसएसबी के माध्यम से होगी।
- यह कदम शहरी पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करेगा।
- ये इंस्पेक्टर गैर-कानूनी गतिविधियों की रोकथाम में मदद करेंगे।
नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने फॉरेस्ट्स एंट वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट में नौ नए वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर (डायरेक्ट रिक्रूटमेंट) पदों को सृजित करने की स्वीकृति दी है। ये पद 7वें सेंट्रल पे कमीशन के तहत पे मैट्रिक्स के लेवल-6 (35,400–1,12,400 रुपए) में रखे गए हैं और इन्हें आधिकारिक रूप से नोटिफाई कर दिया गया है।
यह पहल शहरी पर्यावरण की चुनौतियों के बीच वाइल्डलाइफ संरक्षण और जैव विविधता की सुरक्षा के प्रति सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर के लिए रिक्रूटमेंट नियमों को उपराज्यपाल, दिल्ली की मंजूरी से संशोधित कर गजट में नोटिफाई किया गया है।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “सरकार पर्यावरण संरक्षण को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक सुधार कर रही है। दिल्ली के अलग-अलग फील्ड डिविज़न में वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर की तैनाती एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे हमारी टीमें वाइल्डलाइफ की सुरक्षा, शिकार रोकने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को समय पर संभाल सकेंगी।”
पहले विभाग में केवल एक वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर का पद हेडक्वार्टर में था, जबकि चारों फील्ड डिविज़न में कोई समर्पित स्टाफ नहीं था। इससे ग्राउंड लेवल पर प्रवर्तन, गैर-कानूनी गतिविधियों पर रोक, मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन और जैव विविधता प्रबंधन प्रभावित हो रहे थे।
इन नौ पदों में से आठ पदों पर भर्ती दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड (डीएसएसएसबी) के माध्यम से डायरेक्ट रिक्रूटमेंट के जरिए की जाएगी।
मंत्री ने कहा, “यह निर्णय ग्राउंड पर संरक्षण को सशक्त करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि शहरीकरण के बीच भी दिल्ली की जैव विविधता सुरक्षित और समृद्ध रहे। हैबिटैट संरक्षण से लेकर कानून लागू करने तक, ये इंस्पेक्टर वास्तविक बदलाव लाएंगे।”
इन वाइल्डलाइफ इंस्पेक्टर की नियुक्ति से विभाग की क्षमता में बड़ा सुधार होगा, जिससे वाइल्डलाइफ सुरक्षा, गैर-कानूनी गतिविधियों की रोकथाम, मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन और जैव विविधता प्रबंधन को पूरे शहर में मजबूती मिलेगी। यह कदम स्थायी शहरी पारिस्थितिकी के लिए संस्थागत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।