महंगे लेजर या शॉक वेव उपचार नहीं, घुटनों के दर्द में सरल उपाय ही सबसे प्रभावी
सारांश
Key Takeaways
- घुटनों के दर्द के लिए साधारण उपाय प्रभावी हैं।
- नी ब्रेसेस दर्द में राहत देते हैं।
- हाइड्रोथेरेपी से मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं।
- नियमित व्यायाम से जोड़ की कठोरता कम होती है।
- महंगे उपचार हमेशा बेहतर नहीं होते।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। घुटनों का दर्द आजकल बहुत से लोगों की दैनिक गतिविधियों में बाधा डाल रहा है। यह दर्द समय के साथ बढ़ता है और हड्डियों तथा जोड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। इस समस्या का सामना कर रहे लोग अक्सर महंगे इलाज जैसे लेजर थेरेपी और शॉक वेव उपचार की ओर जाते हैं। हालाँकि, एक नई स्टडी ने इन उपचारों के विपरीत कुछ दिलचस्प निष्कर्ष प्रस्तुत किए हैं।
प्लॉस वन में प्रकाशित इस अध्ययन में 139 क्लिनिकल ट्रायल्स के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिसमें लगभग 10,000 प्रतिभागियों की जानकारी सम्मिलित थी। शोधकर्ताओं का उद्देश्य विभिन्न नॉन-ड्रग उपचारों की तुलना करना और पता लगाना था कि कौन से उपाय सबसे अधिक प्रभावकारी हैं। इस अध्ययन में 12 प्रकार की चिकित्सा विधियाँ शामिल थीं, जिनमें साधारण एक्सरसाइज से लेकर हाई-टेक उपचार जैसे लेजर और इलेक्ट्रिकल थेरेपी तक शामिल थे।
निष्कर्ष आश्चर्यजनक थे। शोध में पाया गया कि सबसे प्रभावी उपाय महंगे या हाई-टेक नहीं थे। इसके बजाय, सरल और आसानी से उपलब्ध उपाय सबसे कारगर साबित हुए। नी ब्रेसेस सबसे शीर्ष पर रहे। ये ब्रेसेस घुटने को स्थिर बनाने में मदद करते हैं और जोड़ के विशेष भाग पर दबाव को कम करते हैं, जिससे दर्द कम होता है और चलने-फिरने में सहूलियत होती है। ये ब्रेसेस आसानी से मिलते हैं और बहुत महंगे भी नहीं हैं, इसलिए अधिकांश मरीजों के लिए ये एक व्यावहारिक विकल्प हैं।
इसके बाद हाइड्रोथेरेपी यानी पानी में व्यायाम ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। गर्म पानी में व्यायाम करने से जोड़ पर भार कम होता है, जिससे घुटनों की मांसपेशियाँ सुरक्षित रहते हुए मजबूत होती हैं। पानी की प्रतिरोधक क्षमता मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करती है और दर्द को कम करती है। इस कारण यह विधि दर्द से राहत और मूवमेंट में सुधार में प्रभावी साबित हुई।
तीसरा सबसे प्रभावी उपाय है नियमित एक्सरसाइज। रोजाना हल्का चलना, स्ट्रेचिंग और मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम घुटने की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं। इससे जोड़ की कठोरता कम होती है, संतुलन बेहतर होता है और दैनिक कार्य करना आसान हो जाता है। समय के साथ यह मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाता है।
इसके विपरीत, हाई-टेक उपचार जैसे लेजर थेरेपी और शॉक वेव थेरेपी केवल मध्यम लाभ दे पाए। अल्ट्रासाउंड थेरेपी सबसे कम प्रभावशाली साबित हुई। इसका अर्थ यह है कि नई तकनीकें हमेशा सबसे अच्छी नहीं होतीं, और सरल उपायों की तुलना में उनकी प्रभावशीलता कम हो सकती है।
इस अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ कि मरीजों और डॉक्टरों को घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस के उपचार में अपने दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है। महंगे या जटिल उपचार के बजाय सरल, सुरक्षित और सुलभ उपाय अपनाना अधिक प्रभावी हो सकता है। नी ब्रेसेस, हाइड्रोथेरेपी और नियमित व्यायाम आसानी से उपलब्ध हैं और इन्हें अपनाना भी सरल है।